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‘हम लड़कियों और महिलाओं को शिक्षित करते हैं कि उन्हें क्या खाना चाहिए और कैसे खुद को स्वस्थ रखना है’

महाराष्ट्र की महिला और बाल विकास मंत्री यशोमती ठाकुर का कहना है, “आदिवासी इलाको में अमृत आहार योजना प्रभावित हुई। लाभार्थियों को राशन देने हमें घर-घर जाना था। महामारी के पहले हमारे कार्यक्रम आंगनवाड़ी के जरिए चलाए जाते थे।”

Yashomati Thakur, Maharashtra Governmentयशोमती ठाकुर.

महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहां सरकार बच्चों, खासतौर पर लड़कियों को पौष्टिक आहार मिले यह सुनिश्चित करने के लिए दखल दे रही है। हमने महाराष्ट्र की महिला और बाल विकास मंत्री यशोमती ठाकुर से इस मुद्दे पर बात की है कि अब तक क्या किया गया है और आगे क्या करने की योजना है।

WCD ने पोषण को बेहतर बनाने और फूड फोर्टिफिकेशन की शुरू करने की दिशा में क्या कदम उठाए हैं?
खाद्य पोषण को 11 से 14 वर्ष की किशोर लड़कियों के लिए एकीकृत बाल विकास सेवाओं के तहत लागू किया गया है। इनमें ज़्यादतर वह लड़कियां हैं जो स्कूल नहीं जाती हैं। हमने उनके लिए सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम बनाया है जिसमें उन्हें अनिवार्य रूप से गर्म पकाया हुआ भोजन दिया जाता है। हम चावल, दाल और मूंग जैसे राशन के जरिए उन्हें फोर्टिफाइड न्यूट्रिशन भी प्रदान करते हैं। लगभग 42,000 किशोर लड़कियां इसका लाभ उठा रही हैं। पोषण आहार के तहत विभाग लोगों को अच्छे स्वास्थ्य, व्यवहार और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन करता है।

महिलाओं के पोषण के बारे में आप क्या कहेंगी?
हम गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं का ध्यान रखते हैं। जन आंदोलन गतिविधियों के जरिए खास प्रयास किए गए हैं। हम साइकिल रैली, नुक्कड़ नाटक करते हैं और घर-घर जाते हैं। हर साल सितंबर माह में आप राज्य में ये सारी गतिविधियां देखेंगे। हम महिलाओं और लड़कियों को शिक्षित करते हैं कि अपने स्वाथ्य का ध्यान रखने के लिए उन्हें क्या खाना चाहिए। एपीजे अब्दुल कलाम अमृत आहार योजना के तहत आंगनवाड़ी में स्तनपान कराने वाली और गर्भवती महिलाओं को गर्म भोजन दिया जाता है।

महाराष्ट्र में फूड फोर्टिफिकेशन अनिवार्य नहीं है। क्या सरकार इस बारे में कुछ सोच रही है?
इन महिलाओं और बच्चों को दिया जाने वाला आहार फोर्टिफाइड है। चावल, दाल, मूंग और पूरा राशन किट ही फोर्टिफाइड फूड है। लाभार्थी तक पहुंचने से पहले इसकी अच्छी तरह जांच की जाती है। बच्चों और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को न्यूट्रिशन (पोषण) पैकेट दिए जाते हैं ताकि दैनिक आहार से जो माइक्रो न्यूट्रिएंट्स उन्हें नहीं मिल पाते हैं, उसकी भरपाई की जा सके।

कोविड-19 महामारी की वजह से पोषण कार्यक्रम कैसे प्रभावित हुआ है?
लॉकडाउन की घोषणा अचानक से कर दी गई जिससे हमें कोई योजना बनाने का समय नहीं मिला। हमें गर्म भोजन की योजना को बंद करना पड़ा। आदिवासी इलाकों में अमृत आहार योजना प्रभावित हुई। लाभार्थियों को राशन देने हमें घर-घर जाना था। महामारी के पहले हमारे कार्यक्रम आंगनवाड़ी के जरिए चलाए जाते थे। लॉकडाउन की वजह से आंगनवाड़ी बंद हैं। कोविड-19 महामारी की वजह से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से हम उन तक नहीं पहुंच पाएं। हमारे विभाग ने मोबाइल फोन के जरिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया कि बच्चों तक पहुंचकर उन्हें कैसे परामर्श दें और कैसे उन्हें स्कूल से पहले वाली शिक्षा दें। घर-घर जाकर वह जो भी सेवाएं दे सकते थे वह दी।

महाराष्ट्र की महिला और बाल विकास मंत्री यशोमती ठाकुर का कहना है, “आदिवासी इलाको में अमृत आहार योजना प्रभावित हुई। लाभार्थियों को राशन देने हमें घर-घर जाना था। महामारी के पहले हमारे कार्यक्रम आंगनवाड़ी के जरिए चलाए जाते थे।”

फूड फोर्टिफिकेशन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
हमें अपने आसपास प्रकृति को समझना होगा। पहाड़ी इलाकों ढेर सारी सब्ज़ियां होती है जिससे स्थानीय आबादी अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकती है। लेकिन हम अपनी लापरवाही की वजह से उन चीज़ों का उपयोग नहीं करते हैं जो उपलब्ध है। फूड फोर्टिफिकेशन को बदला जा सकता है यदि लोग पौष्टिक आहार लेने लगे। कुछ आंगनवाड़ी में हमने ‘पारस बाग’ की अवधारणा शुरू की है जिसके तहत जो कुछ भी उपलब्ध है उसे लगाने और विकसित करना शामिल है। सभी मौसमी फलों की खेती की जा सकती है। इस योजना पर अभी काम चल रहा है। ‘रान भाजा’ ज़रूरी सब्ज़ियों का एक बॉक्स है, जो उनके भोजन के साथ जोड़ा जाएगा। यह सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन का काम करेगा। हम फोर्टिफिकेशन के सहारे बैठे रहने की बजाय प्राकृतिक उपज के तरीके देख रहे हैं।

कोविड-19 महामारी की वजह से बहुत से बच्चों को सरकार की मुफ्त मील सुविधा का लाभ नहीं मिला?
हमें योजना बनाने में देर हो गई, क्योंकि लॉकडाउन की घोषणा अचानक हो गई। शुरुआत 15 दिनों की देरी हुई, लेकिन हमने हर किसी तक पहुंचने की कोशिश की। मैं आंगनवाड़ी का दौरा कर रही हूं और महिलाओं से पालघर व मेलघाट में सेवाएं कैसी हैं, इस बारे में पूछ रही हूं। मैं जल्द ही नंदुरबार का दौरा
करने वाली हूं।

पिछले 5 महीने में कुपोषण सर्वे नहीं किया गया है। क्या इसके बढ़ने की आशंका है, क्योंकि कई प्रवासी मज़दूर बेरोजगार हो गए हैं?
इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगी। हर कोई समझता है कि कोविड-19 की वजह से चीज़ें वैसे नहीं रहीं, जैसी थीं। कुछ चीज़ें हमारे काबू में नहीं होती हैं। कुपोषण सर्वे चल रहा है, हमें अभी आंकड़ों की जानकारी नहीं है।

एनीमिया अब भी युवा लड़कियों और महिलाओं के लिए बड़ी समस्या है। हम क्या कदम उठा रहे हैं?
फोर्टिफाइड फूड के अलावा हम महिलाओं को भोजन में आयरन की अहमियत के बारे में भी शिक्षित कर रहे हैं। विभिन्न गतिविधियों के जरिए उन्हें भोजन की अच्छी आदतों के बारे में सिखाया जाता है।

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