आयुर्वेद में जहां धतूरे का इस्तेमाल उचित शोधन (शुद्धिकरण) के बाद दर्द निवारक, अस्थमा और त्वचा रोगों के इलाज में किया जाता है, तो वहीं सनातन धर्म में इसका बेहद ही खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धतूरा महादेव को अति प्रिय है और उनकी हर पूजा में शिव उपासक उन्हें यह फल अर्पित करते हैं। लेकिन धतूरे के पौधे का लगभग हर हिस्सा-पत्तियां, फल से लेकर बीज तक बेहद विषैला होता हैं, आयुर्वेद में इसके उपयोग से पहले इसे शुद्ध करने की पूरी प्रक्रिया है और उसे विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाता है। लेकिन सामान्य तरीके से इस्तेमाल करने पर यह बेहद खतरनाक असर दिखा सकता है। यहां तक कि कोई ऐसे ही धतूरे का सेवन कर ले तो उसे बेहोशी, दौरे और सांस लेने तक में परेशानी हो सकती है। फिलहाल धतूरे की बात इसलिए हो रही है, क्योंकि कर्नाटक में धतूरे के चलते कई क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।
क्यों चर्चा में है धतूरा
दरअसल, कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (KFSDA) ने ई कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिगबास्केट, अमेजन और स्विगी इंस्टामार्ट के फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिए हैं। इन प्लेटफॉर्म पर जहरीले धतूरे के फल और बीज को खाने की चीज के रूप में ऑनलाइन बेचा जा रहा था। आयुक्त श्रीनिवास के. ने आदेश जारी कर तीनों ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को धतूरे से जुड़ी सभी लिस्टिंग और विज्ञापनों को तुरंत हटाने और इसे खाद्य पदार्थ के रूप में बेचने या बांटने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा और मान अधिनियम, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को अमेजन, स्विगी, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित करने के लिए जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, इन प्लेटफॉर्म को तुरंत अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। प्रेस रिलीज के हवाले से पीटीआई ने यह जानकारी दी है।
कैसे तूल पकड़ा धतूरा का मामला
यह मामला तब सामने आया जब बंगलुरु की एक इंस्टाग्राम यूजर ने वीडियो बनाकर बताया कि उसे स्विगी इंस्टामार्ट से मिले ऑर्डर के साथ धतूरे का फल मुफ्त में दिया गया था। वीडियो में महिला को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, “यह बेहद खतरनाक और जहरीला फल माना जाता है। गूगल के मुताबिक, इसके किसी भी हिस्से को, जिसमें बीज भी शामिल हैं, खाना बेहद जहरीला हो सकता है।”
धतूरा क्या है
इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने बेंगलुरु के एस्टर आरवी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के लीड कंसल्टेंट डॉ. अरविंद एस. एन. से धतूरे को लेकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि धतूरा नाइटशेड परिवार से जुड़ा एक पौधा है। इसे आमतौर पर थॉर्न एप्पल या डेविल्स ट्रंपेट के नाम से भी जाना जाता है। वह बताते हैं कि, धतूरे के अलग-अलग हिस्सों, जैसे बीज, पत्तियों और फलों में एट्रोपिन, स्कोपोलाइमाइन और हायोसायमीन जैसे प्राकृतिक जहरीले पदार्थ पाए जाते हैं। ये विषैले तत्व दिमाग, दिल, आंखों और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, कुछ परंपराओं में धतूरे का इस्तेमाल किया जाता रहा है लेकिन डॉक्टर का मानना है कि इसे खाने के रूप में इस्तेमाल करना न तो सुरक्षित है और न ही सेहत के लिए अच्छा है।
इतना खतरनाक क्यों होता है धतूरा
इंडियन एक्सप्रेस की टीम से बात करते हुए कंसल्टेंट डायडीशियन और सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि धतूरे का भारतीय परंपराओं में सदियों से इस्तेमाल होता रहा है। इसका जिक्र मंदिरों में होने वाली कुछ धार्मिक रस्मों और पुराने आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी मिलता है। लेकिन यही पहचान कई बार समस्या बन जाती है। उनके अनुसार, धतूरे के बीज, फल और पत्तियों समेत पौधे के हर हिस्से में ट्रोपेन एल्कलॉइड्स पाए जाते हैं। इनमें एट्रोपिन, स्कोपोलामाइन और हायोसायमीन शामिल हैं। ये सामान्य या हल्के हर्बल तत्व नहीं हैं।
किन इलाजों में किया जाता है इस्तेमाल
वह बताती हैं, “डॉक्टरों की निगरानी में इनका इस्तेमाल आंखों की सर्जरी से पहले पुतलियों को फैलाने या कुछ खास तंत्रिका संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। लेकिन बिना डॉक्टर की निगरानी और सही मात्रा के इस्तेमाल करने पर यही तत्व बेहद खतरनाक हो सकते हैं।” यह मुख्य वजह है कि अधिकारियों ने इन प्लेटफॉर्म के फूड लाइसेंस निलंबित करने का फैसला लिया है।
गलती से धतूरा खा लें तो क्या होगा
अगर कोई व्यक्ति गलती से धतूरा निगल ले, तो इससे एंटीकोलिनर्जिक पॉइजनिंग (जहर का असर) हो सकता है। इस पर डॉ. अरविंद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि धतूरे में मौजूद जहरीले तत्व शरीर के नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज में बाधा डालते हैं।
धतूरे के असर के शुरुआती लक्षण
सबसे पहले मुंह बहुत सूखना
बार-बार प्यास लगना
निगलने में परेशानी
धुंधला दिखाई देना
आंखों की पुतलियां सामान्य से ज्यादा बड़ी होना
जहर का असर बढ़ने पर
दिल की धड़कन तेज होना
त्वचा का लाल या गर्म महसूस होना
पेशाब करने में परेशानी
चक्कर आना
शरीर का संतुलन बिगड़ना
गंभीर स्थिति में क्या होता
जब स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है, तो व्यक्ति को भ्रम होने के साथ बेचैनी, असामान्य व्यवहार, ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई देना जो वास्तव में मौजूद न हों और डेलीरियम (भ्रम की गंभीर स्थिति) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कभी-कभी व्यक्ति इतनी गहरी नींद या बेहोशी जैसी स्थिति में हो सकता है कि उसे आसानी से जगाना मुश्किल हो जाता है। इसके आगे वह बताते हैं कि, “सबसे गंभीर मामलों में दौरे पड़ सकते हैं, दिल की धड़कन की लय खतरनाक तरीकों से अनियमित हो सकती है, व्यक्ति बेहोश हो सकता है और सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।” उन्होंने बताया कि धतूरे के जहर का असर कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे-
कितनी मात्रा में इसे खाया गया है
पौधे का कौन सा हिस्सा खाया गया है
व्यक्ति की उम्र या स्वास्थ्य की स्थिति कैसी है
बरतें ये सावधानियां
डॉ. अरविंद चेतावनी देते हुए कहते हैं कि धतूरे को बहुत सावधानी से संभालना चाहिए। इसे छूने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना जरूरी है, खासकर खाना खाने या खाना बनाने से पहले। उन्होंने कहा, “धतूरे को खाने योग्य फलों, सब्जियों या किसी अन्य खाद्य सामग्री के साथ न मिलाएं, क्योंकि इससे गलती से इसे खाने का खतरा हो सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि धतूरे को किसी भी तरह का पारंपरिक या कथित औषधीय इस्तेमाल सिर्फ किसी योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ की सलाह और निगरानी में ही किया जाना चाहिए, जो इसके खतरों को अच्छी तरह समझता हो।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा बात किए गए विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी तरह की दिनचर्या या उपचार शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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