पानी पीना सेहत के लिए वरदान है। पर्याप्त पानी का सेवन बॉडी को हाइड्रेट रखता है और किडनी हेल्थ को दुरुस्त करता है। कुछ लोगों की आदत होती है कि वो जब चाहे तब पानी पी लेते हैं, खासकर पेशाब करने के तुरंत बाद पानी की बोतल मुंह से लगा लेते हैं।  लेकिन अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों या सोशल मीडिया पर यह कहते सुना होगा कि ‘पेशाब करने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए।’ कुछ लोग तो इसे किडनी के लिए बेहद खतरनाक तक बता देते हैं। क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो यूरिन पास (Urination) करने के तुरंत बाद उठकर पानी पी लेते हैं? मेडिकल साइंस और आयुर्वेद में शरीर के इस नेचुरल डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि अलग-अलग इलाज की पद्धति में पेशाब के बाद पानी पीने को लेकर सेहत पर कैस देखा गया है।

पानी पीने के फायदे

पानी शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ कई जरूरी कामों में मदद करता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। पर्याप्त पानी पीने से ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और किडनी स्वस्थ रहती है। पानी शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करता है। यह स्किन को हेल्दी, साफ और ग्लोइंग बनाए रखने में असरदार है। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है। सही समय और सही मात्रा में पानी पीना शरीर के लिए अमृत समान माना जाता है।

यूनानी पद्धति में पेशाब के बाद पानी पीना सही है या गलत

पानी पीना शरीर के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन इसे कब और कैसे पिया जाए, इसको लेकर आयुर्वेद, एलोपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति में अलग-अलग राय देखने को मिलती है। यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार पानी पीने का समय शरीर की सेहत पर गहरा असर डालता है। प्राकृतिक चिकित्सक और हकीम डॉक्टर रियास अब्बास जैदी का कहना है कि पेशाब करने से पहले पानी पीना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे किडनी को शरीर की सफाई में मदद मिलती है। वहीं पेशाब करने के तुरंत बाद पानी पीने को यूनानी पद्धति में सही नहीं माना गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसा करने से किडनी और मूत्र तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

आयुर्वेद क्या कहता है ?

आयुर्वेद में पानी पीने का समय और मात्रा दोनों महत्वपूर्ण माने गए हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार पेशाब के तुरंत बाद बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना अग्नि यानी पाचन शक्ति को कमजोर कर सकता है। इससे वात और कफ दोष असंतुलित हो सकते हैं। जब हम पेशाब करते हैं तो हमारी पेशाब की थैली पूरी खाली हो जाती है लेकिन उसमें कुछ अव्यव रह जाते हैं जो अंदर ही अंदर घूमते रहते हैं। इसी बीच पानी पिया जाए तो ये पानी में नहीं घुल पाते और पथरी का कारण बनते हैं। हालांकि आयुर्वेद पूरी तरह पानी पीने से मना नहीं करता, बल्कि थोड़ी देर रुककर सामान्य तापमान का पानी पीने की सलाह देता है।

एलोपैथी क्या कहती है?

एलोपैथी में पेशाब के बाद पानी पीना सीधे तौर पर नुकसानदायक नहीं माना जाता। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है और पानी पीने का समय व्यक्ति की जरूरत, मौसम और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। हालांकि बहुत कम समय में जरूरत से ज्यादा पानी पीना किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से किडनी या यूरिन से जुड़ी समस्या हो।

किडनी पर क्या असर पड़ सकता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक बार-बार जरूरत से ज्यादा पानी पीने से किडनी को लगातार अतिरिक्त काम करना पड़ता है। इससे बार-बार पेशाब आना, पेट में भारीपन या ब्लोटिंग जैसी परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को यूरिन इंफेक्शन, कमजोर किडनी या ब्लैडर की समस्या है, उन्हें पानी पीने के तरीके और समय को लेकर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। एक्सपर्ट के मुताबिक पेशाब करने के तुरंत बाद बहुत अधिक मात्रा में पानी पीने से बचें। कुछ मिनट रुक कर सामान्य तापमान का पानी सीमित मात्रा में पिएं। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है

डिस्क्लेमर: यह जानकारी यूनानी चिकित्सा पद्धति और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। एलोपैथी और आयुर्वेद में पानी पीने के समय को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या, किडनी रोग या यूरिन इंफेक्शन की स्थिति में पानी पीने की आदतों में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।