गार्डनिंग के शौकीन लोग घर के बाहर या घर के अंदर खाली जगह का इस्तेमाल पौधे लगाने के लिए करते हैं। बालकनी, छत या बगीचे में तरह-तरह के पौधे लगाते हैं और इनकी खास देखभाल की जाती है। अच्छी ग्रोथ के लिए पौधों को पर्याप्त धूप, पानी और मिट्टी के सही मिश्रण के अलावा खाद की भी आवश्यकता होती है। यह पौधे की बेहतर ग्रोथ में मदद करता है। खाद दो प्रकार की होती हैं, पहला जैविक खाद (ऑर्गेनिक फर्टीलाइजर) और दूसरा रासायनिक खाद (केमिकल फर्टीलाइजर)। घर के बगीचे में लगे पौधों के लिए रासायनिक खाद की बजाय जैविक खाद का इस्तेमाल करना ज्यादा अच्छा मानी जाती है।

जैविक खाद प्राकृतिक स्रोतों जैसे पेड़-पौधे और पशुओं के अपशिष्ट पदार्थों से बनती हैं। इसमें वर्मीकॉम्पोस्ट, गोबर की खाद और कॉम्पोस्ट खाद आती है। अगर आपको गार्डनिंग का शौक है, तो जैविक खाद को घर पर कुछ चीजों की मदद से तैयार कर सकते हैं। जिसका इस्तेमाल करके पौधों को हरा-भरा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इन जैविक खाद का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें। क्योंकि ज्यादा खाद का इस्तेमाल मिट्टी का संतुलन बिगाड़ सकती है। इसके अलावा हर पौधे में हर तरह की खाद नहीं डालनी चाहिए। हर पौधे की पोषण जरूरतें अलग-अलग होती हैं। यही वजह है कि गलत खाद का इस्तेमाल पौधे की ग्रोथ को रोक सकती है।

केले के छिलके

केला खाने के बाद छिलकों को फेंकने की बजाय बगीचे की मिट्टी में जैविक खाद के तौर पर इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए केले के छिलकों को इकट्ठा कर लें। अब इन्हें धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। जब छिलके सूख जाएं तो इन्हें मिक्सर में डालकर अच्छी तरह पाउडर बना लें। इस पाउडर को गमले की मिट्टी में डाल सकते हैं। इसके अलावा सादे पानी में छिलकों को पाउडर मिलाकर भी गमलों में छिड़काव कर सकते हैं।

अंडे के छिलके

अंडे के छिलके से भी जैविक खाद तैयार किया जा सकता है। इसके लिए अंडे के छिलकों को पहले एक पन्नी में इकट्ठा कर लें। अब इन्हें अच्छी तरह पानी से धो लें। इससे पौधों में चींटियां नहीं लगती और बदबू भी नहीं आती। अब इन्हें धूप में सुखाकर अच्छी तरह पाउडर बना लें। पाउडर मिट्टी में आसानी से घुल जाता है और पौधे पोषक तत्व आसानी से सोख सकते हैं।

बची हुई चायपत्ती

रोजाना चाय बनाते हैं और बची हुई चायपत्ती को फेंक देते हैं। इनका इस्तेमाल करके पौधों को स्वस्थ और हरा-भरा बनाया जा सकता है। बची हुई चायपत्ती को सबसे पहले पानी से धो लें। अब इसे सुखाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को मिट्टी में डाल सकते हैं। यह एक बेहतरीन जैविक खाद साबित हो सकता है।

राख

लकड़ी और गोबर के उपलों की राख पौधों के लिए बेहतरीन जैविक खाद है, जिसमें कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम होता है। यह पौधों को कीड़ों से बचाने और उनकी बेहतर ग्रोथ में मदद कर सकता है। अगर आप चूल्हे का इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी राख को सीधा गमले की मिट्टी में डाल सकते हैं।

प्याज के छिलके

आमतौर पर प्याज के छिलकों को कचरे में फेंक दिया जाता है। अगर आपको गार्डनिंग का शौक है, तो इनका इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। प्याज के छिलकों को अलग इकट्ठा कर लें। अब इन छिलकों को एक लीटर पानी में या बोतल में ढक्कन लगाकर डाल दें। इसे छाया में करीब दो दिन के लिए छोड़ दें। आप देखेंगे कि पानी का रंग बदल जाएगा। इसे छानकर पानी को अलग कर लें। अब सादे पानी में इस घोल को मिलाएं और पौधों की मिट्टी में इस्तेमाल कर सकते हैं।

सूखी पत्तियां

बगीचे में तरह-तरह के पौधे लगाते हैं। मौसम के अनुसार पौधे बढ़ते हैं और सूख जाते हैं। ऐसे में सूखे हुए पौधे की पत्तियां भी बगीचे में यूं ही गिरी रहती हैं। इन पत्तियों को इकट्ठा करके आप खाद तैयार कर सकते हैं। सबसे पहले पत्तों को हाथों से छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें जिससे ये जल्दी सड़ सकें। अब एक बर्तन में सूखे पत्तों की परत बिछाएं। इसके ऊपर मिट्टी और गोबर की खाद छिड़कें। इससे पत्तों को गलाने में मदद मिल सकती है। इसे ढककर कुछ दिनों के लिए छाया में रख दें। इस तरह जैविक खाद तैयार की जा सकती है।

गोबर

छोटे शहरों और गांव में जैविक खाद के लिए गोबर या सूखे उपलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए एक बाल्टी में पानी लें। इसमें सूखे गोबर के उपलों को टुकड़े करके डाल दें। इसमें थोड़ा सा पिसा हुआ गुड़ और बेसन मिला लें। इस मिश्रण को छांव में करीब 2 से 3 दिन के लिए ढककर रख दें। जब पानी में उपले पूरी तरह घुल जाएंगे, तो समझ लीजिए कि खाद तैयार हो गई है। इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें। इसे सीधा मिट्टी में डालने की बजाय एक मग पानी में मिलाकर पतला घोल बना लें। इस पानी को गमले की मिट्टी में मिला दें।