मां का सपना पूरा करने के लिए स्वीटी सेहरावत बनीं IPS, दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल थे पिता, ऐसे मिली सफलता

मां का सपना पूरा करने के लिए स्वीटी सेहरावत ने UPSC की तैयारी शुरू की थी। उनके पिता दिल्ली पुलिस में हेड-कॉन्स्टेबल थे यहीं से उन्हें आईपीएस बनने की प्रेरणा मिली थी।

Sweety Sahrawat, IPS
IPS अधिकारी स्वीटी सेहरावत (Photo- Sweety Sahrawat/Instagram)

UPSC क्लियर करने का सपना हर पढ़े-लिखे युवा का होता है, लेकिन इसमें कामयाबी हर किसी को नहीं मिल पाती है। आमतौर पर UPSC के लिए कैंडिडेट्स कई प्रयास करते हैं। कई बार हाथ लगी असफलता से निराश भी हो जाते हैं। आज हम आपको स्वीटी सेहरावत की कहानी सुनाएंगे। स्वीटी ने अपनी मां का सपना पूरा करने के लिए यूपीएससी एग्जाम दिया था और सिर्फ तीन साल की तैयारी में ही उन्हें कामयाबी हासिल हो गई थी।

स्वीटी ने खुद बताया था, ‘मेरा जन्म तो दिल्ली के गांव में हुआ था। इसके बाद हम लोग सोनीपत शिफ्ट कर गए थे। यहीं से मेरी आगे की पढ़ाई हुई। मेरी मां बचपन से चाहती थीं कि उनकी बेटी वो सब चीजें हासिल करे जो वो खुद नहीं कर पाईं। मैंने उनका सपना पूरा करने के लिए ही ये रास्ता चुना था। मैं 8-10 धंटे तक पढ़ाई किया करती थी, सोचिए दिन में इतनी ज्यादा पढ़ाई करना आसान नहीं था। धीरे-धीरे मुझे इसकी आदत पड़ गई। तीन साल के अंदर मैंने यूपीएससी क्लियर कर लिया था।’

पिता का हो गया था निधन: स्वीटी सेहरावत का जन्म दिल्ली के ‘रमज़ान पुर’ गांव में हुआ था। उनके पिता डाले राम सेहरावत दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल थे, लेकिन साल 2013 में सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार के सामने कई चुनौतियां थीं। घर में हमेशा वर्दी वाले लोगों की चर्चा होती थी। उनका भाई भी सीआईएसएफ में सब-इंस्पेक्टर हैं।

कोचिंग की मदद: स्वीटी सेहरावत ने बताया था कि उन्होंने कोचिंग सेंटर की मदद से इस एग्जाम में कामयाबी हासिल की थी। उन्होंने पहला प्रयास 2018 में दिया था और इस दौरान वह राजेंद्र नगर में कोचिंग में जा रही थी, लेकिन उन्हें कामयाबी हासिल नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने बिना कोचिंग के UPSC 2019 में 187 रैंक हासिल की थी। यहीं से उनकी सपना पूरा हो गया था और उन्हें आईपीएस के लिए चुना गया था।

स्वीटी का मानना है, अगर आप चाहें तो कुछ चीजें सीखने के लिए कोचिंग सेंटर की मदद जरूर ले सकते हो। इसका ये मतलब नहीं है कि सिर्फ कोचिंग से ही आपको कामयाबी हासिल होगी। मैंने भी कोचिंग सेंटर अंत में छोड़ दिया था। लेकिन इससे इतना तो जरूर सीख लिया था कि सिलेबस कैसा होता है। मुझे पूरा विश्वास भी था कि मैं कामयाब हो जाऊंगी।

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