रोज की दाल-सब्जी हो, सलाद हो या फिर फ्रूट चाट, नमक के बिना स्वाद अधूरा है। भारतीय घरों में ज्यादातर सफेद नमक का इस्तेमाल होता है, लेकिन पिछले कुछ समय से काला नमक और पिंक सॉल्ट भी काफी लोकप्रिय हो गया है। खासकर पिंक सॉल्ट को लेकर अक्सर दावा किया जाता है कि यह सफेद नमक से ज्यादा हेल्दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सफेद नमक छोड़कर पिंक सॉल्ट अपनाना सही है? और काला नमक आखिर इन दोनों से कितना अलग है?
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में न्यूट्रिशनिस्ट, डायबिटीज और इंफ्लेमेशन स्पेशलिस्ट खुशबू जैन तिब्रेवाला के अनुसार, नमक का चुनाव सिर्फ हेल्थ से जुड़े दावों को देखकर नहीं करना चाहिए। तीनों नमक की अपनी अलग खासियत और इस्तेमाल है, लेकिन किसी एक को पूरी तरह अपनाकर दूसरे को छोड़ देना हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं हो सकता।
सबसे पहले जानें सफेद नमक के बारे में
सफेद नमक, जिसे आमतौर पर टेबल सॉल्ट कहा जाता है, घरों में रोजाना सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। बाजार में मिलने वाले सामान्य सफेद नमक में आयोडीन होता है।
आयोडीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसलिए पिंक सॉल्ट के चक्कर में आयोडीन युक्त सफेद नमक को पूरी तरह छोड़ देना समझदारी नहीं हो सकती। खासकर भारत में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा को लेकर सावधानी जरूरी है।
पिंक सॉल्ट आखिर सफेद नमक से कैसे अलग है?
पिंक सॉल्ट को आमतौर पर हिमालयन सॉल्ट भी कहा जाता है। इसका गुलाबी रंग इसमें मौजूद कुछ ट्रेस मिनरल्स, जैसे आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम की वजह से होता है। यही मिनरल्स इसके रंग और स्वाद को सामान्य सफेद नमक से थोड़ा अलग बनाते हैं।
पिंक सॉल्ट को लेकर यह भी कहा जाता है कि यह कम प्रोसेस्ड होता है और इसमें एंटी-केकिंग एजेंट्स जैसे कुछ एडिटिव्स की जरूरत कम पड़ सकती है। लेकिन सिर्फ इसी आधार पर इसे सफेद नमक से कहीं ज्यादा हेल्दी मान लेना सही नहीं है।
विशेषज्ञ के अनुसार, पिंक सॉल्ट में मौजूद मिनरल्स की मात्रा इतनी कम होती है कि सिर्फ इसे खाने से शरीर को कोई बड़ा पोषण संबंधी फायदा मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
क्या पिंक सॉल्ट हाई BP वालों के लिए बेहतर है?
यह भी एक आम धारणा है कि पिंक सॉल्ट सामान्य सफेद नमक की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है और इसे हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देती हैं कि ऐसा मानना ठीक नहीं है।
पिंक सॉल्ट में भी सोडियम होता है और इसकी मात्रा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए सिर्फ सफेद नमक की जगह पिंक सॉल्ट इस्तेमाल करने से नमक ज्यादा खाने का कोई मतलब नहीं है।
सिर्फ पिंक सॉल्ट खाना क्यों पड़ सकता है भारी?
पिंक सॉल्ट आमतौर पर आयोडीन युक्त नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति रोजाना इस्तेमाल होने वाले आयोडीन युक्त नमक को पूरी तरह छोड़कर सिर्फ पिंक सॉल्ट का इस्तेमाल करने लगे, तो लंबे समय में आयोडीन की कमी का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ खुशबू जैन तिब्रेवाला के अनुसार, लंबे समय तक सिर्फ पिंक सॉल्ट पर निर्भर रहने से आयोडीन की कमी से जुड़ी समस्याओं का खतरा हो सकता है। आयोडीन शरीर में थायरॉइड हार्मोन के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी से घेंघा जैसी समस्याएं हो सकती हैं और गर्भावस्था के दौरान भी पर्याप्त आयोडीन लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसलिए पिंक सॉल्ट को रोज के आयोडीन युक्त नमक का सीधा विकल्प मानने से पहले यह समझना जरूरी है कि पिंक सॉल्ट का रंग और उसमें मौजूद ट्रेस मिनरल्स, आयोडीन की जरूरत को पूरा नहीं करते।
काला नमक इन दोनों से कितना अलग है?
काला नमक अपने खास स्वाद और तेज सुगंध के कारण सफेद और पिंक सॉल्ट से अलग पहचाना जाता है। इसे अक्सर चाट, रायता, सलाद, जलजीरा और फ्रूट चाट जैसी चीजों में इस्तेमाल किया जाता है।
काले नमक की खुशबू और स्वाद में सल्फर यौगिकों की भूमिका होती है, जिसके कारण इसका फ्लेवर अलग महसूस होता है। कई लोग इसे पाचन से जोड़कर भी देखते हैं और इसका इस्तेमाल खासतौर पर पाचन से जुड़ी तैयारियों में करते हैं।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि काला नमक जरूरत से ज्यादा खाया जाए। आखिरकार नमक चाहे किसी भी रंग का हो, उसकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।
तो घर में कौन-सा नमक रखना चाहिए?
विशेषज्ञ खुशबू जैन तिब्रेवाला का मानना है कि हर नमक का अपना अलग इस्तेमाल हो सकता है। रोजमर्रा के भोजन में आयोडीन युक्त सफेद नमक लिया जा सकता है, जबकि पिंक सॉल्ट का इस्तेमाल उसके अलग स्वाद और टेक्सचर के लिए किया जा सकता है। काला नमक चाट, सलाद, रायता और दूसरी पसंदीदा चीजों में फ्लेवर बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
मतलब यह कि नमक को लेकर “एक ही सबसे हेल्दी है” वाली सोच सही नहीं है। अलग-अलग नमक का इस्तेमाल अलग जरूरत और स्वाद के हिसाब से किया जा सकता है।
नमक चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान
रोज के इस्तेमाल में आयोडीन की जरूरत को नजरअंदाज न करें।
सिर्फ पिंक सॉल्ट को हेल्दी समझकर सामान्य आयोडीन युक्त नमक पूरी तरह बंद न करें।
हाई ब्लड प्रेशर या अन्य कारणों से नमक कम करने की सलाह मिली है तो पिंक या काला नमक चुनने के बाद भी मात्रा पर नियंत्रण रखें।
काला नमक और पिंक सॉल्ट को स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इन्हें जरूरत से ज्यादा खाना सही नहीं है।
किसी भी नमक को “डिटॉक्स” या किसी बीमारी का इलाज मानकर इस्तेमाल न करें।
सफेद नमक, काला नमक और पिंक सॉल्ट—तीनों का रंग, स्वाद और इस्तेमाल अलग हो सकता है। पिंक सॉल्ट में कुछ ट्रेस मिनरल्स जरूर पाए जाते हैं, लेकिन इसकी वजह से यह हर मामले में सफेद नमक से बेहतर नहीं हो जाता। वहीं, सिर्फ पिंक सॉल्ट पर पूरी तरह निर्भर रहने से आयोडीन की जरूरत प्रभावित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अगर आपको थायरॉइड, हाई ब्लड प्रेशर या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण नमक या आयोडीन की मात्रा को लेकर विशेष सलाह दी गई है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लें।
