आधुनिक समय में पेरेंटिंग का तरीका बिल्कुल बदल गया है। कई बार माता-पिता उस मोड़ पर आ जाते हैं जहां उन्हें समझ नहीं आता कि बच्चे को किस तरह समझाएं। मशहूर कोचिंग संस्थान दृष्टि IAS के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति न सिर्फ एक अध्यापक बल्कि मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। वह पेरेंटिंग्स पर भी कई बातें बता चुके हैं। अपने एक वीडियो में उन्होंने कई बातों का जिक्र किया है जो एक पेरेंट्स के लिए बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं आज के समय में सही पेरेंटिंग का नियम क्या है:
अपने सपनों को थोपना बंद करें
काफी पेरेंट्स अपने सपनों को बच्चों में देखते हैं। वह चाहते हैं कि बच्चा IAS, इंजिनियर, डॉक्टर या फिर उनके अनुसार बड़ा व्यक्ति बनें। विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि पेरेंट्स को अपनी चीजें बच्चों को थोपना बंद कर देना चाहिए। उन्हें खुद से तय करने देना चाहिए कि वह क्या बनना चाहता है। अपनी चीजों को उसपर थोप देने से अगर वह सफल हो भी गया तो दुखी ही रहेगा। इससे अच्छा है कि उसे अपने मन मुताबिक फैसले करने दें।
गलत रास्ते से वापस लाने का तरीका
कई बार बच्चे गलत रास्ते पर चले जाते हैं, तो पेरेंट्स उन्हें डांटना शुरू कर देते हैं। लेकिन यह सही तरीका नहीं है। माता-पिता को ऐसा तरीका अपनाना चाहिए जिससे बच्चे को बिना डांटे सही रास्ते पर ले आया जा सके। विकास दिव्यकीर्ति के अनुसार अगर बच्चा गलत रास्ते पर है तो उसे प्यार से समझाएं। वजह बताएं कि वह रास्ता गलत क्यों है। जिद करने पर बच्चा और भी अधिक बिगड़ सकता है।
खुश रहना जरूरी
विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि, सफलता से भी जरूरी है कि आपका बच्चा खुश रहे। उन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहिए। वह चीजों को सही तरीके से तभी कर पाएगा जब वह खुश होगा। जबरदस्ती करने पर वह आपसे दूरी बनाने लग सकता है।
सहानुभूति
एक बच्चे की परवरिश ऐसी होनी चाहिए कि उसे अपने माता-पिता के संघर्षों की समझ हो, समाज और परिवार के महत्व को अच्छे से समझे। बच्चे के अंदर हर एक प्राणी के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए। आप जिस तरह से अपने बच्चे को ढालेंगे वह उसी तरह बनता चला जाएगा।
स्मार्ट बनाएं
माता-पिता को अपने बच्चे को स्मार्ट बनाने की भी दिशा में काम करना चाहिए। आज के समय में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में बच्चे को कुछ ऐसे सिखाएं जो आगे चलकर उसके भविष्य के लिए बेहतर हो।
घर का माहौल
विकास दिव्यकीर्ति घर के माहौल पर जोर देते हुए कहते हैं कि, यह ऐसा होना चाहिए जहां बच्चे का मन लगें। उसे रात के खत्म होने का इंतजार न हो। दरअसल, जब घर का माहौल प्रेमपूर्ण, सुरक्षित और सकारात्मक होता है तो बच्चा न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहता है।
विकास दिव्यकीर्ति के अनुसार सबसे जरूरी यह है कि बच्चा चाहता क्या है। अगर उद्देश्य पता होगा तो सारे तरीके मिल जाएंगे। आज के समय में बच्चों की परवरिश करने के लिए उनका दोस्त बनना जरूरी है।
