ताज़ा खबर
 

10 गुना ज्यादा खराब होती है घर की हवा, यूं होगी साफ

भीतरी वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का अनुभव इसके संपर्क में आने के कुछ साल बाद ही किया जा सकता है। भीतरी प्रदूषण के कुछ दुष्प्रभावों में आंख नाक व गले में जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और थकान शामिल है। इसके अलावा यह लंबी अवधि में हृदय रोग और कैंसर का कारण बन सकता है।

देश में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है घर के अंदर का वायु प्रदूषण। प्रतीकात्मक चित्र

अक्सर हम बाहर के प्रदूषण को लेकर बातें करते रहते हैं और इससे बचने के उपाय भी खोजते रहते हैं, लेकिन घर के अंदर की प्रदूषित हवा भी उतना ही नुकसान पहुंचा सकता है जितना कि बाहरी हवा। आंकड़ों के मुताबिक, भीतरी (इनडोर) वायु प्रदूषण देश में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है और भारत जैसे देश में तो खासतौर पर, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में घर के अंदर चूल्हे और कोयले से खाना पकाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हानिकारक रसायनों और अन्य सामग्रियों के कारण घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है और यह बाहरी वायु प्रदूषण की तुलना में दस गुना अधिक नुकसान पहुंचा सकती है।

खराब वेंटिलेशन और संरचनात्मक डिजाइन अस्थिर कार्बनिक यौगिकों, बायोएरोसोल और कणों को सोख सकते हैं, जिससे फेफड़े में खराबी सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। भारत में भीतरी वायु गुणवत्ता को लेकर कोई पुख्ता नीति नहीं है, जिसके कारण इसके वास्तविक प्रभाव को मापना मुश्किल है। इस बारे में हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआइ) के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल ने बताया कि लोग अपने जीवन का 90 फीसद से ज्यादा हिस्सा घर के अंदर बिताते हैं। 50 फीसद से अधिक कामकाजी वयस्क कार्यालयों या समान गैर-औद्योगिक वातावरण में काम करते हैं। यह बड़े पैमाने पर प्रदूषण के कारण इमारत से संबंधित बीमारियों का कारण बनता है। कुछ अन्य कारकों में विषैले रसायनों जैसे सफाई उत्पादों, अस्थिर कार्बनिक यौगिकों, धूल, संक्रामक तत्व, सुगंध, तंबाकू धुआं, अत्यधिक तापमान और आर्द्रता शामिल है। इफलहाल देश में भीतरी वायु गुणवत्ता के लिए कोई औपचारिक मानक नहीं है। भीतरी वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का अनुभव इसके संपर्क में आने के कुछ साल बाद ही किया जा सकता है। भीतरी प्रदूषण के कुछ दुष्प्रभावों में आंख नाक व गले में जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और थकान शामिल है। इसके अलावा यह लंबी अवधि में हृदय रोग और कैंसर का कारण बन सकता है।

डेक्सनॉक के अध्यक्ष और आर्किटेक्ट जेके ने कहा कि भीतरी वायु प्रदूषण का आदर्श समाधान तो यही है कि घर की सभी खिड़कियों को खोला जाए और भीतरी प्रदूषकों से बचने की सलाह दी जाए। हालांकि, प्रदूषित शहरों में यह मुश्किल है क्योंकि बाहरी प्रदूषक घर में भी प्रवेश कर सकते हैं। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने 25वें एमटीएनएल परफेक्ट स्वास्थ्य मेले के अंतर्गत इनडोर पॉल्यूशन (भीतरी प्रदूषण) के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य मेले में ‘इनडोर एअर पॉल्यूशन इज स्लो पॉयजन’ नाम से मुहिम होगी। यह मेला 24 से 28 अक्टूबर तक तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।

यूं साफ होगी घर की हवा
-घर की सजावट में हवा साफ करने वाले पौधों को शामिल करें। अरेका पाम, मदर-इन-लॉज टंग और मनी प्लांट जैसे पौधे ताजी हवा का अच्छा स्रोत हो सकते हैं।
-घर के अंदर धूम्रपान से बचें और ध्यान रखें कि गर्मी व सर्दी के मौसम में जहरीली गैसों और पदार्थों को घर के अंदर न छोड़ा जाए।
-रेफ्रिजरेटर और ओवन जैसे उपकरण नियमित रखरखाव के बिना हानिकारक गैसें उत्सर्जित कर सकते हैं। इसलिए नियमित अंतराल पर इनकी मरम्मत करवाते रहें।
-नियमित सफाई के अभाव में घर में धूल और गंदगी फैल सकती है। भले ही आप नियमित रूप से घर के फर्श और अन्य सामान को साफ करते हैं, लेकिन घर के कई कोनों और फर्नीचर व बिस्तर आदि के नीचे रोजाना सफाई नहीं हो पाती है, इसलिए समय-समय पर इनकी सफाई पर भी ध्यान दें।
-घर में कीटनाशकों का इस्तेमाल कम से कम करें। इसके बजाय जैव-अनुकूल उत्पादों का उपयोग करें। भीतरी वायु में घुले जहरीले रसायनों की संख्या सीमित करके भी घर के अंदर के प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App