These two yoga exercises are beneficial in thyroid problem - थायरॉइड की समस्या से हैं परेशान तो आज से शुरू करें ये 2 योगाभ्यास, जल्द दिखेगा असर - Jansatta
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थायरॉइड की समस्या से हैं परेशान तो आज से शुरू करें ये 2 योगाभ्यास, जल्द दिखेगा असर

जब थायरॉइड ग्रंथि ज्यादा मात्रा में थायरॉइड हार्मोन बनाने लगती है तो इसे हाइपरथायराडिज्म कहते हैं जबकि हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉइड हार्मोन के स्तर में कमी होती है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

थायरॉइड ग्रंथि का काम शरीर में मेटाबॉलिज्म, हार्मोनल बदलावों और एनर्जी को कंट्रोल करना होता है। गले में तितली के आकार की थायरॉइड ग्रंथि थाइराक्सिन नाम का हार्मोन बनाती है। थायरॉइड की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसलिए इसकी वजह से शरीर में कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। जब थायरॉइड ग्रंथि ज्यादा मात्रा में थायरॉइड हार्मोन बनाने लगती है तो इसे हाइपरथायराडिज्म कहते हैं जबकि हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉइड हार्मोन के स्तर में कमी होती है। आइए आज हम आपको ऐसे दो योगासनों के बारे में बता रहे हैं जिनके अभ्यास से थायरॉइड की समस्या में फायदा होता है।

थायरॉइड की समस्या में कई तरह की परेशानियों को सामना करना पड़ता है जैसे वजन बढ़ना या घटना, कमजोरी, आलस और डिप्रेशन। इसके अलावा महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। थायरॉइड की समस्या में समय पर दवाई का सेवन और डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। इसके अलावा इन दो योगासन का नियमित रूप से अभ्यास करने से थायरॉइड की समस्या में लाभ होगा।

हलासन- इसे करने के लिए आप जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैर एक दूसरे से मिले होने चाहिए और हथेलियां जमीन पर और कमर के पास हों। इसके बाद धीरे-धीरे दोनों पैरों को उपर की ओर उठाएं। ध्यान रहें ऐसा करते समय पेट को सिकोड़ें और सांस को अंदर लेते रहें। इसके बाद दोनों पैरों को उठाते हुए सिर के पीछे लगाने कि कोशिश करें। ध्यान रखें अगर पैर सिर के पीछे नहीं पहुंच रहे हैं तो ज्यादा जोर न लगाएं ऐसा करने से आपकी गर्दन में परेशानी हो सकती है। पीठ और कमर को पैरों के साथ पीछे की तरफ मोड़ने के लिए हाथों का सहारा लें। आसन को थोड़ी देर होल्ड करने की कोशिश करें और घुटनें मुड़ें नहीं इस बात का ध्यान रखें।

मत्स्यासन- इस आसन करने के लिए कमर के बल लेट जाएं और अपने हाथों और पैरों को शरीर के साथ जोड़ लें। हाथों को कूल्हों के नीचे रखें, हथेलियां ज़मीन पर रखें। इसके बाद कोहनियों को साथ जोड़ लें। सांस अंदर लेते हुए, छाती और सर को उठाएं। इसके बाद अपनी छाती को उठाएं, सर को पीछे कि ओर लें और सर की चोटी को ज़मीन पर लगाएं। सिर को ज़मीन पर आराम से छूते हुए, अपनी कोहनियों को ज़ोर से ज़मीन पर दबाएं, सारा भार कोहनियों पर डालें, सिर पर नहीं। इसके बाद अपनी छाती को ऊंचा उठाएं। जंघा और पैरों को ज़मीन पर दबाएं। जितना संभव हो, आसन में रहें, लंबी गहरी सांस लें। छाती को नीचे करते हुए वापस आएं। दोनों हाथों को वापस शरीर के दाएं-बाएं लगा लें और फिर विश्राम करें।

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