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टॉपर होने के बावजूद छोड़ दिया था मेडिकल फील्ड, 22 की उम्र में पहले प्रयास में बनीं IPS, पढ़ें- सोनाली की कहानी

सोनाली परमार ने यूपीएससी की सिविल सर्विसेज एग्जाम में आल इंडिया रैंक 187 हासिल किया है। आइए पढ़ते हैं उनके सफलता की कहानी-

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22 वर्षीय सोनाली परमार को एआईआर-187वीं हासिल हुई (Image: Twitter/Preetimaithil)

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। यूपीएससी का पेपर पास करके आईएएस ऑफिसर बनना और देश की सेवा करना हर किसी का सपना होता है, लेकिन लाखों छात्र इस परीक्षा को देते हैं, लेकिन कुछ चुनिंदा लोग ही परीक्षा पास करते हैं और अधिकारी बनते हैं। भोपाल की सोनाली सिंह परमार सोनाली ने 187वीं रैंक हासिल कर अपना और अपने माता-पिता का नाम रौशन किया है। आइए जानते हैं सोनाली के सफलता की कहानी-

सिविल सर्विस का था जुनून: सोनाली पढ़ने में शुरू से ही बेहद अच्छी रही हैं। उन्होंने 12वीं साइंस स्ट्रीम से किया था; लेकिन सिविल सर्विसेस में जाने के लिए इस सब्जेक्ट को छोड़ दिया। इसके बाद जबलपुर विवि से एग्रीकल्चर से ग्रेजुएशन किया। मीडिया को दिए गए साक्षात्कार में सोनाली ने कहती हैं कि उन्होंने 12वीं बायोलॉजी सब्जेक्ट से किया था लेकिन विजन क्लीयर होने के कारण उन्होंने नीट (NEET) न देकर बीएससी एग्रीकल्चर में एडमिशन लिया।

कृषि से है खास लगाव: साथ ही उन्होंने बताया की उन्हें कृषि से भी खास लगाव हैं; चूंकि सोनाली के माता-पिता दोनों ही कृषि विभाग में कार्यरत हैं। इसके अलावा सोनाली की इंस्पिरेशन प्रीति मैथिल हैं। जो कि कृषि विभाग में ही अपनी सेवाएं दें रही हैं। आईएएस प्रीति को ही सोनाली अपना रोल मॉडल मानती है। साथ ही सोनाली बताती हैं कि मैं अपनी यूपीएससी पेपर के लिए कि जाने वाली तैयारी का श्रेय भी आईएएस प्रीति मैथिल को ही देना चाहूंगी क्योंकि उनके द्वारा दी गयी पढ़ाई की हर -एक टिप्स मेरे बहुत काम आयी। इसी वजह से पहले अटेम्प्ट में ही यूपीएससी क्लियर करने में सफल हो पाई।

यूपीएससी बचपन का था सपना: सोनाली मीडिया को दिए गए इंटरव्यू के दौरान बताती हैं कि उनके घर अफसरों का आना-जाना लगा ही रहता है। अफसरों को देखते ही मेरे अंदर एक खुशी से जाग उठती थी, मैं अक्सर घर पर जिस बारे में वो सब चर्चा करते थे तो बड़े ध्यान से उनकी बातें सुनती थी और मेरे अंदर से बस एक ही आवाज़ आती थी कि मुझे भी एक दिन ऐसे ही अफसर बन कर देश के लिए कुछ करना है , देश के हित में सेवा प्रदान करनी है। आगे बातचीत के दौरान सोनाली बताती हैं कि मैंने आईएएस बनने का सपना का वहीं से बुनना शुरू कर दिया था।

अपनी सफलता को लेकर सोनाली बताती हैं कि उन्होंने इस परीक्षा को पास करने के लिए कड़ी मेहनत की है। साथ ही वो बताती हैं कि वह रोजाना लगभग 10-12 घंटे की पढ़ाई करती थी और इस दौरान मोबाइल फोन से दूरी बनाकर रखती थीं। इसके अलावा रोजाना का एक लक्ष्य भी तैयार करके चलती थी। वहीं तैयारी के समय वो करंट-अफेयर्स से खुद को अपडेट रखने के लिए प्रतिदिन अखबार पढ़ती थीं।

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