मोदी की रैली में भीड़ को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं- वरुण गांधी ने दिया था बयान, गिर गई थी गाज़

नरेंद्र मोदी के रैली के बाद वरुण गांधी ने कहा था, ‘यह ठीक-ठाक था…वहां 40 से 50 हजार के करीब लोग थे। आप लोगों को गलत आंकड़े मिल रहे हैं। यह सच नहीं है कि दो लाख लोग पहुंचे थे। भीड़ तो सिर्फ 40-50 हजार लोगों की थी।’

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बीजेपी नेता वरुण गांधी (एक्सप्रेस फोटो)

संजय गांधी और मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी ने अपनी राजनीति की शुरुआत ताई सोनिया गांधी के खिलाफ की थी। मेनका गांधी ने इंदिरा के रहते हुए ही घर छोड़ दिया था। बाद में उन्होंने बीजेपी के साथ राजनीति में कदम रखा। बीजेपी को भी सोनिया की काट के लिए कोई नेता चाहिए थी और ऐसे में परिवार की बहू से बेहतर कौन हो सकता था? मेनका गांधी के बाद उनके बेटे वरुण ने भी राजनीति में एंट्री की और देखते ही देखते बीजेपी के बड़े नेताओं में शामिल हो गए।

वरुण गांधी को लेकर कई तरह सवाल खड़े होते हैं। शायद अब वरुण और बीजेपी के बीच की खाई ज्यादा गहरी भी नज़र आती है। वरुण काफी बेबाकी से अपनी बात रखते हैं। साल 2014 में वरुण गांधी को बीजेपी महासचिव और पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया गया था। यहां नरेंद्र मोदी की एक विशाल रैली हुई थी। पार्टी नेताओं ने इस रैली में 2 लाख लोगों के आने का दावा किया था, लेकिन वरुण ने पार्टी लाइन से अलग बयान दिया था।

नरेंद्र मोदी के रैली के बाद वरुण गांधी ने कहा था, ‘यह ठीक-ठाक था…वहां 40 से 50 हजार के करीब लोग थे। आप लोगों को गलत आंकड़े मिल रहे हैं। यह सच नहीं है कि दो लाख लोग पहुंचे थे। भीड़ तो सिर्फ 40-50 हजार लोगों की थी।’ साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक बहुमत मिला और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नरेंद्र मोदी बैठे। इसके बाद मेनका गांधी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, लेकिन वरुण को बागी तेवर दिखाने का अंजाम भुगतना पड़ा।

वरुण के बारे में क्या सोचते थे अमित शाह के करीबी: चुनाव के बाद अमित शाह को बीजेपी अध्यक्ष बना दिया गया। पार्टी में परिवार के एक सदस्य को एक पद का हवाला देते हुए वरुण गांधी को बीजेपी महासचिव के पद से हटा दिया गया। इसके बाद वरुण और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती चली गई। ‘सत्याग्रह’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वरुण को अमित शाह के करीबी नेता घमंडी और महत्वकांक्षी भी मानते हैं। यही वजह है कि वह अमित शाह की फेवरेट लिस्ट में फिट नहीं बैठते।

इसके अलावा वरुण गांधी के नाम में भी ‘गांधी’ है, लेकिन बीजेपी नेता इसके खिलाफ खुलकर बोलते हैं। पार्टी में वरुण गांधी को बड़ा पद देने से पार्टी को दिक्त का सामना भी करना पड़ रहा था। यही वजह रही कि वरुण लगातार पार्टी से दूर होते गए और 2019 के चुनाव के बाद तो मेनका और वरुण दोनों में से किसी को भी मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई। कयास लगाए जा रहे थे कि हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में वरुण गांधी अच्छा पद पा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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