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बच्चों के साथ करें आनंद बालासन समेत ये 5 योग, होगा फायदा

अर्ध चंद्रासन से घुटने, ब्लडर, किडनी, छोटी आँत, लीवर, छाती, लंग्स और गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है।

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योग सिर्फ बड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों के लिए भी एक तरह की कला है। ये बच्चे के जीवन में उत्साह तो पैदा करेगा ही, साथ ही उसे फिट भी रखेगा। बच्चों को फिट रखने के लिए खान-पान के अलावा उनसे एक्सट्रा एक्टिविटी कराना भी काफी फायदेमंद होता है। इससे बच्चे पूरी तरह से विकसित होगें। योग एक ऐसा तरीका है, जिसका हर एक छोटा आसन भी बच्चे के शरीर पर प्रभाव डालता है। किसी भी समय कर लेने वाला योग हफ्ते में अगर चार दिन भी आपका बच्चा करे, तो उसके शरीर को स्वस्थ रखने के लिए काफी है। आज हम आपको ऐसे योगासन बताएंगे, जिसे करके वह हमेशा के लिए स्वस्थ बने रहेंगे। आइए जानते हैं बच्चों के लिए कुछ खास योगा आसनों के बारे में-

अर्ध चंद्रासन: इस आसन को करते वक्त शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र के समान हो जाती है, इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन कहते है। यह दाएं हाथ से बाईं ओर झुककर और बाएं हाथ से दाईं ओर झुककर किया जाता है। इस आसान को रोजाना 4 से 5 बार करने से लाभ होगा। इस आसन से घुटने, ब्लडर, किडनी, छोटी आँत, लीवर, छाती, लंग्स और गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है।

आनंद बालासन: इस को हैप्पी बेबी पोज भी कहा जाता है। यह आसन मन और शरीर को राहत देते हुए तनाव और थकान को दूर करने में मदद करता है। यह पेड़ू-जांघ के जोड़ के साथ रीढ़ की हड्डी में भी लचक पैदा करता है। आनंद बालासन करने के लिए कमर के बल लेटकर सांस को अन्दर लेते हुए पैरों को ऊपर सीधा उठाएं। फिर अपने दोनों हाथों से पैरों की उंगलियों को पकड़ें। अपनी ठुड्डी को छाती की तरफ कर लें, लेकिन ध्यान रहे कि सिर और कमर पूरी तरह जमीन पर रखी हो। आराम से सांस लेते रहे और इसी अवस्था में 30 सेकिंड तक रहें।

बद्धाकोनासन: इस आसन को बटरफ्लाई पोज भी कहा जाता है। यह आसन शरीर और मन को शांत कर तनाव और थकान को दूर करता है। बच्चे के कूल्हों और टखनों पर खिंचाव लाने के लिए यह काफी अच्छा है। इसके अलावा लंबे समय तक खड़े रहने या चलने से आई थकान को दूर करने में सहायता मिलती है।

हस्तपदासन: यह पीठ के मासपेशियों में रीड की हड्डीमें खिंचाव लाता है, रक्त का प्रवाह बढ़ा कर तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है और रीड की हड्डी में कोमलता प्रदान करता है |

वृक्षासन: वृक्षासन दो शब्द मिलकर बना है ‘वृक्ष’ का अर्थ पेड़ होता है और आसन योग मुद्रा की और दर्शाता है। इस आसन की अंतिम मुद्रा एकदम अटल होती है, जो पेड़ की तरह लगती है, इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। यह आसन पैर को मजबूत बनाने के लिए बहुत फायदेमंद है।

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