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योग के ये 2 आसन आपके कंधों की बढ़ा सकते हैं मजबूती, सर्वाइकल से भी मिल सकता है छुटकारा

गोमुखासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और सीधा रखने में लाभकारी होता है। कंधे का दर्द हो या गर्दन का इस आसन से दोनों में आराम में मिलता है। इसके अलावा सर्वाइकल की स्थिति में भी यह आसन लाभकारी होता है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (फाइल फोटो)

मजबूत और चौड़े कंधे पाने के लिए लोग घंटों जिम में पसीना बहाते हैं, लेकिन कंधों को मजबूत बनाने के लिए व्‍यायाम के अलावा आप योग भी कर सकते हैं। योग के आसन आप अपने घर पर आसानी से आजमा सकते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो कंधों के दर्द की समस्या से परेशान हैं। कई लोग इनके इलाज के लिए थेरिपी, सर्जरी और दवाइयां आदि समेत कई तरह के उपाय अपनाते हैं। लेकिन आज हम आपको ऐसे योग आसन के बारे में बता रहे हैं जिनके अभ्यास से आप कंधों की मजबूती हासिल कर सकते हैं।

गोमुखासन : गोमुखासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और सीधा रखने में लाभकारी होता है। कंधे का दर्द हो या गर्दन का इस आसन से दोनों में आराम में मिलता है। इसके अलावा सर्वाइकल की स्थिति में भी यह आसन लाभकारी होता है।

ऐसे करें: इस आसन को करने के लिए दोनों पैर आगे की ओर फैलाकर बैठ जाएं। अब बाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए दाएं कुल्हे की तरफ जमीन पर रखें। इसी तरह दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए बाएं पैर के ऊपर से लाएं और दाईं एडी को बाएं कुल्हे के पास रखें। अब बाएं हाथ को उठाएं और इसको कोहनी से मोड़ते हुए अपने कमर पर ले जाएं। इसी के साथ दाएं हाथ को कोहनी से नीचे की ओर मोड़ते हुए कमर के पीछे ले जाएं। दोनों हाथों को पीछे से पकड़ें। इस दौरान कमर बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। अब आप पूरी तरह गोमुखासन की स्थिति में हैं। इस आसन को पैर और हाथ बदलते हुए दूसरी ओर से दोहराएं। इस आसन का अभ्यास 5 से 10 बार कर सकते हैं।

ताड़ासन: इस आसन को अंग्रेजी में माउंट पोज भी कहा जाता है। यह आसन दिल की नालियों को मजबूत करता है और साथ ही उसके अन्य हिस्सों को भी मजबूती देता है। गहरी सांस लेने से फेफड़ें भी खुलते हैं।

ऐसे करें: इस आसन को करने के लिए घुटनों में दर्द कम करने के लिए यह एक कारगर योगासन है और इसे करना भी काफी आसान हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। फिर दोनों हाथों को सांस भरते हुए ऊपर उठाएं। हाथ ऊपर उठाने के साथ-साथ एड़ियां भी उठाएं और शरीर का वजन पंजों पर डालें। शरीर ऊपर की ओर पूरी तराह से तना होना चाहिए। कुछ देर इसी मुद्रा में रुकने की कोशिश करें।

 

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