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लालू यादव नहीं चाहते थे डॉ. मनमोहन सिंह बनें PM, सोनिया गांधी मनाने पहुंच गई थीं उनके घर

राजद भी यूपीए का हिस्सा थी। लालू यादव का मानना था कि अटल बिहारी वाजपेयी को सत्ता से हटाकर लोगों की अगुवाई करने के लिए सोनिया ही सबसे योग्य नेता थीं।

लालू खुद कबूल करते हैं कि सोनिया गांधी के साथ उनके ऐसे संबंध हैं कि वह जब भी मिलने के लिए समय मांगे उन्हें मिल जाता है। ( ‘सोनिया गांधी से टाइम मांगूं तो 2 मिनट में देंगी’, जब लालू प्रसाद ने रवीश कुमार से बताए थे कई राज )

साल 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए की जीत के बाद कांग्रेस सांसदों ने सोनिया गांधी को अपना नेता चुना और उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की वकालत की। हालांकि उठापटक के बाद सोनिया गांधी ने पीएम बनने से इनकार कर दिया था और डॉ मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ा दिया था। उनके इस फैसले से सियासी गलियारे में हलचल मच गई थी। सब हैरान रह गए थे। इसमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी शामिल थे।

दरअसल, 2004 के चुनाव में बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से लालू यादव की पार्टी को अकेले 22 सीटें मिली थीं। सहयोगियों की सीटों को मिलाकर यह आंकड़ा 29 तक पहुंच गया था। राजद भी यूपीए का हिस्सा थी। लालू यादव का मानना था कि अटल बिहारी वाजपेयी को सत्ता से हटाकर लोगों की अगुवाई करने के लिए सोनिया ही सबसे योग्य नेता थीं।

डॉ. मनमोहन के नाम पर अड़ गए लालू: हालांकि चुनाव के बाद जब सोनिया गांधी ने खुद पीएम का पद ठुकराकर डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे किया तब लालू यादव अड़ गए थे। वे नहीं चाहते थे कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। अपनी आत्मकथा “गोपालगंज से रायसीना” में इस घटना का जिक्र करते हुए लालू लिखते हैं कि ‘सबसे पहले सोनिया जी ने ही मुझसे बात की और जोर देकर कहा कि मैं डॉ. सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार कर लूं। लेकिन मैंने साफ इंकार कर दिया था’। मैंने स्वर्ग भले न दिया हो, स्वर जरूर दिया है- पहली बार CM बनने के बाद बोल पड़े थे लालू प्रसाद यादव

मनमोहन सिंह को लेकर लालू के घर पहुंच गई थीं सोनिया: लालू यादव के इनकार करने के बाद सोनिया गांधी, डॉ. मनमोहन सिंह को लेकर उन्हें मनाने उनके घर पहुंच गई थीं। लालू लिखते हैं कि ‘सोनिया मेरे आवास पर आईं और मुझसे इंकार की वजह जाननी चाही। उन्होंने डॉ. सिंह को तैयार किया कि वह भी मुझसे आग्रह करें’।

मान-मनौव्वल पर नरम पड़ गए थे लालू: सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह के मान-मनौव्वल के बाद लालू यादव नरम पड़ गए थे। बकौल लालू, मैं बड़ी दुविधा में था। एक तरफ मैं सोनिया को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था। लेकिन उनका आग्रह ठुकरा नहीं पाया। वह कष्ट उठाकर डॉ. मनमोहन सिंह के साथ मेरे घर तक आई थीं। इस तरह मैं डॉ. सिंह के नाम पर राजी हो गया और राजद भी सरकार का हिस्सा बनी थी।

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