Monsoon Gardening Tips: ज्यादातर लोगों को घर पर फल और सब्जियां उगाना पसंद होता है। जगह की कमी होने पर कई लोग छत पर ही टेरेस गार्डन तैयार कर लेते हैं। मौसम के अनुसार अलग-अलग तरह के पौधे लगाए जाते हैं। बरसात के मौसम में लौकी, तोरई और कद्दू जैसी बेल वाली सब्जियां तेजी से बढ़ती हैं। यही वजह है कि इन्हें कई लोग टेरेस गार्डन में लगाना पसंद करते हैं। हालांकि लगातार बारिश और नमी की वजह से बेलों पर कीटों और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इससे पौधे की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सही देखभाल और कुछ आसान तरीकों की मदद से बेल को कीटों से बचाया जा सकता है।
राख का इस्तेमाल
कद्दू की बेल को कीटों और फंगल संक्रमण से बचाने के लिए उसके ऊपर राख का छिड़काव किया जा सकता है। राख में मौजूदा पोषक तत्व पौधे की पैदावार को बढाने में मदद करते हैं। राख में पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। पत्तों पर राख को छिड़कने से कीटों से बचाव में मदद मिल सकती है।
नीम का तेल
कद्दू की बेल में लगे कीटों से परेशान हैं, तो इसके लिए बाजार से दवाई लाने की बजाय घरेलू तरीके अपना सकते हैं। नीम का तेल कीटों को दूर करने में मदद कर सकता है। इसके लिए एक लीटर पानी में नीम का तेल और लिक्विड सोप मिक्स करें। इस घोल को स्प्रे बोतल में भरकर पत्तों और कीटों वाली जगह पर छिड़कें। इसका इस्तेमाल आप हफ्ते में एक से दो बार कर सकते हैं।

मानसून में देखभाल के तरीके
कद्दू की बेल ग्रो बैग या गमले में लगी है, तो उसके अंदर पर्याप्त नमी बनाकर रखें। ध्यान रखें कि मानसून में गमले में पानी भरा न रहे, इससे जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। नियमित रूप से गमले का ड्रैनेज सिस्टम चेक करें।
कद्दू की बेल की देखभाल और बेहतर ग्रोथ के लिए जैविक खाद बेहतरीन उपाय साबित होगा। इसके लिए आप गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट और सरसों की खली का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पौधे को जरूरी पोषण मिलता है और उस पर ढेर सारे फल लाने में मदद मिल सकती है।
कद्दू की बेल के आसपास या गमले में सूखे और खराब पत्तों को हटा दें। इससे फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बारिश के दौरान पौधे के आसपास की जगह को साफ रखें और पीले पत्तों को तुरंत हटा दें। साथ ही कीटों से बचाव के लिए नीम का तेल या राख का छिड़काव करें।
कद्दू के पौधे की मिट्टी में हवा और ऑक्सीजन का पर्याप्त प्रवाह बनाए रखने और पौधे की ग्रोथ को बेहतर करने के लिए समय-समय पर गुड़ाई करें। इसके साथ ही नियमित रुप से जैविक खाद की मदद से पौधे को स्वस्थ रखा जा सकता है।
