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प्रेग्नेंसी के लिए महीने के कौन से दिन माने गए हैं बेस्ट? मासिक चक्र से ऐसे लगा सकती हैं पता

पीरियड से पहले अपने ओवुलेशन पीरियड की मॉनीटरिंग करें। कंसीव करने के लिए यह पीरियड अच्छा होता है।

प्रेग्नेंसी के लिए महीने के कौन से दिन माने गए हैं बेस्ट? मासिक चक्र से ऐसे लगा सकती हैं पता
प्रेग्नेंसी कंफर्म करने के लिए सिर्फ प्रेग्नेंसी टेस्ट पर निर्भर नहीं रहें बल्कि अल्ट्रासाउंड भी कराएं। photo-freepik

प्रेग्नेंसी और पीरियड यानी मासिक चक्र का आपस में गहरा संबंध है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि आप कंसीव करने का प्रयास कर रही हैं तो शारीरिक संबंध बनाने के लिए यदि मासिक चक्र के दौरान सही दिन का चुनाव करें तो पॉजिटिव रिजल्ट की संभावना बढ़ जाती है। हर पीरियड के दौरान 3 से 4 दिन ऐसे होते हैं, जिस दौरान संबंध बनाने से प्रेग्नेंसी के चांस काफी बढ़ जाते हैं, लेकिन अक्सर कपल गलती कर बैठते हैं।

जानी-मानी गायनकोलॉजिस्ट और IVF एक्सपर्ट डॉ. सुप्रिया पुराणिक अपने एक वीडियो में कहती हैं कि हर महिला की मासिक चक्र (पीरियड) की अवधि अलग-अलग रहती है। किसी की 24 दिन रहती है, किसी की 28 दिन और किसी की 35 या 40 दिन रहती है। वह कहती हैं कि अगर किसी महिला का पीरियड डेज फिक्स है तो फर्टाइल डेज पता लगाना आसान होता है। लेकिन मासिक चक्र में गड़बड़ी हो या अनियमित हो तो मुश्किल है।

Ovulation पीरियड की सही जानकारी जरूरी

डॉ. पुराणिक कहती हैं कि महिलाओं में पीरियड से 12-14 दिन पहले ओवुलेशन होता है। ओवुलेशन यानी जब ओवरी में एग रिलीज होता है। अगर ओवुलेशन पीरियड में शारीरिक संबंध बनाया जाए तो प्रेग्नेंसी के चांस काफी हद तक बढ़ जाता हैं।

कैसे पता लगाएं अपना ओवुलेशन पीरियड?

उदाहरण के तौर पर मान लें कि आज महीने की पहली तारीख है। यदि किसी महिला का पीरियड (मासिक चक्र) 24 दिनों का है तो इससे 12 से 14 दिन पहले उसका ओवुलेशन पीरियड होगा। यानी 10-14 तारीख के बीच कंसीव करने की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह यदि किसी का मासिक चक्र 28 दिनों का है तो उसका ओवुलेशन पीरियड महीने की 14 तारीख के आसपास होगा।

पीरियड अनियमित है तो क्या करें?

डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ ऐसी महिलाओं का फर्टाइल पीरियड पता लगाना ही मुमकिन है, जिनका पीरियड यानी मासिक चक्र तय है। अगर किसी का पीरियड अनियमित है तो आपको ओवुलेशन पीरियड की मॉनीटरिंग करनी होगी। इसके लिए दो विकल्प हैं। पहला- फॉलीक्युलर स्टडी, जो सोनोग्राफी के माध्यम से होती है। दूसरा है- डिजिटल ओवुलेशन किट, जिसके जरिये घर बैठे ही जांच की जा सकती है।

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