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जब लालू यादव को मांगना पड़ा था 200 रुपये उधार, भर आई थीं आंखें; जानिये पूरा किस्सा

आलू यादव का बचपन बेहद ही आर्थिक तंगी से गुजरा था। पटना आने के बाद भी गरीबी ने पीछा नहीं छोड़ा। इस दौरान उन्हें जेपी से 200 रुपए उधार मांगने पड़े थे।

lalu yadav, lalu yadav life, lalu yadav lifestyleजब आर्थिक तंगी से जूझ रहे लालू यादव को मांगने पड़े थे 200 रुपये उधार (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस आर्काइव )

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का बचपन तमाम आर्थिक दिक्कतों के बीच बीता है। उनका परिवार दूध का कारोबार करता था। हालांकि इससे इतनी कमाई नहीं हो पाती थी कि परिवार का ढंग से भरण-पोषण हो सके। न तो रहने को कायदे का घर था और न ही दूसरी सुविधाएं।

बकौल लालू, सर्दी और बरसात के दिन बमुश्किल कटते थे। सर्दी के दिनों में उनकी मां जूट के बोरे, पुआल, पुराने कपड़े और कपास से कंबल बनाती थीं, ताकि ठंड न लग सके। बच्चों के पास दो ही जोड़ी कपड़े हुआ करते थे और इसी में गुजारा होता था। बरसात के दौरान छत टपकने लगती थी।

भाई के साथ आ गए पटना: शुरुआती पढ़ाई-लिखाई के बाद छह भाई-बहनों में पांचवें नंबर के लालू अपने सबसे बड़े भाई मुकुंद राय के साथ पटना आ गए। यहां मिलर हाई स्कूल में दाखिला लिया, इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए पटना यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहीं उनकी सियासत में दिलचस्पी जगी और फिर छात्रसंघ का चुनाव लड़ा और अध्यक्ष बने। इसी दौरान वे जयप्रकाश नारायण के संपर्क में आए और आंदोलन के दौरान जेल भी गए।

200 रुपये लिया उधार: हालांकि तब तक भी लालू की स्थिति कुछ खास सुधरी नहीं थी। आर्थिक परेशानियां मुंह बाए खड़ी थीं। इसी दौरान उन्हें 200 रुपये उधार मांगना पड़ा था। यह पैसे उन्होंने किसी और से नहीं, बल्कि जेपी से ही उधार लिए थे। अपनी आत्मकथा ‘गोपालगंज से रायसीना’ में लालू यादव लिखते हैं कि एक बार मैं जेपी से मिलने उनके घर गया। इसी दौरान उन्होंने मेरी आर्थिक स्थिति के बारे में पूछा तो मैंने अपनी आर्थिक विपन्नता के बारे में उन्हें बता दिया और उनसे 200 रुपये मांग लिए। जेपी ने तुरंत अपनी दराज खोलकर पैसे निकाले और मुझे दे दिये। उस वक्त मेरी आंखों में आंसू आ गए थे।

सेक्रेटरी को दिया देखभाल का आदेश: लालू यादव लिखते हैं कि जेपी यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने अपने सचिव सच्चिदानंद को मेरे परिवार की देखरेख और मुझे आर्थिक रूप से मदद करने को भी कहा। क्योंकि वे जानते थे कि मैं गरीब आदमी हूं। बकौल लालू, वे जब भी जेपी से मिलने जाते थे तो उन्हें बगैर खाना खिलाए वापस नहीं आने देते थे। खासकर पिरकिया (एक तरह की मिठाई) जरूर खिलाते थे। खुद जेपी भी इस मिठाई के शौकीन थे।

चुनाव जीतते ही खरीद ली थी सेकेंड हैंड जीप: आपको बता दें कि छात्रसंघ की राजनीति से लालू यादव तेजी से सियासत की सीढ़ियां चढ़ने लगे और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1977 में वे सारण सीट से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद उनकी लाइफस्टाइल में भी बदलाव आया। लालू ने पहली बार सांसद बनने के तुरंत बाद ही विल्स कंपनी की एक सेकेंड हैंड जीप खरीद ली और इसी से चला करते थे।

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