क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप नया तुलसी का पौधा गमले में लगाते हैं तो वो कुछ दिन में सूख जाता है? या फिर नया पौधा ज्यादा दिन चल नहीं पाता है या तो उसकी पत्तियां सूख जाती हैं या फिर झड़कर गिरने लगती हैं। देखते ही देखते छोटा पौधा सूख जाता है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह गार्डनिंग की कुछ आम गलतियां भी हो सकती हैं। छोटे पौधे की जड़ें अभी मजबूत नहीं होतीं, इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी उसकी ग्रोथ पर असर डाल सकती है। यहां तुलसी के छोटे पौधे के सूखने के 5 कारण और उनके समाधान दिए गए हैं।

जरूरत से ज्यादा पानी देना

कुछ लोग नया पौधा लगाने के बाद देखभाल करने के चक्कर में जानकारी न होने पर जरूरत से ज्यादा पानी देने लगते हैं। इससे मिट्टी लगातार गीली रहती है और जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऐसे में भी आपका पौधा सूख सकता है। पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत जांचें। मिट्टी सूखी लगे तभी पानी दें। इस बात का ध्यान रखें कि गमले में ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए।

खराब मिट्टी में लगाना

कई बार तुलसी के छोटे पौधे को लगाते समय मिट्टी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता है। पौधे को केवल बगीचे की सख्त मिट्टी में लगा दिया जाता है। ऐसी मिट्टी में पानी जमा हो सकता है या जड़ों का फैलाव रुक सकता है। इसलिए मिट्टी में गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं। मिट्टी को भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली रखें। पौधे के अनुसार पर्याप्त आकार का गमला चुनें।

तेज धूप में तुरंत रख देना

अगर आप नर्सरी से तुलसी का नया पौधा लेकर आए हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें। नर्सरी से लाया गया छोटा पौधा नियंत्रित वातावरण में पला होता है। उसे सीधे कई घंटों की तेज धूप में रखने से पत्तियां झुलस सकती हैं। इसलिए नर्सरी से पौधा लाने के बाद उसे पहले 4-5 दिन हल्की धूप या छांव में रखें। धीरे-धीरे पौधे को ज्यादा धूप की आदत डालें।

ट्रांसप्लांट करते समय जड़ों को नुकसान पहुंचाना

तुलसी के बड़े पौधे के पास कई बार छोटे तुसली के पौधे उग आते हैं। ऐसे में गमला बदलते समय मिट्टी को झटक देना या जड़ों को खींचना पौधे को शॉक दे सकता है। इसलिए पौधे को उसकी पुरानी मिट्टी सहित निकालें। जड़ों को कम से कम छेड़ें। ट्रांसप्लांट के बाद 1-2 दिन तक पौधे को आराम दें।

खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल

कुछ लोग सोचते हैं कि ज्यादा खाद देने से पौधा जल्दी बढ़ेगा। लेकिन छोटे पौधों की जड़ें अधिक खाद की वजह से जल सकती हैं। शुरुआत में हल्की मात्रा में जैविक खाद दें। हर 15-20 दिन में जरूरत अनुसार खाद डालें। नई रोपाई के तुरंत बाद खाद डालने से बचें।