पिता हैं पुलिस अधिकारी, बेटे ने दो बार क्लियर किया था UPSC एग्जाम, जानिए प्रियांक किशोर की सफलता का मूल-मंत्र

प्रियांक किशोर ने दो बार यूपीएससी एग्जाम क्लियर किया था। पहले प्रयास में उन्हें IRS मिला था, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने IAS बनने का सपना पूरा कर लिया था।

UPSC, IAS Officer
IAS प्रियांक किशोर (Photo- Priyank Kishore/Instagram)

UPSC को देश के सबसे चुनौतीपूर्ण एग्जाम में से एक माना जाता है। इसके पीछे कई वजहें हैं, इसमें एक है कि इसको लेकर युवाओं में अलग जोश और जुनून देखने को मिलता है। आज हम आपको प्रियांक किशोर की कहानी बताएंगे, जिन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर लिया था, लेकिन बचपन का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने दूसरी बार भी एग्जाम दिया था। आखिरकार दूसरे प्रयास में उनका सपना पूरा हो गया था।

प्रियांक से सिविल सर्विस में आने के पीछे के कारण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं बिहार के पटना से आता हूं, लेकिन मेरी ज्यादातर पढ़ाई झारखंड में ही हुई है। मैं एक साधारण से परिवार का रहने वाला हूं। बिहार और झारखंड में लोग सिविल सर्विस को एक अलग निगाह से देखते हैं। मेरे पिता भी झारखंड स्टेट पुलिस सर्विस में हैं तो उन्हें देखकर भी मुझे यूपीएससी क्लियर करने का आइडिया आया था।’

स्कूली पढ़ाई पूरी करने के लिए बाद प्रियांक दिल्ली आ गए थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी का कल्चर बिल्कुल अलग है। रामजस कॉलेज के फाइनल में मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। पहला प्रयास मैंने 2018 में दिया था, हालांकि मुझे भी नहीं पता था कि ये इतनी जल्दी क्लियर हो जाएगा। पहले प्रयास में मेरी 274 रैंक आई थी और मुझे IRS मिला था। मैंने एक बार फिर प्रयास देने का फैसला किया क्योंकि मुझे पता था कि मेरी कमी कहां पर रह गई थी।

प्रियांक बताते हैं, ‘मैंने कुछ चीजों में बदलाव किया और सबसे ज्यादा बदलाव मैंने अपनी रणनीति में किया। दूसरे प्रयास में मैं जरूर लकी रहा और आखिरकार UPSC 2019 में मुझे 61 रैंक मिली। इस रैंक के साथ मैंने अपना बचपन का सपना पूरा करने में सफलता हासिल की थी। आखिरकार मुझे IAS मिल गया था। मैं तो सिर्फ इतना ही बता सकता हूं कि ज्यादा से ज्यादा तैयारी करना ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है। नोट्स बनाना भी एक बड़ा कारण था, मेरी कामयाबी का।’

प्रियांक का मानना है, ‘आप प्रीलिम्स को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लें। क्योंकि कई बार प्रीलिम्स नहीं क्लियर होने की स्थिति में बहुत निराशा भी होती है। अखबार भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप सिर्फ अखबार के सहारे ही रहे और दिनभर अखबार ही पढ़ें। कोशिश करें, मैग्जीन और नोट्स का सहारा भी लें।’

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