भारतीय घरों में अचार बनाने की परंपरा सदियों पुरानी और बेहद खास रही है। हर क्षेत्र और हर परिवार में अचार बनाने की अपनी अलग शैली और स्वाद देखने को मिलता है। आम, नींबू, लहसुन, मिर्च, कटहल और मिक्स वेजिटेबल जैसे कई प्रकार के अचार भारतीय भोजन का स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं। खासकर गर्मियों के मौसम में आम का अचार सबसे ज्यादा बनाया जाता है, क्योंकि इस समय कच्चे आम आसानी से उपलब्ध होते हैं और इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।
हालांकि, अचार बनाने और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि थोड़ी सी भी लापरवाही से उसमें फफूंदी लगने लगती है। कई बार मेहनत से बनाया गया अचार कुछ ही दिनों में खराब हो जाता है, जिससे न सिर्फ स्वाद बिगड़ता है बल्कि पूरा अचार भी बेकार हो जाता है। लेकिन कुछ आसान और पारंपरिक तरीकों को अपनाकर अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। आइए जानते हैं किन सावधानियों को बरतना चाहिए।
फफूंदी लगने की वजह
अचार में जब पानी या नमी चली जाती है तो फफूंदी जल्दी लगती है। इसके अलावा तेल की कमी के चलते भी ये जल्दी खराब होने लगते हैं। साथ ही धूप या गर्मी की कमी के चलते भी अचार में फफूंदी लग सकती है।
किस बर्तन में रखें अचार
अचार को हमेशा चीनी मिट्टी के बर्तन में रखना चाहिए। चीनी मिट्टी तापमान को संतुलित रखता है। इसके साथ ही कांच के बर्तन में भी अचार को रखा जा सकता है। कांच के बर्तन में अचार के मसाले और तेल का कोई रिएक्शन नहीं होता है, जिससे यह सुरक्षित रहता है। इसके अलावा स्टील के बर्तन में भी अचार रखा जा सकता है। वहीं, लोहे और एल्यूमिनियम या प्लास्टिक जैसे बर्तनों में अचार रखने से बचना चाहिए।
अचार को फफूंदी से बचाने का तरीका
1- अचार को हमेशा चीनी मिट्टी, कांच या स्टील के पूरी तरह से साफ और अच्छे से सूखे बर्तन में ही रखना चाहिए। बर्तन में जरा सी नमी रहने पर फफूंदी जल्दी लग सकती है, इसलिए इस्तेमाल से पहले उसे अच्छी तरह सुखाना बेहद जरूरी होता है।
2- अचार निकालते समय हाथ या चम्मच पूरे तरह सूखे और साफ होने चाहिए। गीले हाथ या चम्मच से अचार में नमी पहुंचती है, जिससे बैक्टीरिया और फफूंदी तेजी से पनपने लगते हैं। ऐसे में अचार निकालने से पहले चम्मच को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लेना चाहिए।
3- अचार को हमेशा इतनी मात्रा में तेल में रखें कि वह पूरी तरह तेल में डूबा रहे। तेल एक प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव की तरह काम करता है, जो अचार को हवा और नमी के संपर्क से बचाता है। इससे बैक्टीरिया और फफूंदी पनपने की संभावना कम हो जाती है। समय-समय पर जांच करते रहें कि अचार के ऊपर तेल की परत बनी रहे। जरूरत पड़ने पर ऊपर से तेल डाल दें।
4- अचार के डिब्बे या जार को बार-बार खोलने से बचें, क्योंकि इससे अंदर हवा और नमी प्रवेश कर सकती है। हवा के संपर्क में आने पर अचार में बैक्टीरिया और फफूंदी पनपने का खतरा बढ़ जाता है।
5- अचार बनाते समय नमक और मसालों की मात्रा का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। नमक एक प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव की तरह काम करता है, जो अचार में बैक्टीरिया और फफूंदी को पनपने से रोकता है। वहीं, हल्दी, सरसों, मेथी जैसे मसाले अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
6- अगर अचार में किसी भी फल या सब्जी का टुकड़ा सड़ा, नरम या बदरंग नजर आए, तो उसे तुरंत निकाल देना चाहिए। ऐसे खराब टुकड़े पूरे अचार में बैक्टीरिया और फफूंदी फैलाने का कारण बन सकते हैं।
7- अचार को समय-समय पर धूप में रखना जरूरी होता है। धूप की गर्मी अचार में मौजूद अतिरिक्त नमी को कम करती है, जिससे फफूंदी और बैक्टीरिया पनपने की संभावना घट जाती है। अचार के जार को हफ्ते में एक बार कुछ घंटों के लिए हल्की धूप में रखना चाहिए।
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