जेल में दो किताबें बार-बार पढ़ा करते थे राजा भैया, कुछ ऐसे बिताए थे वो दिन

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक राजा भैया ने बताया था कि वह किताबें पढ़ने के शौकीन हैं। उन्होंने जेल में दो किताबों को कई बार पढ़ा था।

Raja Bhaiya, Kunda MLA
कुंडा के विधायक राजा भैया (Photo- Indian Express)

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से सात बार विधायक चुने जाने वाले राजा भैया एक बार फिर चर्चा में हैं। राजा भैया ने साफ कर दिया है कि चुनाव में वह समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ मैदान में उतरेंगे। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब राजा भैया को जेल की हवा खानी पड़ी थी। साल 2002 में राजा भैया को मायावती की सरकार में जेल भेज दिया गया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने जेल का अनुभव साझा किया था।

राजा भैया ने ‘BBC’ के साथ बातचीत में बताया था, ‘जेल का समय मेरे लिए आंखें खोल देने वाला था। क्योंकि इस दौरान मैंने बहुत सारी नई चीजें पढ़ी थीं। मुझे हिंदी साहित्य से हमेशा लगाव रहा था, ख़ासकर कविता से। रामधारी सिंह दिनकर मेरे पसंदीदा कवि हैं। मैंने जेल में गीता और रामचरित मानस को भी कई बार पढ़ा था।’ साल 2002 में बीजेपी विधायक पूरन सिंह बुंदेला ने राजा भैया पर अपहरण करने और धमकी देने का आरोप लगाया था।

उत्तर प्रदेश में तब मायावती की सरकार थी और मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई का आदेश देते हुए राजा भैया पर प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट (पोटा) लगाकर उन्हें जेल भेज दिया था। मायावती ने साथ ही उनके पिता उदय प्रताप सिंह और कजिन अक्षय प्रताप सिंह को भी जेल में डाल दिया था। वह करीब 10 महीने तक जेल में बंद रहे थे। उनके जेल में रहते हुए पत्नी भानवी कुमारी ने दो जुड़वा बेटों को जन्म दिया था।

मुलायम सरकार में मंत्री: साल 2003 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और सीएम पद पर बैठ थे मुलायम सिंह यादव। मुलायम के सीएम बनते ही राजा भैया जेल से बाहर आ गए थे और साथ ही उन्हें मुलायम ने अपने कैबिनेट में भी जगह दे दी थी। राजा भैया से जब मायावती के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, ‘हम मायावती जी से कोई बदला नहीं लेंगे क्योंकि हम हिंसा में विश्वास नहीं रखते हैं। वह खुद ही खत्म हो जाएंगी।’

1993 में जीते थे पहला चुनाव: राजा भैया ने साल 1993 में प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से पहला चुनाव जीता था। वह इसी सीट से लगातार सात बार विधायक चुने गए हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उनकी ऐतिहासिक जीत हुई थी। साथ ही इस पूरे इलाके में उनके परिवार का वर्चस्व रहा है। उनके पिता उदय प्रताप सिंह आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के नेता रहे हैं। वह मुहर्रम के मौके पर भंडारा करवाया करते थे, लेकिन पिछले पांच साल से उन्हें ये आयोजन करने की इजाजत नहीं मिल रही है।

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