समय के साथ फैशन, खान-पान, तकनीक और जीवनशैली जैसी कई चीजों के ट्रेंड तेजी से बदलते हैं। लोग नई और आसान चीजों को अपनाना पसंद करते हैं, जिससे पुराने तौर-तरीके छूट जाते हैं। रिश्तों में भी समय के साथ बदलाव देखने को मिलते रहे हैं। यह भी ट्रेंड के साथ बदलते रहते हैं। आज के समय में रिश्ते निभाने के तौर-तरीके काफी हद तक बदल चुके हैं। इसके साथ ही कई नए शब्द भी लोगों के बीच तेजी से प्रचलित होते हैं, इन्हीं में से एक है ‘फूड डिवोर्स’, जो इन दिनों काफी प्रचलन में है। आइए जानते हैं इस शब्द का मतलब और प्रचलन में क्यों है। इसका रिश्तों पर क्या असर पड़ता है।
कपल्स के लिए खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं होता। साथ में खाना रिश्ते का एक अहम हिस्सा बन सकता है। इससे पार्टनर को एक-दूसरे के साथ समय बिताने, दिनभर की बातें करने और करीब आने का मौका मिलता है। लेकिन जब दोनों की खाने की आदतें बहुत अलग हों, तो कई बार साथ में खाना परेशानी का कारण भी बन सकता है। इसी के चलते इन दिनों ‘फूड डिवोर्स’ शब्द का इस्तेमाल होने लगता है। हालांकि, इसका मतलब तलाक नहीं है। यह ऐसी स्थिति है, जब साथ रहने वाले कपल्स अपनी अलग-अलग डाइट, पसंद या दिनचर्या के कारण अलग-अलग सामान खरीदते हैं, अलग-अलग खाना बनाते हैं और अलग-अलग खाते हैं।
इसे ऐसे समझें कि एक पार्टनर वजन कम करने या अधिक प्रोटीन वाली डाइट फॉलो कर रहा है, जबकि दूसरे को अलग तरह का खाना पसंद हो। ऐसे में दोनों के लिए एक ही खाना चुनना या साथ में खाना मुश्किल हो सकता है। फिटनेस, वजन को नियंत्रित करने और खान-पान की बदलती आदतों का असर भी इस चलन पर पड़ रहा है। शाकाहारी और मांसाहारी खाने की पसंद, अलग-अलग तरह की डाइट, भूख में बदलाव और व्यस्त दिनचर्या जैसी वजहों से कपल्स एक ही समय पर एक जैसा खाना नहीं खा पाते। कुछ कपल्स के लिए अलग-अलग खाना खाना भोजन को लेकर होने वाली बहस को कम करने का एक आसान तरीका लग सकता है। लेकिन इससे यह सवाल भी उठता है कि साथ खाना खाने से बनने वाला भावनात्मक जुड़ाव कहीं कम तो नहीं हो रहा।
भारत में यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां साथ बैठकर खाना पारंपरिक रूप से परिवार के बीच प्यार और जुड़ाव से रहा है। ऐसे में जब खाना पार्टनर्स के बीच बार-बार होने वाली बहस की वजह बनने लगे, तो क्या अलग-अलग समय पर खाना खाना एक सही समझौता है या इससे अनजाने में दोनों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। इस बारे में समझने के लिए हमने एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात की।
खाने को लेकर होने वाले झगड़े रिश्ते पर कैसे डालते हैं असर
‘फूड डिवोर्स’ को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट अतुल राज से बात की तो उन्होंने बताया, “जब खाना बार-बार झगड़े की वजह बनने लगे, तो मैं सिर्फ खाने पर ध्यान नहीं दूंगा। बाहर से खाना मंगाने, देर से खाने या किसी खास डाइट को फॉलो करने को लेकर होने वाली बहस के पीछे कई बार कोई दूसरी भावना छिपी हो सकती है। एक पार्टनर को लग सकता है कि उसकी पसंद का ध्यान नहीं रखा जा रहा, जबकि दूसरे को लग सकता है कि उसे जज किया जा रहा है, उस पर नजर रखी जा रही है या उसे कंट्रोल किया जा रहा है। खाना आराम, परिवार की आदतों और देखभाल से भी जुड़ा होता है। इसलिए लोग कई बार खाने को लेकर अपनी सोच से कहीं ज्यादा भावनात्मक प्रतिक्रिया दे सकते हैं।”
उनके मुताबिक, अगर अलग-अलग तरह के खाने को लेकर बार-बार वही बहस होती है और हर बार उसके पीछे एक जैसी नाराजगी दिखाई देती है, तो यह रिश्ते में किसी बड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकता है। यह समस्या एक-दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखने, अपनी पसंद की आजादी या मन में जमा हुई नाराजगी से जुड़ी हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या दोनों पार्टनर अपनी अलग-अलग पसंद को स्वीकार करते हुए एक-दूसरे को गलत महसूस कराए बिना रह सकते हैं।
अलग खाने से भावनात्मक जुड़ा प्रभावित हो सकता है
अलग-अलग भोजन करना हमेशा गलत नहीं होता। यह कई कपल्स के लिए स्वस्थ व्यवस्था भी हो सकती है। राज बताते हैं कि नौकरी का समय, डाइट की जरूरतें या खाने की पसंद अलग हो सकती है। ऐसे में हर बार एक साथ भोजन करना जरूरी नहीं है। लेकिन यह देखना जरूरी है कि इसका रिश्ते पर क्या असर पड़ रहा है। “भोजन करने का समय दिन के उन कुछ आरामदायक पलों में से एक होता है, जब कपल्स स्वाभाविक रूप से बातचीत करते हैं, दिनभर में क्या हुआ साझा करते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं। अगर अलग-अलग खाना खाने का मतलब कम बातचीत, एक-दूसरे के साथ कम समय बिताना या साथ की दूसरी दिनचर्या का कम होना है, तो समस्या सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रह जाती। एक और संकेत तब मिलता है, जब कोई पार्टनर जानबूझकर साथ भोजन करने से बचता है क्योंकि वह दूसरे व्यक्ति से बात या सामना नहीं करना चाहता। यह सुविधा के बजाए रिश्ते में दूरी बनाने का संकेत हो सकता है।
आइए क्विज के माध्यम से समझते हैं कि अलग-अलग डाइट के बावजूद कपल्स आपसी जुड़ाव कैसे बनाए रख सकते हैं।
1- दोनों पार्टनर्स को एक ही डाइट फॉलो करनी चाहिए।
2- जब खाने की पसंद अलग हो तो साथ खाना ही नहीं खाना चाहिए।
3- एक-दूसरे की खाने की पसंद का सम्मान करें और ऐसे पल साथ बिताएं, जिनके लिए एक जैसा भोजन करना जरूरी न हो।
4- जिस पार्टनर की डाइट कम हेल्दी है, उसे अपनी आदतें बदलने के लिए कहें।
इसका सही जवाब-विकल्प 3 है। आइए जानते हैं क्यों
रिश्ते में करीबी बनाए रखने के लिए कपल्स का एक जैसा भोजन करना जरूरी नहीं है। वे सुबह की चाय, वीकेंड पर साथ खाना बनाना, कभी-कभार बाहर भोजन करने जाना या डिनर के बाद साथ टहलने जैसे तरीकों के साथ समय बिता सकते हैं, भले ही दोनों का खाना अलग ही क्यों न हो। यह भी जरूरी है कि पार्टनर की खाने की पसंद के आधार पर उसे अनहेल्दी, अनुशासनहीन या लापरवाह न कहा जाए। लक्ष्य एक जैसी डाइट अपनाना नहीं है, बल्कि अलग-अलग पसंद होने के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान करना, उनकी भावनाओं का ध्यान रखना और रिश्ते में जुड़ाव बनाए रखना है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा विशेषज्ञों से की गई बातचीत पर आधारित है। किसी भी तरह डाइट या नई दिनचर्या शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
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