भारत को देवी-देवताओं, ऋषियों और पवित्र नदियों की भूमि माना जाता है। यहां पर धर्म जीवन का आधार है, जो समाज को नैतिकता, संस्कृति, परंपराओं और एकता के सूत्र में बांधता है। यह धरती सदियों से आध्यात्मिक केंद्र रही है। संतों, दार्शनिकों और आत्म ज्ञान की खोज करने वालों की तपोभूमि है। भारत 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों और माता सती के 51 शक्तिपीठों की भूमि है, जो हिंदू धर्म में आध्यात्मिक आस्था के सबसे प्रमुख केंद्र हैं। इसी धरती पर कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक है जम्मू के कटरा में स्थित माता वैष्णों देवी का मंदिर, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर के महत्व, इतिहास, पौराणिक कथा के बारे में:
वैष्णो देवी का इतिहास और पौराणिक कथा
माता वैष्णो देवी का मंदिर देश के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है और यह जम्मू में कटरा से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है। माता को वैष्णवी और त्रिकुटा के नाम से भी जाना जाता है। माता वैष्णो को महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार माता वैष्णो का जन्म दक्षिण भारत में रत्नाकर परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम त्रिकुटा था। फिर उनका जन्म भगवान विष्णु के वंश में हुआ, जिसके चलते उनका नाम वैष्णवी पड़ा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता वैष्णो ने त्रेता युग में लोगों की कल्याण के लिए एक राजकुमारी के रूप में जन्म लिया था। बाद में वह त्रिकुटा पर्वत पर तपस्या करने चली गईं। वर्तमान समय में माता का मंदिर त्रिकुटा पर्वत पर प्राचीन गुफा में स्थित है, जहां वे अपने तीनों महारूपों में तीन पिंडियों के रूप में स्थापित हैं।
पौराणिक कथा
माता वैष्णो को लेकर एक कथा है कि, एक बार दैत्यराज ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की और प्रसन्न को कर ब्रह्मा जी ने उससे वरदान मांगने के लिए कहा। दैत्यराज ने वरदान मांगा कि तीनों लोक में गर्भ से उत्पन्न कोई भी जीव उसे मार न पाए। दैत्यराज ने देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों और मनुष्यों पर इस वरदान का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। देवतागण परेशान होकर ब्रह्माजी के पास गए तो उन्होंने शिव जी के पास भेज दिया। शिव ने देवतागण को विष्णु जी के पास जाने के लिए कहा। इसके बाद भगवान विष्णु ने दैत्यराज का वध करने के लिए माता लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती को अपनी शक्ति से एक स्त्री का निर्माण करने के लिए कहा। तीनों देवियों ने मिलकर एक नई शक्ति का निर्माण किया जिनका नाम वैष्णवी रखा गया और फिर उन्होंने दैत्यराज का वध किया।
कार्य पूरा करने के बाद माता वैष्णो भगवान विष्णु के पास गईं और उन्हें अपने भीतर हृदय में स्थान देने के लिए कहा। विष्णु जी ने उन्हें राजा रत्नाकर की पुत्री के रूप में जन्म लेकर धर्म की रक्षा करने का आदेश दिया और आश्वासन दिया की वह उनसे जरूर मिलेंगे। माता वैष्णवी ने राजा रत्नाकर के पुत्री के रूप में जन्म लिया और बचपन से ही वह भगवान राम के नाम की गुणगान करने लगी। बड़ी होने पर वह त्रिकुट पर्वत पर जाकर भगवान राम की प्रतीक्षा करने लगी। लोककथा के अनुसार, माता सीता की खोज में जब भगवान राम, माता वैष्णवी से मिले तो उन्होंने अपने साथ ले जाने से मना कर दिया। क्योंकि, उनका विवाह माता सीता के साथ हो चुका था और वह उनकी खोज में निकलने थे। भगवान राम ने माता वैष्णो को त्रिकुट पर्वत पर इंतजार करने के लिए कहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम ने माता वैष्णो से कहा कि, मैं कलियुग के अंत में कल्कि अवतार लेकर आपसे मिलूंगा और विवाह करूंगा। उस समय मेरी दो पत्नी होंगी, एक महालक्ष्मी और दूसरी आप। तब से ही माता वैष्णो भगवान कल्कि की प्रतीक्षा में त्रिकुट पर्वत पर तपस्या कर रही हैं।
पूजा, भोग, प्रसाद, और लंगर सुविधा
- लंगर: श्राइन बोर्ड द्वारा कटरा, भवन और भैरो घाटी में 24/7 घंटे लंगर चलता है, जिसमें शुद्ध शाकाहारी भोजन होता है।
- भोग: माता वैष्णो देवी को नारियल, मेवे, मिश्री और लाल चुनरी भेंट की जाती है। वहीं, बाणगंगा का पानी चरणों में समर्पित किया जाता है। प्रसाद भवन या फिर कटरा से ले सकते हैं।
- पूजा और हवन: पूजा और हवन के लिए श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट तय किए गए पैसे देकर बुक करना होता है।
कटरा से भवन की दूरी
माता वैष्णो देवी का मंदिर समुद्र तल से 5,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यात्रा कटरा से शुरू होती है और माता के भवन तक पहुंचने के लिए 13 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है।
कटरा से बाणगंगा की दूरी
कटरा से यात्रा शुरू होती है और बाणगंगा में लोग कुछ देर के लिए रुकते हैं। इस पवित्र पानी में स्नान कर आगे बढ़ते हैं। कटरा से इसकी दूरी 1.5 से 2 किलोमीटर है।
बाणगंगा से अर्धकुंवारी
बाणगंगा से अर्धकुंवारी की दूरी करीब 4.2 किलोमीटर है। मान्यताओं के अनुसार अर्धकुंवारी गुफा में माता वैष्णो देवी ने भैरोंनाथ से छिपकर 9 महीने तपस्या की थी। यहां कुछ देर विश्राम कर आगे की यात्रा की जाती है। यह कटरा और भवन के बीच में स्थित है।
सांझी झत
सांझी झत माता के भवन से लगभग 2.5 किलोमीटर की दूरी पर है। यहीं पर हेलीपैड बना हुआ है। हेलीकॉप्टर से यात्रा करने वाले यात्री यहीं पर उतरते हैं।
हेलिकॉप्टर सर्विस
इसके अलावा आप हेलिकॉप्टर के जरिए भी कटरा से मंदिर तक जा सकते हैं। हेलिकॉप्टर कटरा से सांझी छत के बीच नियमित रूप से चलते हैं। सांझी छत से 2.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
टिकट: हेलिकॉप्टर से आने और जाने का किराया लगभग 4,420 रुपये लेकर 4,640 रुपये प्रति व्यक्ति या इससे भी अधिक कम हो सकता है। यह टिकट maavaishnodevi.org. वेबसाइट से जाकर बुक कर सकते हैं। हालांकि, टिकट पहले बुक करना पड़ता है। दो साल तक के बच्चों का टिकट नहीं लगता।
बैटरी कार और रोपवे
माता वैष्णो देवी का दर्शन करने के लिए बैटरी कार सेवा भी उपलब्ध है। अर्धकुंवारी से भवन तक जाने का किराया प्रति व्यक्ति 450 रुपये है। इसके साथ ही रोपवे का भी सेवा ले सकते हैं जिसका किराया प्रति वक्ति 100 रुपये है। हालांकि, यह रोपवे सिर्फ भवन से भैरव मंदिर तक के लिए ही उपलब्ध है।
अन्य साधन: कटरा से माता वैष्णो देवी मंदिर जाने के लिए खच्चर, पिट्टू या पालकी की सवारी भी उपलब्ध है।
ठहरने की व्यवस्था
माता वैष्णों देवी धाम (कटरा, अर्धकुंवारी, भवन) में श्राइन बोर्ड के डॉरमेट्री कमरों का किराया करीब 150 रुपये है। वहीं, फैमिली रूम के लिए किराया 2500 रुपये है। maavaishnodevi.org वेबसाइट के जरिए कमरों को बुक कर सकते हैं।
खाने की व्यवस्था
चढ़ाई के दौरान पूरे रास्ते जगह-जगह आराम के लिए शेड्स हैं। साथ ही शाकाहारी भोजन, पानी और अन्य जरूरत की चीजें चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती हैं।
आरती
maavaishnodevi.org पर दी गई जानकारी के अनुसार अटका आरती के लिए टिकट पहले से बुक करना होता है। यह आरती सुबह और शाम 6 बजे होती है।
टिकट: प्रति व्यक्ति टिकट का दाम 2000 रुपये है। वहीं, ग्रुप अटका आरती की कीमत 5100 रुपये है। इसमें चार लोग शामिल हो सकते हैं।
रजिस्ट्रेशन जरूरी
वैष्णो देवी के धाम पहुंचने से पहले रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। यह आप ऑनलाइन या फिर टिकट काउंटर पर जाकर करवा सकते हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग: माता वैष्णो देवी का सबसे नजदीकी जम्मू का रानीबाग एयरपोर्ट है। इसके बाद सड़क मार्ग के जरिए बेस कैंप कटरा पहुंचा जा सकता है। हवाई अड्डे से कटरा तक की दूरी 50 किलोमीटर की है।
रेल मार्ग: वैष्णो देवी पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मू और कटरा हैं। इन दोनों रेवले स्टेशन पर देशभर के मुख्य शहरों से ट्रेनें चलती हैं। वाराणसी, नई दिल्ली, अमृतसर, कोटा, मुंबई और जबपुर जैसे प्रमुख कई अन्य शहरों से यहां के लिए डायरेक्ट ट्रेनें चलती हैं।
सड़क मार्ग: जम्मू सड़क मार्ग देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ा हुआ है और यह सड़क मार्ग कटरा तक पहुंचता है।
बस सेवा: दिल्ली के अलावा अन्य कई बड़े शहरों से कटरा के लिए बसें भी चलती हैं।
सबसे अच्छा समय और भीड़ वाले महीने
- अधिक भीड़ वाले महीने: माता वैष्णो देवी का दर्शन करने किसी भी मौसम में जा सकते हैं। लेकिन गर्मियों के मौसम में मई-जून और नवरात्रि (मार्च से अप्रैल और सितंबर से अक्तूबर) के बीच में श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ रहती है।
- जाने का उत्तम समय: जुलाई से सितंबर और जनवरी से फरवरी के महीनों में भीड़ थोड़ी कम रहती है। हालांकि, जुलाई से सितंबर के बीच बारिश का महीना होता है, इसलिए फिसल की रहती है। वहीं, जनवरी और फरवरी के महीने में ठंड पड़ती है।
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