IAS बनने के जुनून में दो बार छोड़ दिया था IPS बनने का मौका, इंजीनियर की नौकरी छोड़ हासिल की सफलता; जानिये निधि बंसल के संघर्ष की कहानी

इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद निधि ने साल बेंगलुरु स्थित एमएनसी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी करनी शुरू कर दी। हालांकि वह अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थी।

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निधि बंसल ने दो बार क्रेक कर दिया था यूपीएसई का एग्जाम (फोटो क्रेडिट- दिल्ली नॉलिज ट्रेक इंस्टाग्राम)

दुनिया की सबसे मुश्किल परिक्षाओं में से एक यूपीएससी को क्रैक करना आज के समय में हर युवा का सपना है। लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए दृढ़ निश्चय और जुनून की जरूरत होती है। इस परीक्षा को पास करने के लिए लोग दिन-रात एक कर देते हैं और जब उनका आईपीएस बनने का सपना पूरा हो जाता है तो उनकी खुशी का कोई ठीकाना नहीं रहता। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने आईएएस बनने के लिए दो बार आईपीएस बनने का मौका छोड़ दिया, उनका नाम निधि बंसल है।

निधि बंसल का जीवन-परिचय: मध्य प्रदेश के कैलारस कस्बे, मुरैना की रहने वाली निधि बंसल ने अपने सपने को हकीकत में बदल दिया। आईएएस बनने से पहले निधि बंसल एक इंजीनियर थीं। उन्होंने कंप्यूटर साइंस इन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री एनआईटी त्रिचि से हासिल की थी। निधि के पिता गिर्राज बंसल लोहे के व्यापारी हैं, और उनकी मां हाउसवाइफ है। निधि ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुरैना में की थी।

इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद निधि ने साल 2013 में बेंगलुरु स्थित एमएनसी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी करनी शुरू कर दी। हालांकि निधि अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थी। इसके बाद उन्होंने अपनी दोस्त के सुझाव पर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। निधि अपनी प्राइवेट नौकरी छोड़कर दिल्ली आ गईं और यहां आकर उन्होंने तैयारी करना शुरू कर दिया। पहले प्रयास में निधि सफल नहीं हो पाई थीं।

साल 2016 में निधि ने दूसरी बार परीक्षा दी और इस बार उन्होंने 219 रैंक हासिल की। इसके बाद वह त्रिपुरा कैडर में आईपीएस बन गईं। एक बार फिर से 2017 में निधि ने यूपीएससी की परीक्षा दी और उन्हें 226 रैंक प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्हें झारखंड कैडर में आईपीएस का पद मिला।

हालांकि चार बार प्रयास करने के बाद भी निधि को उनकी मन पसंद रैंक नहीं मिल पाई और ना ही वह मुकाम मिल पाया, जिसका उन्होंने सपना देखा था। साल 2019 में निधि ने पांचवी बार यूपीएससी की परीक्षा दी, और उन्हें इस बार 23वां रैंक हासिल हुआ और वह आईएएस बन गईं। इस तरह मुरैना की एक साधारण सी लड़की ने अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया।

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