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जब रैगिंग को लेकर सीनियर छात्रों से भिड़ गए थे अखिलेश यादव, लेकिन खुद करते थे हल्का-फुल्का मज़ाक

Akhilesh Yadav Education: समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने राजस्थान के धौलपुर मिलिट्री स्कूल से स्कूली पढ़ाई-लिखाई की

Akhilesh Yadav, Akhilesh Yadav life, Akhilesh Yadav college, अखिलेश यादवसाल 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य भार संभाला है

Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने राजस्थान के धौलपुर मिलिट्री स्कूल से स्कूली पढ़ाई-लिखाई की। इसके बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मैसूर चले गए। यहां उन्होंने एसजेसीई कॉलेज में दाखिला ले लिया। उन दिनों इंजीनियरिंग कॉलेजों में रैगिंग आम बात हुआ करती थी। जब अखिलेश कॉलेज में पहुंचे तो उन्हें भी इस तरह के अनुभवों का सामना करना पड़ा।

सीनियर स्टूडेंट्स को दे दी चेतावनी: अखिलेश ने देखा कि किस तरह सीनियर स्टूडेंट्स, जूनियर छात्रों को परेशान करते हैं। अखिलेश यादव की जीवनी ‘विंड्स ऑफ चेंज’ में वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन, लेखक फ्रैंक हुजूर के हवाले से लिखती हैं कि उन दिनों कैंपस में रैगिंग आम बात थी। हालांकि टीपू को जूनियर छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार करना कतई पसंद नहीं था। इस तरह की हरकतों से वह इतने परेशान हुए कि एक दिन सीधे सीनियर स्टूडेंट्स के पास पहुंच गए और उन्हें जूनियर स्टूडेंट्स के साथ रैगिंग को लेकर चेतावनी दे दी।

खुद हल्का-फुल्का मजाक करते थे: बकौल अखिलेश यादव, उन दिनों कॉलेज में फ्रेंडली रैगिंग आम बात थी। हालांकि ना तो उन्हें कभी इसका सामना करना पड़ा और ना ही उन्होंने किसी के साथ रैगिंग की। हां, दोस्तों के साथ हल्का-फुल्का मजाक जरूर कर लिया करते थे। मसलन, उनके हेयर कट, कपड़ों के ब्रांड आदि को लेकर हंसी-मजाक कर लेते थे। लेकिन कभी हिंसात्मक या परेशान करने की रैगिंग या ऐसी किसी घटना में शामिल नहीं हुए।

छिपाकर रखते थे अपनी पहचान: आपको बता बता दें कि कॉलेज के दिनों में अखिलेश यादव सबसे अपनी पहचान छिपाकर रखते थे। वे किसी को नहीं बताते थे कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव हैं, जो देश के कद्दावर नेता हैं। अखिलेश बेहद लो प्रोफाइल रहा करते थे। कॉलेज के शुरुआती 2 सालों तक वो यामाहा मोटरसाइकिल से चला करते थे। बाद में परिवार की तरफ से उन्हें एक जिप्सी मिली। वीकेंड पर इसी से मैसूर और आसपास के शहरों में घूमा करते थे।

मौका मिलते ही पहुंच जाया करते थे इंदिरा स्वीट्स: अखिलेश यादव के उत्तर भारत छोड़ सुदूर दक्षिण के मैसूर में दाखिला लेने के पीछे जो सबसे बड़ी वजह थी, वह यह थी कि टीपू को दक्षिण का खानपान खूब पसंद आता था। मैसूर का इंदिरा स्वीट्स एंड स्पाइस उनका पसंदीदा रेस्टोरेंट हुआ करते था। मौका मिलते ही वो अपने दोस्तों के साथ यहां पहुंच जाया करते थे और मैसूर पाक से लेकर तमाम व्यंजनों का आनंद लिया करते थे।

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