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Kargil Vijay Diwas 2020 Date: पड़ोसी के नापाक मंसूबों को 21 साल पहले भारतीय शूरवीरों ने ऐसे कर दिया था ध्वस्त

Kargil Vijay Diwas 2020 Date, Theme: भारतीय वीर जवानों ने अपने अटूट हौसलों और अदम्य साहस के साथ मुकाबला करते हुए न केवल पाकिस्तानी फौजों के मंसूबों को नाकाम किया, बल्कि उन चोटियों और रास्तों को फिर से अपने नियंत्रण में करने में सफलता पाई, जिन पर पाकिस्तानी फौज ने कब्जा जमा लिया था।

Image Caption: Kargil Vijay Diwas 2020: 26 जुलाई 1999 को कारगिल में आपरेशन विजय के बाद चोटी पर तिरंगा लहराते भारतीय वीर जवान (ऊपर) और कारगिल युद्ध में दुश्मनों का मुकाबला करते सैनिक (नीचे)।

Kargil Vijay Diwas 2020 Date: 21 साल पहले मई 1999 में पड़ोसी देश पाकिस्तान अपने नापाक इरादों और अपनी फौज के संरक्षण में पले आतंकियों की मदद से भारत के कारगिल क्षेत्र के ग्लेशियर पर कब्जे की योजना बनाई थी। इसी योजना के तहत उसने अपने सैनिकों की एक टुकड़ी को बहुत ही खामोशी से सीमा पार भेज दिया। भारतीय पक्ष को इसकी जानकारी सबसे पहले स्थानीय एक चरवाहे ने दी थी। पहले माना जा रहा था कि वे घुसपैठिए हैं, लेकिन बाद में पता चला कि पाकिस्तान भारत पर हमले की नीयत से इनको भेज रहा है। इसके बाद एलर्ट हुई भारतीय सेना ने अपने अद्भुत शौर्य और वीरता का प्रदर्शन करते हुए ऑपरेशन विजय के साथ करीब दो महीने की कठिन और संघर्षपूर्ण लड़ाई में पाकिस्तानी सैनिकों को वापस खदेड़ दिया। 60  दिन तक चले इस युद्ध के बाद 26 जुलाई 1999 को भारत अपनी भूमि पाकिस्तान से खाली कराने में सफल हुआ। इसे ही कारगिल विजय दिवस कहते हैं। और इसकी याद में हर साल पूरा देश गौरव के साथ कारगिल विजय दिवस मनाता है।

कारगिल युद्ध का इतिहास और वजह: 1999 के मई महीने के शुरू में तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य के कारगिल जिले में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी फौज और उनके आतंकी नियंत्रण रेखा (Line Of Control) को पार कर भारतीय सीमा में घुस आए और सामरिक महत्व के कई अहम स्थानों टाइगर हिल्स और द्रास सेक्टर की चोटियाें पर कब्जा जमा लिया। उनका इरादा लेह और लद्दाख को भारत से जोड़ने वाली सड़क को कब्जे में लेने का था। इससे वे सियाचीन ग्लेशियर पर हमारी पकड़ को कमजोर करना चाहते थे। हालांकि इसकी भनक भारतीय पक्ष को देर से लग सकी। इसके बावजूद भारतीय वीर जवानों ने अपने अटूट हौसलों और अदम्य साहस के साथ मुकाबला करते हुए न केवल पाकिस्तानी फौजों के मंसूबों को नाकाम किया, बल्कि उन चोटियों और रास्तों को फिर से अपने नियंत्रण में करने में सफलता पाई, जिन पर पाकिस्तानी फौज ने कब्जा जमा लिया था।

इसलिए मनाते हैं इस दिवस को: भारतीय सैनिकों ने बिना नियंत्रण रेखा (Line Of Control) पार किए अपनी हद में रहकर दुश्मन के फौज को मार भगाया था। इसकी पूरी दुनिया में प्रशंसा हुई थी। करीब दो महीने चले इस युद्ध में हमारी सेना के 527 योद्धा शहीद हुए थे और करीब 1300 लोग घायल हुए थे। इन महान बलिदानी सैनिकों की मेहनत से मिली इस जीत की याद में हर वर्ष पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाता है। पिछले वर्ष ऑपरेशन विजय दिवस की 20वीं वर्षगांठ पर सरकार ने इसकी थीम रिमेंबर, रिज्वाइस और रिन्यू रखी थी। इस वर्ष की थीम की अभी घोषणा नहीं हुई है।

फरवरी में लाहौर में घोषणापत्र पर हस्ताक्षर और फिर धोखेबाजी: पाकिस्तान ने तीन महीने पहले फरवरी 1999 में लाहौर में एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किया था। समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ ने हस्ताक्षर किये थे। इस समझौते का नाम लाहौर घोषणापत्र रखा गया था। इसमें यह तय हुआ था कि दोनों देश कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता के द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करेंगे। लेकिन पाकिस्तान ने समझौते को तोड़ते हुए धोखे से भारत में मई में हमला बोल दिया। हालांकि इस हमले में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबे पर पानी फेर दिया।

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