एक्टर विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में एक इंटरव्यू में शाहरुख खान के विनम्र स्वभाव की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि सुपरस्टार होने के बावजूद भी उनके अंदर कोई ईगो या घमंड नहीं है। उन्होंने शाहरुख खान से जुड़ा एक किस्सा सुनाया जहां वे जमीन पर बच्चों, माता-पिता, टीचर्स और अपने बेटे अब्राहम के साथ बैठे थे। उनका ये व्यवहार देखकर वह बहुत प्रभावित हुए। मिर्ची प्लस (Mirchi Plus) को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, मैं शाहरुख खान का बहुत बड़ा फैन हूं। कॉलेज और स्कूल के दिनों से ही उनकी फिल्मों को पसंद करता आया हूं। मुझे यह भी पसंद है कि वह सिनेमा हो या जिंदगी हर विषय में अलग सोच रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मुझे सौभाग्य मिला है कि में उन्हें दोस्त, वेलविशर और गाइड के तौर पर जानता हूं।
विवेक ओबेरॉय ने शाहरुख की तारीफ करते हुए कहा कि वह वाकई कमाल के इंसान हैं। वो शाहरुख खान हैं, मेगास्टार लेकिन फिर भी वो बच्चों, उनके माता-पिता, टीचर्स और अपने बच्चे के साथ जमीन पर बैठे। बच्चों के लिए समय निकाला। उनकी सादगी और अपनेपन ने दिल जीत लिया।
शाहरुख खान के इस व्यवहार से क्या सीख मिलती है?
इस विषय को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने लाइफ कोच और साइकोथेरेपिस्ट डेल्ना राजेश से बात की। उन्होंने बताया कि विवेक ओबरॉय ने शाहरुख खान की सफलता, स्टारडम या उपलब्धियों के बारे में जिक्र नहीं किया। इसकी जगह उन्होंने शाहरुख खान के सादगी भरे अंदाज को याद किया, जिसने उन पर गहरी छाप छोड़ी। डेल्ना के अनुसार कभी-कभी बड़ी-बड़ी उपलब्धियों की बजाय कुछ साधारण चीजें ही उसके व्यक्तित्व को दर्शाती हैं।
साइकोथेरेपिस्ट डेल्ना के अनुसार जो लोग इमोशनली ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं, उन्हें शायद ही कभी दूसरों को अपनी अहमियत याद दिलाने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि खुद को महत्वपूर्ण दिखाने के लिए उन्हें किसी ऊंची कुर्ती, स्पेशल ट्रीटमेंट या खास बर्ताव या रुतबे जैसे दिखावटी चीजों की जरूरत नहीं होती। उनका आत्मविश्वास उनके अंदर से आता है, न कि इस बात से कि वे कहां बैठे हैं या लोग उन्हें किस नजरिए से देखते हैं।
क्या है विनम्रता का मतलब?
विनम्रता को मतलब अक्सर लोग गलत निकाल लेते हैं। कई लोगों को लगता है कि विनम्रता खुद को कम आंकना या अपनी उपलब्धियों को कम करके बताना है, लेकिन ऐसा नहीं है। डेल्ना के अनुसार असली विनम्रता का अर्थ है कि यह अच्छी तरह जानना की आप कौन हैं, बिना इस बात की परवाह किए कि दूसरे लोग इसे मानेंगे या नहीं। यह बिना घमंड के आत्मविश्वास है। बिना डराए-धमकाए दिखाई गई ताकत है। बिना बड़प्पन दिखाए मिली सफलता है। इमोशनल इंटेलिजेंस की सबसे बड़ी पहचान यह है कि आप दूसरों को अपने साथ कंफर्टेबल महसूस करा सकें।
इससे क्या सीख सकते हैं?
विनम्रता कोई ऐसी खूबी नहीं है जो सिर्फ कुछ लोगों ही होती है, बल्कि यह एक ऐसी आदत है जिसे रोजमर्रा की जिंदगी में भी अपनाया जा सकता है। इसके लिए आप कुछ आसान बातों का ध्यान रख सकते हैं।
- हर व्यक्ति का सम्मान करें, चाहे उसका पद, काम या सामाजिक स्तर कोई भी हो।
- किसी व्यक्ति को सिर्फ जवाब देने के लिए नहीं बल्कि समझने के लिए सुनें।
- दूसरों की खुलकर सराहना करें, इससे आपकी उपलब्धि कम नहीं हो जाती।
- अपने से कम उम्र के लोगों, बुजुर्गों या कम अनुभवी लोगों से भी सीखने के लिए तैयार रहें।
- अपने पद से ज्यादा अपने काम को बोलने दें।
- इस बात का ध्यान रखें प्रभाव तब बढ़ता है, जब लोग आपका सम्मान करें न कि आपसे डरें।
डेल्ना ने बताया कि किस तरह असली महानता, शोहरत, दोहलत या प्रभाव से नहीं होती। इन चीजों से तारीफ मिल सकती है, लेकिन सम्मान नहीं। जो लोग दूसरों पर सबसे ज्यादा असर छोड़ते हैं, उन्हें सिर्फ उनकी उपलब्धियों के लिए याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्हें इस बात के लिए याद किया जाता है कि जब उनके पास ऐसा न करने की वजह थी, तब भी उन्होंने लोगों के साथ कैसा बर्ताव किया। उन्होंने दूसरों को कितना कंफर्टेबल महसूस कराया और उन्होंने अपनी सफलता को कितनी आसानी से संभाला।
