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जब मिली थी मुलायम परिवार के पोतों को धमकी, एयरलिफ़्ट कर स्कूल से लाया गया था घर

आंदोलन के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिससे मुलायम परिवार चिंता में पड़ गया। दरअसल, प्रदर्शनकारियों ने मुलायम के चचेरे भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पोतों, तेजबीर और सिल्लू को लेकर एक धमकी दे दी...

mulayam singh yadav, akhilesh yadav, samajwadi partyमुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)

90 का दशक बीतते-बीतते उत्तर प्रदेश के पहाड़ी जिलों को काटकर अलग राज्य बनाने की मांग तेज हो गई। पहाड़ी जिलों से ताल्लुक रखने वाले तमाम कार्यकर्ता उत्तराखंड (उत्तरांचल) की मांग पर डटे थे। साल दर साल विरोध प्रदर्शनों की आग तेज होती जा रही थी। ऐसा ही एक जबरदस्त प्रदर्शन अक्टूबर 1994 में मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर हुआ। सैकड़ों की संख्या में अलग राज्य की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी रामपुर तिराहे पर इकट्ठा हो गए। वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और आगे बढ़ रहे थे।

मुलायम के पहाड़ी जिलों में घुसने पर लगा दी रोक: प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने 1 अक्टूबर 1994 की रात को बल प्रयोग कर दिया। तब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। आधी रात को बल प्रयोग से अलग राज्य की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी इतने नाराज हुए कि उन्होंने पहाड़ी जिलों की सीमा में मुलायम के घुसने पर रोक का ऐलान कर दिया। उनका मानना था कि राज्य सरकार और खासकर मुलायम के इशारे पर ही उनपर बल प्रयोग किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने दे दी धमकी:
1994 में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग के बाद अलग राज्य की मांग और तेजी से फैलती गई। अलग राज्य की मांग कर रहे एक्टिविस्ट तरह तरह की रणनीति बना रहे थे और केंद्र, राज्य सरकार पर दबाव बना रहे थे। इसी दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिससे मुलायम परिवार चिंता में पड़ गया। दरअसल,  प्रदर्शनकारियों ने मुलायम के चचेरे भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पोतों, तेजबीर और सिल्लू को लेकर एक धमकी दे दी, जो वहीं स्कूल में पढ़ते थे। इस धमकी के बाद यादव परिवार बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गया।

एयरलिफ्ट कर लाया गया सुरक्षित: बच्चों को सुरक्षित लाने की रणनीति बनने लगी। लेकिन अधिकारियों को डर था कि सड़क के रास्ते बच्चों को लाने के दौरान कहीं कोई अनहोनी न हो जाए और प्रदर्शनकारी कहीं बच्चों को कोई नुकसान न पहुंचा दें। इसके बाद बच्चों को एअरलिफ्ट कराने की योजना बनाई गई।

अखिलेश यादव की जीवनी ”अखिलेश यादव: द विंड्स आफ चेंज” में वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन लिखती हैं कि, ”प्रो. रामगोपाल यादव ने किसी तरह बच्चों को सहारनपुर के सरसांवा हवाई पट्टी तक पहुंचवाने का इंतजाम किया। इसके बाद उन्हें एयरलिफ्ट कर सुरक्षित लाया गया”।

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