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सुबह देर तक सोने वाले टीनएजर्स हो सकते हैं डायबिटीज के शिकार, जानिये क्या कहती है रिसर्च

टीनएजर्स की डाइट में फल-सब्जियां कम और ऐसे खाने की मात्रा ज्यादा होती है जिनसे ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ता है।

diabetes in teenagers
टीनएर्ज में डाटबिटीज होने का सबसे बड़ा कारण है कि जब वो थके होते हैं तो वो एनर्जी पाने के लिए मीठा खाते हैं। photo-freepik

रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी जगना सिर्फ बड़ों के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि सोने और जागने की यह आदत बच्चों को भी फायदा पहुंचाती है। अमेरिका की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी (Brigham Young University) के शोधकर्ताओं के मुताबिक जो टीनएजर्स सुबह देर तक सोते हैं उनमें आलस, मोटापा और डायबिटीज होने का खतरा अधिक रहता है।

टीनएजर्स में डायबिटीज का कारण: टीनएर्ज में डायबिटीज होने का सबसे बड़ा कारण है कि जब वो थके होते हैं तो एनर्जी पाने के लिए मीठा खाते हैं। शोधकर्ताओं ने अध्ययन को प्रमाणित करने के लिए टीनएजर्स के एक हफ्ते के डाइट पैटर्न पर निगाह रखी।

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में शामिल टीनएजर्स के सोने और खाने के पैटर्न को ध्यान में रखते हुए ऑब्जर्व किया कि जो टीनएर्जस एक हफ्ते रात में साढ़े छह घंटे सोते हैं और दूसरे हफ्ते साढ़े नौ घंटे की नींद लेते हैं वो बराबर मात्रा में कैलोरी का सेवन करते हैं। इन टीनएजर्स की डाइट में फल-सब्जियां कम और खाने की मात्रा ज्यादा होती थी, जिनसे ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ता है।

टीनएजर्स के लिए नींद जरूरी: प्रमुख शोधकर्ता डॉ. ड्यूरासियो के मुताबिक टीनएजर्स में बढ़ता मोटापा एक बीमारी बनती जा रही है, इसलिए खाने के साथ-साथ सोने के पैटर्न का भी ध्यान रखना जरूरी है। पैरेंट्स अगर टीनएजर्स के बढ़ते वजन को रोकना चाहते हैं, तो उन्हें पर्याप्त नींद लेने के लिए प्रेरित करें, साथ ही उनके नाश्ते में प्रोटीन युक्त फूड को शामिल करें।


शोधकर्ता क्या मानते हैं?: अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि थके हुए टीनएजर्स ने एक दिन में औसतन 12 ग्राम अधिक चीनी खाई। इस तरह उनकी बॉडी में एक साल में 2.5 से 3 किलो अतिरिक्त चीनी पहुंच जाती है जो शुगर और बढ़ते मोटापा के लिए जिम्मेदार है।

अध्ययन की प्रमुख लेखिका डॉ. कारा ड्यूरासियो कहती हैं, हम क्या खा रहे हैं, इस पर ध्यान देना जरूरी है ना कि इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि हम कितनी मात्रा में खा रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक हम डाइट में कार्बोहाइड्रेट या अतिरिक्त शर्करा वाले फूड खाते हैं तो उससे बॉडी में शुगर का स्तर बढ़ सकता है। बॉडी में शुगर का अधिक स्तर डायबिटीज और मोटापा का कारण बनता है। ऐसे फूड्स से बॉडी में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है जिसकी वजह से टीनएजर्स मोटापे का शिकार होते जाते हैं।

बच्चों में मधुमेह के लक्षण

  1. अधिक प्‍यास लगना
  2. बार-बार पेशाब लगना
  3. भूख ज्यादा लगना और वजन कम होना
  4. हमेशा थकान और कमज़ोरी होना
  5. यीस्ट संक्रमण होना
  6. मूड में बदलाव होना
  7. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, यूनिसेफ और जनसंख्या परिषद द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 19 वर्ष की आयु तक के 10 प्रतिशत बच्चों में प्री-डायबीटिक कंडीशन मौजूद है, जिनके आगे चलकर डायबीटिक होने के आसार है। इसलिए बच्चों में समय पर डायबिटीज के लक्षणों को पहचाने और उनका उपचार करें

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