अगर आप मीठा खाने के शौकीन हैं, तो गुलाब जामुन का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाना तय है। गर्मागर्म, मुलायम और चाशनी से लबालब भरे गुलाब जामुन भारत की सबसे पसंदीदा मिठाइयों में गिने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी जगह भी है, जिसे ‘गुलाब जामुन गांव’ के नाम से जाना जाता है? यह अनोखी जगह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित मैगलगंज है।

आखिर क्यों कहा जाता है ‘गुलाब जामुन गांव’?

दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बसे मैगलगंज की पहचान यहां मिलने वाले स्वादिष्ट गुलाब जामुन हैं। इस छोटे से कस्बे में सड़क किनारे और बाजार में 100 से अधिक मिठाई की दुकानें और ठेले हैं, जहां दिनभर ताजे गुलाब जामुन बनाए और बेचे जाते हैं। यहां से गुजरने वाले यात्री अक्सर अपनी यात्रा के दौरान रुककर इनका स्वाद जरूर लेते हैं।

कैसे हुई इस परंपरा की शुरुआत?

स्थानीय मान्यताओं और रिपोर्ट्स के अनुसार, मैगलगंज में गुलाब जामुन की प्रसिद्धि की शुरुआत साल 1941 में हुई थी, जब यहां धनपाल मिष्ठान भंडार नाम की पहली मिठाई की दुकान खुली। उस समय यह इलाका ज्यादा विकसित नहीं था और सड़कें भी अच्छी नहीं थीं। धीरे-धीरे सड़क किनारे ठेलों पर गुलाब जामुन बिकने लगे और दिल्ली-लखनऊ मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के बीच यह मिठाई बेहद लोकप्रिय हो गई।

यात्रियों की पसंदीदा मिठाई

आज भी दिल्ली और लखनऊ के बीच सफर करने वाले कई लोग मैगलगंज में सिर्फ गुलाब जामुन खाने या पैक करवाने के लिए रुकते हैं। ताजे खोए से बने, हल्के गर्म और चाशनी में डूबे गुलाब जामुन इस जगह की सबसे बड़ी पहचान बन चुके हैं।

उत्तर प्रदेश है मिठाइयों का खजाना

वैसे भी उत्तर प्रदेश अपनी पारंपरिक मिठाइयों के लिए पूरे देश में मशहूर है। यहां का मथुरा का पेड़ा, बनारसी मलइयो, लखनऊ का शाही टुकड़ा, आगरा का पेठा और मेरठ की रेवड़ी जैसी मिठाइयां देश-विदेश तक अपनी खास पहचान बना चुकी हैं। इन्हीं मिठाइयों की लंबी सूची में मैगलगंज के गुलाब जामुन भी खास जगह रखते हैं।

अगर आप मीठा पसंद करते हैं…

अगर कभी आपका सफर दिल्ली-लखनऊ हाईवे से होकर गुजरे, तो मैगलगंज में कुछ देर रुककर यहां के मशहूर गुलाब जामुन का स्वाद जरूर लें। हो सकता है कि एक बार चखने के बाद यह स्वाद आपकी पसंदीदा मिठाइयों की लिस्ट में सबसे ऊपर पहुंच जाए।

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