नीता अंबानी अक्सर अपने पारंपरिक और शाही भारतीय परिधानों को लेकर चर्चा में रहती हैं। हर मौके पर वह खास पहनावे में नजर आती हैं। उनकी साड़ी से लेकर ज्वैलरी तक अपने अंदर न जाने कितनी कहानियां समेटे होती हैं। अक्सर नीता अंबानी को कई खास मौकों पर बनारसी, पटोली, कांजीवरम और हाथ से पेंट की गई पट्टचित्र साड़ियों में नजर आ चुकी हैं। अब एक बार फिर से वह अपनी एक साड़ी को लेकर चर्चा में हैं। दरअसल, भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नीता अंबानी ने मुंबई में स्थित NMACC के ग्रैंड थिएटर में ‘द ग्रेट इंडियन म्यूजिकल: सिविलाइजेशन टू नेशन’ को दोबारा प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम के जरिए उन्होंने भारत की समृद्ध कहानी को संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
किसने तैयार की है नीता अंबानी की यह साड़ी
इसी खास मौके पर नीता अंबानी ने स्वदेश द्वारा खास तौर पर तैयार की गई साड़ी पहनी थी। यह साड़ी ओडिशा की प्रसिद्ध पट्टचित्र कला को समर्पित थी। ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर इस खास साड़ी और पूरे परिधान से जुड़ी जानकारी साझा की। ओडिशा के रघुराजपुर के कुशल बुनकरों द्वारा तैयार की गई चमकदार टसर सिल्क पर पट्टचित्र कलाकार प्रशांत महराना ने इस साड़ी पर हाथ से चित्रकारी कर सजाया है। साड़ी के बीच में ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) बनाया गया है। यह वैदिक अश्वत्थ वृक्ष से प्रेरित है और सृष्टि, निरंतरता तथा सभी जीवों के आपस में जुड़े होने का प्रतीक माना जाता है। साड़ी पर बने हर पत्ते, पक्षी और शाखा को पट्टचित्र की खास शैली में बारीकी से उकेरा गया है। इससे पूरी साड़ी ओडिशा की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले एक जीवंत कैनवास जैसी दिखाई देती है।
पट्टचित्र कलाकारी क्या है
साल 2020 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, पट्टचित्र ओडिशा की मंदिर परंपराओं से जुड़ी एक पवित्र कला है। इसकी जड़ें 5वीं शताब्दी तक मानी जाती हैं और इसका संबंध धार्मिक व भक्ति परंपराओं से रहा है। पट्टचित्र की हर तस्वीर में देवी-देवताओं से जुड़ी कहानियों को बेहद बारीकी से चित्रित किया जाता है। इसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो धार्मिक कथाओं को जीवंत बनाने में मदद करते हैं। सदियों पुरानी यह कला भक्ति और परंपरा की झलक दिखाती है।
हर एक चित्र की होती है कहानी
कई पीढ़ियों से ‘पटुआ’ के नाम से जाने जाने वाले पट्टचित्र कलाकार सामाजिक मुद्दों पर चित्र बनाने के साथ-साथ गीत भी रचते और गाते आए हैं। उनका उद्देश्य महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारियों को लोगों तक आसानी से पहुंचाना रहा है। इस वजह से यह अनोखी लोक कला सुनने और देखने के माध्यम से कहानी कहने की कला का बेहतरीन मेल है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो इस कला की परंपरा ओडिशा की सीमाओं से आगे बंगाल तक भी जुड़ी हुई है। वहां इसे ‘पटचित्र’ कहा जाता है। इस कला में लंबे स्क्रॉल पर किसी कहानी को चित्रों के जरिए दिखाया जाता है। कहानी के अलग-अलग हिस्सों को बताने के लिए कई चित्र बनाए जाते हैं। इन चित्रों में कहानी को आकर्षक तरीके से दिखाया जाता है और कलाकार उसे एक मधुर व यादगार धुन के साथ सुनाते हैं।
ओडिशा से कितना अलग है बंगाल की पटचित्र कला
साल 2020 में प्रकाशित उस लेख के अनुसार, ‘पट’ शब्द संस्कृत के ‘पट्ट’ शब्द से आया है, जिसका अर्थ कपड़ा होता है और ‘चित्र’ का अर्थ पेंटिंग या चित्रकारी है। बंगाल की पटचित्र कला में कहानियों को कपड़े पर अलग-अलग फ्रेम में ऊपर से नीचे की ओर चित्रित किया जाता है। कहानी सुनाते समय पटुआ कलाकार इस कपड़े को धीरे-धीरे खोलते जाते हैं और साथ ही गीत गाकर कहानी प्रस्तुत करते हैं। इन गीतों को ‘पटेर गान’ कहा जाता है। मुंबई में ध्वजारोहण समारोह के दौरान नीता अंबानी अपने पति मुकेश अंबानी और बेटी ईशा अंबानी के साथ नजर आईं। इस मौके पर उन्होंने नारंगी रंग का सलवार सूट पहना था, जिसके गले के पास मिरर वर्क किया गया था और उन्होंने अपने लुक को डायमंड ईयररिंग्स के साथ पूरा किया था।
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