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मैंने स्वर्ग भले न दिया हो, स्वर जरूर दिया है- पहली बार CM बनने के बाद बोल पड़े थे लालू प्रसाद यादव, जानिये क्या था मामला

1988 में कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद जब 1990 में चुनाव हुए तो जनता दल ने सीपीआई के साथ मिलकर सरकार बनाई। इस दौरान लालू प्रसाद यादव को पहली बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया।

लालू प्रसाद यादव शुरुआत के चार महीनों में चपरासी क्वार्टर में रहे थे (फोटो क्रेडिट- जनसत्ता)

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की छवि जमीन से जुड़े नेता की रही है। लालू प्रसाद यादव के बिना बिहार की राजनीति की तो कल्पना करना भी नामुमकिन है। भारतीय राजनीति की गहरी समझ रखने वाले नेता लालू प्रसाद यादव फिलहाल चारा घोटाला मामले में जेल में सजा काट रहे हैं। लेकिन बावजूद इसके वह बिहार की राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हैं। लालू प्रसाद यादव की जिंदगी हमेशा विवादों से भरी रही है। जहां गरीबी में जन्में लालू बचपन में अपनी मां के साथ दूध बेचने जाया करते थे।

वहीं, सीएम बनने के बाद भी लालू प्रसाद यादव कुछ महीनों के लिए चपरासी क्वार्टर में रहे थे। आज आरजेडी सुप्रीमों अपना 73वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं। इस मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े मजेदार किस्से-

1990 में पहली बार सीएम बने थे लालू प्रसाद यादव: 11 जून 1948 में गोपालगंज के फुलवारिया गांव में जन्में लालू प्रसाद यादव को शुरुआत से ही राजनीति में काफी दिलचस्पी थी। 1988 में कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद जब 1990 में चुनाव हुए तो जनता दल ने सीपीआई के साथ मिलकर सरकार बनाई। इस दौरान लालू प्रसाद यादव को पहली बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। लालू यादव का किस तरह नाम पड़ा था ‘लालू’

सीएम बनने के बाद बनाई थी लोक नायक की छवि: लालू प्रसाद यादव जब बिहार के मुख्यमंत्री बन गए तो शुरुआत में उनकी छवि ‘लोक नायक’ की बन गई थी। शुरुआत के 4 महीने लालू अपने परिवार के साथ चपरासी क्वार्टर में रहे। यहीं से उन्होंने सारा राज-काज संभाला। अधिकारियों की मीटिंग से लेकर राज्य के लिए बड़े फैसले भी लालू प्रसाद यादव ने सर्वेंट क्वार्टर में रहकर ही लिए।

उन दिनों लालू प्रसाद यादव जनता के बीच काफी लोकप्रिय हो गए थे। वह शराब के ठेकों पर खुद जाकर छापा मारते और सरेआम उनका लाइसेंस कैंसिल किया करते थे। सीएम बनने के बाद लालू प्रसाद यादव ने जनता को संबोधित करते हुए कहा था, “मैंने ‘स्वर्ग’ भले न दिया हो, लोगों को स्वर जरूर दिया है।”

चारा घोटाले में नाम आने के बाद देना पड़ गया था इस्तीफा: लालू प्रसाद यादव का नाम चारा घोटाले में तब उजागर हुआ जब बिहार की राजनीति में उनका कोई सानी नहीं था। साल 1996 में पश्चिम सिंहभूम में एनिमल हसबैंडरी विभागर पर दफ्तर पर रेड पड़ी। जिसमें सभी दस्तावेज जब्त हो गए। इस दौरान बिहार सरकार के एक बड़ा घोटाले का पर्दाफाश हुआ। दरअसल, सरकार भूसे के बदले अनाप-शनाप बिल पास करवा रही थी। इस घोटाले को चारा घोटाले का नाम दिया गया।

चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र पर गाज गिरी। जिसके चलते 1997 में लालू को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ गया।

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