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इन योगासनों के जरिए अपने दिल का रखें खास ख्याल, बाबा रामदेव से जानिए

अगर आप अपने दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करना जरूरी है।

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ब्लॉकेज को खोलने के लिए आप अनुलोम-विलोम प्रणायाम करें। photo-freepik

दिल की बीमारियों को कार्डिवस्‍कुलर डिजीज कहा जाता है। चिकित्‍सीय भाषा में दिल की बीमारियों के लिए यही शब्‍दावली इस्‍तेमाल की जाती है। रजिस्‍ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक नए शोध के मुताबिक भारत में बड़ी संख्‍या में लोग दिल की बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।

देश में होने वाली 19 फीसदी मौतें दिल की बीमारियों के चलते होती हैं। योग गुरु स्वामी रामदेव के मुताबिक योग एक जरिया है जिससे हम अपने दिल को बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं। ऐसे योगासन हैं, जिसमें सबसे ज्यादा फोकस सांसों पर होता है, जिससे हमारा रेस्पिरेटरी सिस्टम दुरुस्त रहता है। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त होने से हमारा ब्लड सर्कुलेशन और वज़न भी नियंत्रित रहता है। बाबा रामदेव द्वारा सुझाए गए कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से घर पर​बिना किसी प्रशिक्षण के कर सकते हैं…

सूर्य नमस्कार: यह सबसे मशहूर योगासन है। इसका शाब्दिक अर्थ है सूरज को नमस्कार करना। इसमें कुल 12 योगासन होते हैं जिनमें लगभग शरीर के हर हिससे पर फोकस होता है। सबसे खास बात ये कि अगर केवल हर दिन सूर्य नमस्कार भी कर लिया जाए तो ‘निरोगी काया’ का लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाता है।

भुजंगासन: पेट की तरफ लेट जाएं और दोनों हाथों को ठीक छाती के पास रखें। धीरे धीरे अपने शरीर को ऊपर की ओर ले जाएं। अपनीं सांसों पर ध्यान केंद्रित करें और अपने पेट को स्ट्रेच करें। इस आसन से आपकी रीढ़ की हड्डी, पेट और बांह फिट रहते हैं। साथ ही चक्कर आने की समस्या भी इस आसन को करने से दूर हो जाती है।

पश्चिमोत्तासन: दोनों पैरों को सामने की ओर स्ट्रेच करते हुए एक दूसरे से जोड़ें। धीरे धीरे आगे झुकते हुए, बिना अपने घुटने मोड़े, अपनी नाक को घुटनों से सटाएं। हो सके तो अपने सिर को घुटनों से सटाने की कोशिश करें। इस आसन से शरीर का लचीलापन तो बढ़ता ही है, धड़कनों की रफ्तार भी नियंत्रित रहती है।

दंडासन: पेट के बल लेट जाएं और दोनों हाथों को छाती के करीब रखें। अब अपने शरीर को ऊपर की ओर ले जाएं और हथेली ओर पैर के निचले हिस्से की मदद से शरीर को बैलेंस करें। सांस रोककर इसी अवस्था में 30-40 सेकेंड तक रहें, फिर रिलैक्स करें।

शवासन: जमीन पर लेट जाएं और आंखें बंद कर लें। दोनों हथेलियों को खुला छोड़े और पांव के अंगूठे को बाहर की दिशा में रखें। धीरे धीरे सांस लें और छोड़ें। 5 मिनट तक इसी अवस्था में रहें।

अंजली मुद्रा: दोनों हाथों को जोड़कर छाती के बीचो बीच रखें और आंखें बंद कर धीरे से सांस अंदर लें, थोड़ी देर सांस रोकें और फिर धीरे धीरे उसे छोड़ें। यही पैटर्न कुछ मिनटों तक जारी रखें।

वीरभद्रासन: एक पैर को पीछे की तरफ ले जाएं, वहीं दूसरे पांव को 90 डिग्री एंगल पर स्ट्रेच करें। दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर जोड़ें, बिलकुल एक पहाड़ की आकृति जैसा। फिर धीरे धीरे दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं और पीछे के पैर को और पीछे सट्रेच करें। ध्यान रहे, दूसरे पैर को उसी अवस्था (यानी 90 डिग्री एंगल) में रहने दें। बारी बारी से दोनों पैरों से इस आसन को करें।

त्रिकोणासन: दोनों पैरों को फैलाएं। दांए पैर को बाहर की ओर स्ट्रेच करें और बांए हाथ को ऊपर की दिशा में ले जाते हुए कमर को भी दाईं ओर झुकएं। इसी अवस्था में रहते हुए अपनी दाईं हाथेली को जमीन से सटाएं और साथ ही साथ बांए हाथ को ऊपर की तरफ और स्ट्रेच करें। बारी बारी से दोनों तरफ से इसे करें।

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