देवभूमि उत्तराखंड को देवताओं की भूमि कहा जाता है। यहां कई बड़े और प्राचीन मंदिर हैं, जिनमें से एक है डाट काली मंदिर। यह मंदिर इस वक्त काफी चर्चा में है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 14 अप्रैल को उत्तराखंड के दौरे पर हैं। इस दौरान वह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे और डाट काली मंदिर में दर्शन करने जाएंगे। डाट काली मंदिर अपने आप में खास महत्व रखता है। यहां पर हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं, खासकर नवरात्र के दिनों में यहां पर अच्छी खासी भीड़ रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में, कहां पर स्थित है, कैसे पहुंचे और आसपास घूमने के लिए कौन-कौन सी जगहें हैं।
कहां स्थित है डाट काली मंदिर
डाट काली मंदिर देहरादून-सहारनपुर राजमार्ग पर देहरादून शहर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर आशु क्रोड़ी (अश्क्रोडी) में स्थित है। डाट काली मंदिर को अत्यंत शक्तिशाली सिद्धपीठ माना जाता है और यह देवी काली को समर्पित है। कुछ मान्यताओं के अनुसार इसे माता सती के शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां देवी की दिव्य शक्ति विराजमान है। मुख्य गर्भगृह में देवी काली की काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है। यह मंदिर वाहन की देवी के रूप में प्रसिद्ध है। लोग नया वाहन खरीदने पर यहां पूजा करवाने के लिए आते हैं। साथ ही नया काम शुरू करने से पहले भी यहां लोग पूजा-पाठ कराने के लिए आते हैं।
मंदिर से जुड़ी सुरंग की कहानी
मां डाट काली मंदिर का इतिहास लगभग 1804 ईस्वी से जुड़ा हुआ माना जाता है। उस दौरान देहरादून और सहारनपुर को जोड़ने वाले मार्ग का निर्माण हो रहा था। मान्यता है कि, निर्माण कार्य बार-बार विफल हो रहा था और दिन में बनाई गई सुरंग रात में ढह जाती थी। तब एक इंजीनियर को मां काली ने सपने में दर्शन देकर उसी स्थान पर मंदिर बनाने का निर्देश दिया। इसके बाद वहां माता की मूर्ति स्थापित की गई, तब जाकर सुरंग का निर्माण सफल हुआ। एक अन्य मान्यता के अनुसार, यह मंदिर गोरखा काल में सैनिकों की रक्षा के लिए भी बनाया गया था और बाद में यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।
डाट काली मंदिर जाने का सबसे उत्तम समय
डाट काली मंदिर जाने का सबसे उत्तम समय अक्टूबर से फरवरी के बीच का होता है। इस दौरान देहरादून का मौसम सुहावना और आरामदायक रहता है, तापमान 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। जिसके चलते न तो ज्यादा गर्मी और न ही अधिक ठंड लगती है। हालांकि, सर्दियों के मौसम में भी जा सकते हैं, खासकर नवरात्र के दिनों में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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कैसे पहुंचे डाट काली मंदिर
मां डाट काली मंदिर के आसपास का वातावरण काफी शांत, हरे-भरे पेड़-पौधे और सुंदर पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहां आप हवाई मार्ग, ट्रेन या सड़ मार्ग के जरिए पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग: मां डाट काली मंदिर का सबसे नजदीकी जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जो मंदिर से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भारत के कई प्रमुख शहरों से इस हवाई अड्डे के लिए नियमित उड़ाने संचालित होती हैं। हवाई अड्डे से आप टेक्सी या फिर बस के जरिए पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग: डाट काली मंदिर के दर्शन करने के लिए आप रेल मार्ग के जरिए भी पहुंच सकते हैं। यहां का सबसे नजदीकी देहरादून रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से मंदिर तक जाने के लिए किराए पर टैक्सी या फिर बस के जरिए भी पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग: यह मंदिर देहरादून-सहारनपुर राजमार्ग (NH-72) पर स्थित है। दिल्ली से देहरादून एक्सप्रेस शुरू होने के बाद यहां पहुंचने में सिर्फ 2.30 से 3 घंटे का समय लगेगा। देहरादून शहर के केंद्र (घंटाघर) से लगभग 14-15 किलोमीटर और बस अड्डे (ISBT) से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर मुख्य सड़क के किनारे पर ही स्थित है। दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे आस-पास के शहरों से पर्यटक बस या टैक्सी लेकर मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
खुलने व बंद होने का समय
इंटरनेट पर मिली जानकारी के अनुसार यह मां डाट काली मंदिर आमतौर पर प्रतिदिन सुबह 5:00 खुल जाता है और रात 9:00 बजे तक भक्त माता के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर मंगलवार, शनिवार और रविवार के दिन भीड़ थोड़ी अधिक रहती है।
आसपास घूमने के लिए जगह
1- रॉबर्स केव
रॉबर्स केव जिसे लोग गुच्चूपानी भी कहते हैं, यह डाट काली मंदिर से करीब 14-15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक लोकप्रिय प्राकृतिक गुफा है जहां पर हर साल भारी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
2- मिन्ड्रोलिंग मॉनेस्ट्री
डाट काली मंदिर के आसपास घूमने की जगहों में से एक मिन्ड्रोलिंग मॉनेस्ट्री भी है, जो करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
3- तपकेश्वर मंदिर
शांत वातावरण और हरे-भरे पहाड़ों के बीच स्थित तपकेश्वर मंदिर भी डाट काली मंदिर से ज्यादा दूरी पर स्थित नहीं है। तपकेश्वर मंदिर करीब 16.8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
4- फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यू, देहरादून भारत का प्रमुख वानिकी अनुसांधान संस्थान है। 450 हेक्टेयर में फैला यह अपनी ग्रीको-रोमन वास्तुकला, संग्रहालयों और फॉरेस्ट्री में मास्टर्स/PHD कोर्स के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान पर डाट काली मंदिर से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
5- धनौल्टी
अगर आपको प्राकृतिक नजारों और हरियाली के बीच थोड़ा सुकून बिताने का मन है, तो डाट काली मंदिर में दर्शन करने के बाद धनौल्टी घूमने जा सकते हैं, जो अपने हरे भरे पहाड़ी और शांत वातावरण के लिए मशहूर है। डाट काली मंदिर से यह जगह करीब 60-70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने में 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। इसके अलावा आप यहां से 2-3 घंटे की दूरी पर स्थिति कानताल और चकराता भी घूमने जा सकते हैं।
माता वैष्णो देवी का मंदिर देश के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है और यह जम्मू में कटरा से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है। माता को वैष्णवी और त्रिकुटा के नाम से भी जाना जाता है। माता वैष्णो को महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार माता वैष्णो का जन्म दक्षिण भारत में रत्नाकर परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम त्रिकुटा था। फिर उनका जन्म भगवान विष्णु के वंश में हुआ, जिसके चलते उनका नाम वैष्णवी पड़ा। मंदिर से जुड़ी रोचक जानकारी, आसपास घूमने की जगहें, यात्रा का सही समय, आरती, भोग प्रसाद व अन्य जानकारी यहां पढ़ें
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