सोशल मीडिया पर पिछले कुछ सालों में बोल्ड रंग, अट्रैक्टिव इंटीरियर, स्टाइलिश आउटफिट और अलग-अलग फैशन ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। लोग अपने स्टाइल में नए-नए बदलाव भी कर रहे हैं। लेकिन अब एक नया ट्रेंड तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें लोग सादगी भरी लाइफस्टाइल, कम सामान वाले घर और सिंपल फैशन को अपनाना पसंद कर रहे हैं। Elle India ने इसे वेनिला एरा थ्योरी (Vanilla Era Theory) नाम दिया है। यह सिर्फ फैशन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के लाइफस्टाइल और रोजमर्रा के फैसले लेने के तरीके में बदलाव को दर्शाता है।
इस थ्योरी के अनुसार वेनिला एरा थ्योरी, फैशन और लाइफस्टाइल में आए उस बदलाव को बताता है, जिसमें लोग बहुत ज्यादा दिखावे और बोल्ड स्टाइल को छोड़कर मिनिमलिस्ट डिजाइन, कम सजावट और न्यूट्रल रंगों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके पीछे बदलते फैशन ट्रेंड और बहुत सारे विकल्पों के कारण होने वाले निर्णय लेने की थकान और सोशल मीडिया पर लगातार दिखने वाले कंटेंट से होने वाली मानसिक थकान जैसी वजह मानी जा रही है।
क्या है वेनिला एरा थ्योरी?
लेकिन सवाल यह है कि क्या वेनिला एरा सिर्फ कुछ समय का ट्रैंड है या फिर लोगों की सोच, पसंद और लाइफस्टाइल में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है? इसे समझने के लिए इंडियन एक्सप्रेस ने काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट अतुल राज से बात की।
अतुल राज के अनुसार वेनिला एरा की लोकप्रियता इस बात के बारे में ज्यादा बताती है कि लोग कैसा महसूस कर रहे हैं। न कि इस बारे में कि वे क्या खरीद रहे हैं। आजकल लोग शारीरिक थकान से ज्यादा मानसिक थकान से जूझ रहे हैं। लोग लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, कई सारे विकल्प और बिना रुके मिलने वाली जानकारी के बीच जी रहे हैं। यही वजह है कि लोग शांत जगहों और सादा जीवन अपनाने में ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करते हैं। असली आकर्षण रंगों या सजावट में नहीं है। यह इस उम्मीद में है कि जिंदगी थोड़ी कम बोझिल महसूस हो।
हालांकि सोशल मीडिया कई बार लोगों की वास्तविक जरूरतों को भी एक ट्रेंड बना देता है। एक्सपर्ट राज के मुताबिक, शांत और सादा जीवन जीने की चाह पूरी तरह स्वाभाविक है। लेकिन जब उसी सादगी को भी एक खास तरीके से दिखाने का दबाव बनने लगे, तो इसमें सोशल मीडिया की अहम भूमिका होती है। सादगी मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अगर यह भी लोगों के लिए एक ऐसा मानक बन जाए, जिसे हर हाल में पूरा करना पड़े, तो इसका असली उद्देश्य खत्म हो जाएगा।
क्या सादगी में छिपा है खुशहाल जीवन का राज?
जिस माहौल में हम समय बिताते हैं उसका असर हमारे सोचने, भावनाओं और तनाव पर प्रतिक्रिया देने के तरीकों पर पड़ता है। व्यवस्थित माहौल और कम अनावश्यक विकल्प ध्यान भटकाने वाली चीजों को कम करते हैं। साथ ही इससे रोजमर्रा की जिंदगी को ज्यादा आसान बनाया जा सकता है। यह खासतौर पर तनावपूर्ण स्थितियों में मददगार साबित हो सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक सिर्फ शांत और सुंदर दिखने वाला घर अच्छी मानसिक सेहत की गारंटी नहीं हो सकता। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से तनाव, भावनात्मक परेशानियों या सहयोग की कमी का सामना कर रहा है, तो केवल माहौल इन समस्याओं को दूर नहीं कर सकता। सादगी तभी मददगार साबित हो सकती है, जब वह आपकी जरूरतों को पूरा करे और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाए। लेकिन जब यह एक ऐसा स्टैंडर्ड बन जाता है जिसे पाने का लोगों पर दबाव हो, तो इसकी अहमियत खत्म हो जाती है। असल में खुशहाल लाइफस्टाइल वही है जिसे लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके, न कि सिर्फ इसलिए कि वह देखने में अच्छी लगती है।
डिस्क्लेमर: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।
