What is Dopamine Detox: इस आधुनिक दौर में कई सारी चीजें बदल चुकी हैं। खासकर लोगों की लाइफस्टाइल पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ज्यादा नहीं 10 से 15 साल पहले और आज के दिन की शुरुआत में काफी अंतर है। दिन की शुरुआत की बात करें तो एक दौर था जब लोग सुबह उठते ही दिन की शुरुआत प्राकृतिक तरीके से करते थे। तब मोबाइल या डिजिटल ध्यान भटकाने वाली चीजें कम हुआ करती थीं। इसलिए सुबह का समय शरीर और दिमाग को संतुलित करने में जाता था। लोग सुबह उठने के बाद छत, आंगन या पार्क में ताजी हवा लेने के लिए जाते थे। सूर्योदय देखते थे, टहलने जाते थे, घर के काम निपटाते थे, इन सारी चीजों से शरीर को प्राकृतिक रूप संतुलित रखने में मदद मिलती थी लेकिन आज की सुबह की शुरुआत मोबाइल स्क्रीन से शुरू होती है।

क्या है Dopamine Detox
दुनिया का एक बड़ा वर्ग देर रात तक मोबाइल, सोशल मीडिया, OTT और गेमिंग में काफी समय बिताने लगा है। सुबह उठते ही नोटिफिकेशन चेक करना, खाली समय में रील्स स्क्रोल करना, काम के बीच-बीच में वीडियो देखना और रात को देर तक वेब सीरीज देखना एक आम आदत बन गई है। ये सारी चीजें भले ही देखने में छोटी लगें, लेकिन दिमाग को काफी गहराई से प्रभावित करती हैं। इससे दिमाग को तुरंत मिलने वाली छोटी-छोटी खुशी मिलती रहती है। जब आप इन सारी चीजों से ब्रेक लेकर खुद को सुकून देने के लिए प्राकृतिक तरीकों को अपनाते हैं तो इसी को डोपामाइन डिटॉक्स (Dopamine Detox) कहते हैं।

क्या है Dopamine Detox (Photo Source: Freepik)

डोपामाइन क्या है (Dopamine Detox Meaning)
डोपामाइन दिमाग में उत्पन्न होने वाला एक प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर (रसायन) है। इसमें फील-गुड, जिसे खुश रहने वाला हार्मोन भी कहा जाता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संकेत भेजकर खुशी, प्रेरणा, ध्यान और अन्य अहसास करता है। सिर्फ इतना ही नहीं डोपामाइन शारीरिक गतिविधियों और सोचने की क्षमता को भी कंट्रोल करता है।

कैसे होता है दिमाग पर असर
मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, रील्स और अन्य डिजिटल चीजें हमारे दिमाग पर धीमे जहर की तरह काम करते हैं। जब सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रील्स या अन्य चीजें देखते हैं तो उससे दिमाग को छोटी-छोटी खुशी मिलती है। दिमाग धीरे-धीरे उसी तेज और आसान खुशी का आदी होने लगता है। अब इसका असर ये होता है कि, जिन कामों में समय और धैर्य चाहिए होता है, वह मुश्किल और बोरिंग लगने लगता है। जैसे पढ़ाई करना, किताब पढ़ना, लंबा काम करना, नई स्किल सीखना या एक्सरसाइज। इन सब में एकाग्रता की जरूरत होती है, लेकिन फोन की ये लत ध्यान को जल्दी भटका देती है और बिना वजह ही आप बीच-बीच में मोबाइल फोन चेक करते रहते हैं।

कैसे करता है सेहत पर असर (Photo Source: Freepik)

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कैसे करता है सेहत पर असर
डिजिटल कंटेंट लगातार देखने से मानसिक थकान, फोकस की कमी, नींद की समस्या और प्रोडक्टिविटी में भी गिरावट की दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। इसी स्थिति को संतुलित करने के लिए डोपामाइन डिटॉक्स (Dopamine Detox) का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें लोग कुछ समय के लिए सोशल मीडिया, गेमिंग, फोन और अन्य हाई-स्टिमुलेशन गतिविधियों से दूरी बनाते हैं, ताकि दिमाग को आराम मिले और वह धीरे-धीरे सामान्य चीजों से भी खुशी महसूस करना शुरू कर सके।

कैसे करें इसकी पहचान (Photo Source: Freepik)

कैसे करें इसकी पहचान
डोपामाइन असंतुलित पहचाने के कई आसान तरीके हैं। आइए जानते हैं:

1- अगर आपका फोकस कम हो रहा है- जैसे पढ़ाई या फिर काम में मन नहीं लगता
2- मानसिक थकान और ओवरस्टिमुलेशन- दिमाग हमेशा एक्टिव रहता है।
3- प्रोडक्टिविटी घटने लगती है- छोटे काम को करना भी मुश्किल लगता है।
4- बिना फोन के बेचैनी होने लगती है।
5- स्ट्रेस और एंग्जायटी

डोपामाइन डिटॉक्स के लिए क्या करें (Photo Source: Freepik)

डोपामाइन डिटॉक्स के लिए क्या करें (Dopamine Detox Guide)
1- फोन बंद
सबसे पहले यह तय करें कि फोन का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करेंगे। अगर हो सके तो जरूरत न पड़ने पर खासकर रात को सोते वक्त और सुबह तक बंद रखें।

दिमाi को रीस्टार्ट करने के लिए अपनाएं ये तरीके (Photo Source: Freepik)

2- सोशल मीडिया से दूर
डोपामाइन डिटॉक्स में सबसे जरूरी है सोशल मीडिया से दूरी बनाना। क्योंकि, इसके सबसे बड़ा कारण यही है। ऐसे में कुछ समय के लिए तय कर लें कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

3- जंक फूड
जब दिमाग डोपामाइन का आदि हो जाता है तो इस दौरान बार-बार कुछ न कुछ खाने की इच्छा भी होती है, जिसके चलते जंक फूड्स का सेवन बढ़ जाता है। ऐसे में जितना हो सके प्राकृतिक और हेल्दी चीजों का सेवन करें। अगर जंक फूड्स खाने का मन करे तो घर पर कुछ ऐसा हेल्दी चीज बनाएं जिससे इसकी तलब दूर हो सके।

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4- खुद को समय दें
दिन में कुछ देर अपने लिए समय निकालें। इससे आपके सोचने की क्षमता बढ़ेगी। आप अपनी अगली रणनीति तैयार कर सकते हैं। या फिर बिना वजह ही किसी शांत जगह पर एकांत में कुछ देर वक्त बिताएं।

5- मेडिटेशन
दिन में कम से कम 30 मिनट से 45 मिनट मेडिटेशन और एक्सरसाइज के लिए समय जरूरी निकालें। मेडिटेशन से दिमाग की एकाग्रता बढ़ने में मदद मिलेगा। इससे आपका फोकस बढ़ेगा और अन्य मानसिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

यह भी करें
इसके अलावा कुछ देर किताबें पढ़ें। वहीं, अगर कोई काम कर रहे हैं तो बिना गाना या म्यूजिक सुने काम करें। इससे चीजों को बेहतर तरीके से करने में मदद मिलेगी।

डिस्क्लेमर: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।

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