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सचिन के पिता राजेश पायलट भी कर चुके हैं गांधी परिवार के खिलाफ बगावत, गहलोत से भी रहा है छत्तीस का आंकड़ा

साल 1997 में राजेश पायलट ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोक दिया। अव्वल तो यही अनूठी बात थी कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो रहा था।

Author July 15, 2020 1:35 PM
Sachin Pilot, Rajesh Pilot, Rajasthan, Congressराजेश पायलट (बाएं) और उनके बेटे सचिन पायलट। (फाइल फोटो)

Rajasthan, Sachin Pilot: राजस्थान की सियासी लड़ाई दिलचस्प हो गई है। कांग्रेस ने बगावती तेवर अख्तियार करने वाले सचिन पायलट को डिप्टी सीएम पद के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष के पद से भी हटा दिया है। उधर, पायलट ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सचिन पायलट की ही तरह उनके पिता राजेश पायलट भी कांग्रेस में रहते हुए बगावत कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने आखिरी दम तक पार्टी नहीं छोड़ी थी। वायु सेना में स्क्वाड्रन लीडर रहे राजेश पायलट की सियासत में एंट्री गांधी परिवार के जरिए ही हुई थी, लेकिन जब मौका आया तो उन्होंने गांधी परिवार को ही चुनौती दे दी थी।

इसकी पहली बानगी साल 1997 में देखने को मिली, जब राजेश पायलट (Rajesh Pilot) ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोक दिया। अव्वल तो यही अनूठी बात थी कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो रहा था। हालांकि इस चुनाव में पायलट को हार का सामना करना पड़ा और गांधी परिवार के करीबी उनके प्रतिद्वंदी सीताराम केसरी ने जीत दर्ज की। दूसरा मौका साल 2000 में सामने आया।

उस वक्त भी कांग्रेस से बगावत कर जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के खिलाफ अध्यक्ष पद के लिए दावा ठोक दिया। इस चुनाव में भी राजेश पायलट ने गांधी परिवार का साथ नहीं दिया। वे जितेंद्र प्रसाद के साथ खड़े नजर आए। हालांकि इस बार भी पायलट खेमे को हार का सामना करना पड़ा। जितेंद्र प्रसाद को हराकर सोनिया गांधी अध्यक्ष बनीं।

गहलोत और पायलट के बीच भी रहा है छत्तीस का आंकड़ा: राजस्थान की सियासत को करीब से समझने वाले बताते हैं कि सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट और अशोक गहलोत में भी हमेशा छत्तीस का आंकड़ा ही रहा है। मरुस्थल की राजनीति में सक्रिय रहे राजेश पायलट ने हमेशा गहलोत की जगह उनके समकक्ष दूसरे नेताओं को तरजीह दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1993 में तत्कालीन संचार राज्यमंत्री राजेश पायलट जोधपुर एक डाकघर भवन के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे।

इस कार्यक्रम में जोधपुर से ही सांसद और उन्हीं के पार्टी के नेता अशोक गहलोत को निमंत्रण तक नहीं दिया गया था। इससे नाराज गहलोत समर्थकों ने हंगामा कर दिया और पायलट से सवाल किया कि हमारे सांसद कहां हैं? इस पर पायलट ने चुटकी लेते हुए कहा था कि ‘यहीं कहीं टहल रहे होंगे बेचारे गहलोत..’। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसी साल गहलोत को मंत्री पद से भी हटा दिया गया था और पार्टी में अलग-थलग कर दिया गया था। जबकि पायलट की तूती बोल रही थी।

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