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Happy Teachers Day 2018: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए इसकी कहानी और इतिहास

Teachers Day 2018: भारत सहित दुनिया भर में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करने तथा उन्हें सम्मानित करने की परंपरा है।

Teachers Day 2018: शिक्षक दिवस हमेशा से मनाया जाने वाला कोई धार्मिक पर्व नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत 1962 से हुई है।

Happy Teachers Day 2018: पूरे भारत में 5 सिंतबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। कहा जाता है कि एक शिक्षक हमारी शख्सियत को तराशने में जो भूमिका निभाते हैं उसकी बराबरी कोई नहीं सकता है। शिक्षक दिवस के मौके पर हम इसी नेक कार्य के लिए अपने गुरुओं के प्रति आभार प्रकट करते हैं और उनके प्रति सम्‍मान जताते हैं। इस मौके पर बच्‍चे अपने टीचर्स को गिफ्ट भी देते हैं और गुरु के चरणों में सिर नवाते हैं। कई संस्थाओं, स्कूल में सांस्कृति कार्यक्रम होता है और शिक्षक की महिमा को याद किया जाता है। दरअसल यह दिन गुरु और शिष्य के बीच बने संबंध को जीने का और गुरु के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का त्यौहार है। इस दिन गुरू और शिष्‍य अपने भावुक रिश्‍ते को जीते हैं। अपने जीवनकाल में छात्र रह चुका प्रत्‍येक इंसान इस दिन अपने गुरू को याद करता है।

भारतीय संस्कृति में शिक्षक को भगवान से भी ऊपर माना जाता है। प्राचीन शास्त्रों में भी गुरू की महिमा के बारे में विस्तार से लिखा गया है। गुरू को ब्रह्मा-विष्णु-महेश यानी कि ईश्वर मानने वाला भारत दुनिया का इकलौता देश है। कबीरदास ने गुरू की महिमा के बारे में बताते हुए यहां तक कह दिया कि भगवान के रूठ जाने पर गुरू के पास जाया जा सकता है लेकिन अगर गुरू रूठ जाते हैं तो इंसान का कोई ठौर नहीं होता। भारत में शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत 1962 में हुई थी, जब भारत की धरती पर एक महान हस्ती का जन्म हुआ था। आइए हम आपको बताते हैं शिक्षक दिवस का इतिहास

क्यों मनाते हैं शिक्षक दिवस – 5 सितंबर को हमारे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस होता है। राधाकृष्णन का नाम भारत ही नहीं दुनिया भर के महान दार्शनिकों तथा शिक्षाविदों में लिया जाता है। एक बार उनके कुछ शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने का निश्चय किया। इस बारे में वे जब उनसे अनुमति लेने गए तो उन्होंने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाए जाने की बजाय अगर इसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा तो मुझे गर्व महसूस होगा। इसी के बाद से पूरे देश में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। पहली बार 1962 में शिक्षक दिवस मनाया गया था। महान दार्शनिक और शिक्षाविद डॉ. राधाकृष्णन के इस मंतव्य से जाहिर होता है कि उनके मन में शिक्षक समुदाय को लेकर किस तरह का सम्मान भाव था। एक छात्रवत्सल अध्यापक होने की वजह से डॉ. राधाकृष्णन को उनके विद्यार्थी बहुत सम्मान देते थे। वे स्वयं भी अपने छात्रों से बहुत स्नेह रखते थे।

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क्या है शिक्षक दिवस का महत्व – तमाम प्राचीन और वर्तमान विद्वानों ने गुरू की महत्ता को सबसे ऊपर रखा है। संतों ने भी गुरू को भगवान से ऊपर का दर्जा दिया है। शिक्षक अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर समाज तथा देश की बौद्धिक चेतना के विकास में अपना योगदान देता है। इसके अलावा शिक्षा के प्रसार के माध्यम से वह मानवता को पोषण प्रदान करता है। ऐसे में न सिर्फ छात्र बल्कि सारा समाज तथा सारा देश भी शिक्षक के प्रति कृतज्ञ भाव रखता है। शिक्षक दिवस ऐसे ही शिक्षकों के सम्मान करने का दिन होता है। इस दिन सारा देश ज्ञान के दीप जलाकर प्रकाश करने वाले गुरू को धन्यवाद ज्ञापित करता है तथा उन्हें सम्मानित करने का प्रयास करता है। सभी राज्यों की सरकारें तथा केंद्र सरकार भी राज्य तथा देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को इस दिन सम्मानित करती है। उन्हें पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

देश के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनमोल Quotes इस प्रकार हैं-

– किताब पढ़ना हमें एकांत में विचार करने की और सच्ची खुशी देता है।

– पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।

– केवल निर्मल मन वाला व्यक्ति ही जीवन के आध्यात्मिक अर्थ को समझ सकता है। स्वयं के साथ ईमानदारी आध्यात्मिक अखंडता की अनिवार्यता है।

– धर्म भय पर विजय है; असफलता और मौत का मारक है।

– आध्यात्मक जीवन भारत की प्रतिभा है।

– धन, शक्ति और दक्षता केवल जीवन के साधन हैं, खुद जीवन नहीं।

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