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अखिलेश के चचेर भाई को पटखनी दे चुकी हैं स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा, पढ़ें- पिता के सपा में जाने पर क्या बोलीं

स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी छोड़ने पर बेटी संघमित्रा इस बात को स्वीकार करती हैं कि अब राजनीति में उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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संघमित्रा मौर्य भाजपा से सांसद हैं। (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने पिछले दिनों दलितों, पिछड़ों और किसानों की अवहेलना का आरोप लगा मंत्री पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अब वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं और बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए हुंकार भर रहे है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य बीजेपी में ही हैं और पार्टी की सांसद हैं।

सियासी गलियारों में संघमित्रा मौर्य और उनके परिवार को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कहा जा रहा है कि मौर्य अपने बेटे को भी बीजेपी से टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बन पाई। इसलिये वे अलग हो गए। उधर, नए सियासी घटनाक्रम के बीच संघमित्रा ने इस बात को स्वीकार किया है कि पिता के पार्टी छोड़ने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

कौन हैं संघमित्रा मौर्य?: स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य फिलहाल बदायूं सीट से भाजपा की सांसद हैं। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेन्द्र यादव को हरा दिया। संघमित्रा, साल 2014 में अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ भी बसपा के टिकट पर मैनपुरी से चुनाव मैदान में उतरी थीं, लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पडा था। बाद में साल 2016 में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की।

MBBS हैं संघमित्रा, बौद्ध धर्म को अपनाया है: बहुत कम लोग जानते हैं कि राजनीति में आने से पहले संघमित्रा मौर्य डॉक्टर थीं। उन्होंने MBBS की पढ़ाई की है। बौद्ध धर्म को मानने वालीं संघमित्रा की शादी साल 2010 में चर्चित कैंसर सर्जन डॉ. नवल किशोर से हुई थी, लेकिन साल 2021 में दोनों का तलाक हो गया। बता दें, संघमित्रा के पूर्व पति डॉ. नवल किशोर शाक्य भी मेडिकल प्रैक्टिस के साथ राजनीति में सक्रिय हैं और वह पहले बसपा के सदस्य हुआ करते थे। 2010 में वह सपा में शामिल हो गए थे।

क्या भाई का साथ देंगी?: संघमित्रा जब पूछा गया कि पिता के बीजेपी छोड़ने और सपा में जाने से क्या उत्कृष्ट (संघमित्रा के भाई) को टिकट मिल जाएगा, जो पिछले दो चुनावों में सपा से हार चुके हैं? इस पर संघमित्रा कहती हैं कि “उन्हें (उत्कृष्ट) टिकट मिलना या ना मिलना सपा नेतृत्व पर निर्भर करता है लेकिन वो (उत्कृष्ट) अपना काम ईमानदारी से करेगा। मैं उसे राजनीतिक रूप से समर्थन नहीं दे सकती लेकिन एक बहन के रूप में मैं हमेशा उसके साथ हूं। पार्टी अलग है, पार्टी की बात पार्टी में, परिवार अपनी जगह।”

(यह भी पढ़ें: अरेस्ट वारंट’ नहीं, सरकार का डेथ वारंट है- स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ वारंट पर बोले सपा नेता, लोग भी दे रहे प्रतिक्रिया)

संघमित्रा ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि उनके सामने अब काफी चुनौतियां हैं, क्योंकि अब उन्हें निशाना बनाया जाएगा। इसके बावजूद वह एक बीजेपी सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करती रहेंगी। संघमित्रा ने कहा कि “आपको हर जगह परेशानी का सामना करना पड़ता है। मैं उनका सामना करना जानती हूं। मैं संघर्ष करना जानती हूं।”

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