UPSC में असफल होने के बाद रोने लगा था पूरा परिवार, मां की कही एक बात ने बदल दी जिंदगी; IAS दिलीप शेखावत की कहानी

दिलीप सिंह शेखावत ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका दूसरे प्रयास में चयन नहीं हो पाया था तो पूरा परिवार रोने लगा था। इसके बाद मां की एक बात ने उनका पूरा जीवन बदल दिया।

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मां के साथ IAS दिलीप सिंह शेखावत (Photo- Dilip Pratap Singh Shekhawat/Instagram)

UPSC को लेकर देश के युवाओं में एक अलग जोश-जुनून देखने को मिलता है, लेकिन कामयाबी चुनिंदा लोगों को ही मिल पाती है। आज हम आपको IAS अधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की कहानी बताएंगे, जिन्हें कभी खुदपर भी विश्वास नहीं था कि वह सिविल सर्विस एग्जाम क्लियर कर पाएंगे। लेकिन उनकी लगन और कठिन परिश्रम से उन्हें इस एग्जाम में कामयाबी हासिल हो पाई है।

दिलीप शेखावत ने एक इंटरव्यू में बताया था, मैं पढ़ाई में बचपन से ही नॉर्मल था। 12वीं करने के बाद मैंने इंजीनियरिंग का एग्जाम दिया तो इतनी अच्छी रैंक भी नहीं आ पाई। ओडिशा के NIIT से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए चला गया। मेरा परिवार राजस्थान का रहने वाला है तो बीच में सोचता था कि इसे छोड़कर जोधपुर के ही किसी छोटे से कॉलेज से पढाई कर लूंगा। जैसे-तैसे मैंने इंजीनियरिंग पूरी की और इस बीच मेरी नौकरी भी लग गई।’

दिलीप शेखावत आगे बताते हैं, ‘मुझे अपने वरिष्ठ साथियों से पता चला कि यूपीएससी एग्जाम क्लियर करने के बाद IAS-IPS में चयन होता है और इससे देश-समाज की सेवा की जा सकती है। लेकिन मेरा बैकग्राउंड काफी कमजोर था तो मुझे कभी नहीं लगता था कि मैं ऐसा एग्जाम कभी क्लियर भी कर पाऊंगा। जब मैंने सिविल सर्विस करने का फैसला किया तो घरवालों की मंजूरी बहुत मायने रखती थी।’

दिल्ली में की आगे की तैयारी: परिवार से इजाजत मिलने के बाद दिलीप ने दिल्ली का रुख किया। यहां आकर वह हैरान रह गए थे क्योंकि यहां बहुत भीड़ थी और बच्चे किताबें खरीद रहे थे। दिलीप बताते हैं, मैंने ये सोच लिया था कि अगर मैं यहां से वापस चला गया तो मैं कभी खुद को शीशे में नहीं देख पाऊंगा। मैंने तैयारी शुरू की और पहले प्रयास में मेरा चयन नहीं हो पाया। परिवार ने मुझे हौसला दिया और कहा कि लोग कई बार देते हैं और ये तेरा पहला प्रयास था तो तुझे कोशिश करनी चाहिए।

दिलीप याद करते हैं, मैंने दूसरे प्रयास के लिए फिर से तैयारी शुरू की। इस बार मैं इंटरव्यू तक पहुंच गया, लेकिन फिर चयन नहीं हुआ। परिवार इससे बहुत टूट गया और सभी लोग निराश हो गए। परिवार के लोग रोने लगे और उनकी परेशानी देखने के बाद मैं भी रोने लग गया। इस बीच मां ने मुझे कहा, बेटा इतना आगे निकल गया है आखिरी पड़ाव पर बाहर हुआ है। एक लंबी छलांग मारो और पार हो जाओ। मैंने तुरंत निराशा के भाव को हटाया और दोबारा तैयारी शुरू कर दी। UPSC CSE-2018 में मेरी 72 रैंक आई और मेरा चयन IAS में हो गया।

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