कांग्रेस के इस प्रधानमंत्री को सबसे अच्छा मानते हैं मुलायम सिंह यादव के भाई, इंदिरा गांधी पर कही थी ये बात

मुलायम सिंह यादव से उम्र में 3 साल छोटे अभय राम यादव आज भी अपने गांव में खेती करते हैं। उन्होंने बताया था कि वह कभी लखनऊ नहीं जाएंगे और इसके साथ उन्होंने अपना पसंदीदा पीएम भी बताया।

Mulayam Singh Yadav, Shivpal Singh Yadav
मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव (Photo- Indian Express)

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने साल 1967 में पहला चुनाव जीता था। इसके बाद वह केंद्रीय मंत्री तक बने और उनके साथ छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव ने भी राजनीति में एंट्री की। दूसरी तरफ, मुलायम से उम्र में तीन साल छोटे अभय राम यादव ने राजनीति से दूरी बनाकर रखी। अभय राम यादव आज भी गांव में खेती करते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं। उन्होंने कहा कि वह कभी राजनीति में आएंगे भी नहीं।

‘द लल्लनटॉप के साथ इंटरव्यू में अभय राम से उनके पसंदीदा प्रधानमंत्री के बारे में भी पूछा गया था। अभय राम यादव ने कहा था, ‘हम राजनीति के लिए बने ही नहीं हैं। ईमानदार प्रधानमंत्री देश के सिर्फ लाल बहादुर शास्त्री ही बने। उनके निधन के बाद भी उनके ऊपर कर्ज निकला था। पत्नि ने उनकी गाड़ी का कर्ज चुकाया था। ईमानदार अब तक वही प्रधानमंत्री रहे हैं। कद के भी बहुत छोटे थे। लेकिन काम बहुत अच्छे किए थे।’

इंदिरा गांधी के सवाल पर अभय राम कहते हैं, ‘वह तो बहुत टेढ़ी महिला थीं। सन् 1975-76 में सभी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। ये सब इंदिरा गांधी ने ही तो किया था। इंदिरा तो राज नारायण से चुनाव हार गई थीं। इमरजेंसी के दौरान गांव में तो ऐसा कुछ नहीं हो पाया था, लेकिन नेताजी 16 महीने जेल में रहे थे। हम तो अपना घर में रहते थे और कई लोग तो बाजार तक जाने में भी डरते थे इंदिरा गांधी से।’

जब पहली बार सीएम बने थे मुलायम सिंह यादव: अभय राम कहते हैं, ‘मुलायम सिंह यादव साल 1989 में मुख्यमंत्री बने थे। हम तो तब भी खेती करते थे और अब भी खेती ही करते हैं। हमारे परिवार से सीएम बने थे और क्या। नरेंद्र मोदी तो झूठी बात को भी बहुत सफाई से पेश करते हैं। मुलायम का तो बुढ़ापा आ गया है तो अब वो तो उन्हें शुभकामनाएं ही दे सकता है, चाहे सामने कोई भी हो। उन्होंने ऐसे ही नरेंद्र मोदी को भी शुभकामनाएं दे दी थीं।’ बता दें, मुलायम सिंह यादव ने जसवंत नगर सीट से पहला चुनाव जीता था। इसके बाद वह 1996 में देश के रक्षा मंत्री तक बने थे।

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