ताज़ा खबर
 

Subhash Chandra Bose Jayanti Essay, Speech, Quotes: जब भेष बदलकर भाग गए थे सुभाष तो हिटलर से भी की थी मुलाकात..

Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Quotes: पिता के कहने पर सुभाष चंद्र बोस ने आईएएस की परीक्षा पास की पर वह ज्यादा दिन नौकरी नहीं कर पाए और ब्यूरोक्रेट की नौकरी छोड़ भारत वापस आ गए। 1921 में उनकी मुलाकात अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी से हुई, वहीं उन्होंने बापू को राष्ट्रपिता का दर्जा दिया।

subhash chandra bose, subhash chandra bose jayanti, subhash chandra bose jayanti 2020, netaji subhash chandra bose jayanti 2020, subhash chandra bose 2019, subhash chandra bose speech, subhash chandra bose speech for students, subhash chandra bose speech for teachers, subhash chandra bose speech in hindi, subhash chandra bose speech in english, subhash chandra bose essay ideas, subhash chandra bose essay, subhash chandra bose essay in hindiSubhash Chandra bose Speech

Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Quotes: आजाद हिंद फौज की स्थापना करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। बचपन से ही इनमें अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा भरा था। यही कारण है कि पिता के कहने पर सुभाष चंद्र बोस ने आईएएस की परीक्षा पास की पर वह ज्यादा दिन नौकरी नहीं कर पाए और ब्यूरोक्रेट की नौकरी छोड़ भारत वापस आ गए। 1921 में उनकी मुलाकात अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी से हुई, वहीं उन्होंने बापू को राष्ट्रपिता का दर्जा दिया।

Read | Happy Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Quotes, Wishes Images, Status, Messages, Speech

‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’… ऐसे तमाम जोश से भरे नारे और कोट्स उस दौर में पूरे हिंदुस्तान में छा गए थे। उनकी मुहिम से लाखों भारतीय जुड़ते चले गए। अंग्रेज भी उनकी बढ़ती ख्याति और ताकतवर होती आजाद हिंद फौज से घबरा गई थी। ये उनके कुछ फेमस कोट्स जो आज भी भारतीय युवाओं के दिल जोश भर देते हैं। आइए नेताजी की जयंती पर उनकी कहीं कुछ बातें दोस्तों से शेयर करें और यहां से आप भाषण या स्पीच की तैयारी भी कर सकते हैं…

“आज हमारे अंदर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके; एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके।”

“राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्य, शिव और सुन्दर से प्रेरित है।”

“ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिलेगी, हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।”

Live Blog

Highlights

    11:55 (IST)23 Jan 2020
    Neta Ji Subhash Chandra Bose Quotes In Hindi: नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचार...

    “मेरे पास एक लक्ष्य है जिसे मुझे हर हाल में पूरा करना हैं।  मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है ! मुझे नैतिक विचारों की धारा में नहीं बहना है। ”

    11:18 (IST)23 Jan 2020
    आज भी लोग नेताजी की बहादुरी के किस्से बहुत चाव से सुनते हैं

    ऐसा माना जाता है कि 1945 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु एक प्लेन दुर्घटना में हुई थी। इससे देश की आजादी की उम्मीद लगाए लोगों को बहुत बड़ा सदमा लगा था। पर आज भी लोग नेताजी की बहादुरी के किस्से बहुत चाव से सुनते हैं। उनकी वीरता के बारे में लोग कई बातें करते हैं। खासकर युवाओं के लिए नेताजी बहुत बड़े प्रेरणास्रोत हैं। हर भारतीय बच्चे को उनको और भारत की स्वतंत्रता के लिये किये गये उनके कार्यों के बारे में जरुर जानना चाहिये।

    10:51 (IST)23 Jan 2020
    संघर्ष ही जीवन है इस बारे में सुभाष चंद्र बोस के ये थे विचार...

    “संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले मुझमे नहीं था।”

    10:13 (IST)23 Jan 2020
    सुभाष चंद्र बोस की कही ये बात आज के समय में भी लोगों को आत्मविश्वास से भर देती है...

    “मैंने अपने अनुभवों से सीखा है ; जब भी जीवन भटकता हैं, कोई न कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर भटकने नहीं देती।”

    09:30 (IST)23 Jan 2020
    नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी की लड़ी लड़ाई...

    जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उन्हें इस कदर विचलित कर दिया कि, वे भारत की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।

    09:12 (IST)23 Jan 2020
    जब नेताजी बोले थे- ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’

    ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’… ऐसे तमाम जोश से भरे नारे और कोट्स उस दौर में पूरे हिंदुस्तान में छा गए थे। उनकी मुहिम से लाखों भारतीय जुड़ते चले गए।

    09:01 (IST)23 Jan 2020
    महात्मा गांधी जी को मिला था 'राष्ट्रपिता' का दर्जा..

    1921 में उनकी मुलाकात अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी से हुई, वहीं उन्होंने बापू को राष्ट्रपिता का दर्जा दिया।

    08:11 (IST)23 Jan 2020
    हिटलर से भी मिलने पहुंच गए थे सुभाष

    अंग्रेजों ने सुभाष चंद्र बोस को 1941 में एक घर में नजरबंद कर कैद कर रखा था। तब उन्होंने महानिष्क्रमण यात्रा नाम के अभियान के तहत भेष बदलकर भागने की योजना बनाई और सफल हुए। इसके तहत वह सबसे पहले कार के माध्यम से कोलकाता से गोमो गए। वहां ट्रेन से पेशावर रवाना हो गए। फिर पेशावर से काबुल होते हुए नेताजी जर्मनी गए जहां उन्होंने अडॉल्फ हिटलर से मुलाकात की।

    23:30 (IST)22 Jan 2020
    भारत तब जी सकेगा...

    आज हमारे अंदर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके; एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके।

    22:59 (IST)22 Jan 2020
    नेताजी ने कही थी ये बात...

    जब आज़ाद हिंद फौज खड़ी होती है तो वो ग्रेनाइट की दीवार की तरह होती है; जब आज़ाद हिंद फौज मार्च करती है तो स्टीमर की तरह होती है।

    22:23 (IST)22 Jan 2020
    मां से बेहद प्यार करते थे नेताजी

    माँ का प्यार स्वार्थ रहित और सबसे गहरा होता है। इसको किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता।

    21:55 (IST)22 Jan 2020
    सुभाष चन्द्र बोस का प्रसिद्ध नारा था 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा

    नेताजी एक ओजस्वी वक्ता थे। अपने हर भाषण में वो देशप्रेम और देश के नौजवानों को अवश्य शामिल करते थे। 12 सितंबर 1944 को रंगून के जुबली हॉल में शहीद यतीन्द्र दास के स्मृति दिवस पर नेताजी ने अत्यंत मार्मिक भाषण देते हुए कहा- 'अब हमारी आजादी निश्चित है, परंतु आजादी बलिदान मांगती है। आप मुझे खून दो, मैं आपको आजादी दूंगा।' यही देश के नौजवानों में प्राण फूंकने वाला वाक्य था, जो भारत ही नहीं दुनिया के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा गया।

    21:07 (IST)22 Jan 2020
    नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पिता का था उनहें समर्थन

    सुभाष चंद्र बोस ने जब अंग्रेजों की नौकरी को ठुकराकर देश सेवा का प्रण लिया तो उस समय उनके पिता ने भी उनके फैसले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि- 'जब तुमने देशसेवा का प्रण ले ही लिया है, तो कभी अपने कदमों को डगमगाने मत देना।'

    20:18 (IST)22 Jan 2020
    कड़ी मेहनत के बाद पास की सिविल सर्विसेस परीक्षा लेकिन देश के लिये छोड़ी नौकरी

    नेता जी सुभाष चंद्र बोस की प्रारंभिक पढ़ाई कटक में हुई थी। उसके बाद उन्होंने कोलकाता के प्रेजिडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई, और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (इंडियन सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिये उनके माता पिता ने उन्हें इंग्लैंड भेज दिया था। उस वक्त जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था उस वक्त किसी भी भारतीया का सिविल सर्विसेस के लिये जाना बहुत कठिन था। लेकिन फिर भी नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने सिविल सर्विसेस में चौथा स्थान प्राप्त किया। लेकिन सन् 1921 में देश के बिगड़ते हालातों की सूचना पाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने नौकरी छोड़ दी थी और देश वापस आगए थे।

    19:25 (IST)22 Jan 2020
    क्या विमान दुर्घटना में ही हुई थी नेताजी की मौत?

    ऐसा माना जाता है कि नेताजी की मौत एक विमान दुर्घटना में हुई थी। ताइहोकु हवाई अड्डे पर उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जोश से भरे नेताजी कभी होश नहीं खोते थे और युवाओं को लेकर विशेषतौर पर चिंतित रहते थे। हमें भी नेताजी के आदर्शों को जीवन नें लाने की कोशिश करनी चाहिए।

    19:09 (IST)22 Jan 2020
    गांधी जी से मनमुटाव के बाद बनाया 'आजाद हिंद फौज'

    नेताजी ने अपनी खुद की भारतीय राष्ट्रीय शक्तिशाली पार्टी 'आजाद हिन्द फौज' का गठन गांधी से मनमुटाव होने के बाद किया। बोस को कई बार जेल जाना पड़ा लेकिन इससे न तो वो निराश हुए और न ही हताश। वो कुछ समय के लिए जर्मनी भी गए और वहां रहने वाले भारतीयों और कुछ भारतीय युद्धबंदियों की मदद से भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया। हिटलर से निराश होने के बाद वो जापान गए और अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना को दिल्ली चलो का एक प्रसिद्ध नारा दिया।

    18:38 (IST)22 Jan 2020
    गांधी से मिलने के बाद देशसेवा को धर्म मान लिया

    सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ और माता का प्रभावतीदेवी था। इनके पिता कटक के मशहूर बैरिस्टर थे। पिताजी की इच्छा का पालन करते हुए उन्होंने इस परीक्षा में सफलता भी हासिल की पर अंग्रेजों को लेकर अपने दिल से कटुता नहीं निकल पाएं जिस वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 1921 में महात्मा गांधी से मिलने के बाद उन्होंने देशसेवा को अपना परम धर्म मान लिया। उन्होंने चितरंजन दास के साथ काम किया और कुछ समय के लिए कॉंग्रेस के नेता भी चुने गए।

    18:37 (IST)22 Jan 2020
    तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा

    ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता पाने के लिये सैन्य विद्रोह का रास्ता चुनने वाले सेनानियों में सुभाष चन्द्र बोस का नाम का नाम भी आता है। अपनी इसी सोच की वजह से बोस की महात्मा गांधी से कई बार अनबन भी हुई। उनके अनुसार भारत को एक आजाद देश बनाने के लिये गांधीजी की अहिंसक नीति काफी नहीं है। 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' नेताजी का यह नारा आज भी लोगों में जोश भर देता है।

    Next Stories
    1 Happy Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Quotes, Wishes Images, Status: अंग्रेज भी जिनसे कांपते थे ऐसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर याद करें उनके जोश से भरे नारे
    2 Subhash Chandra Bose Jayanti 2020: नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बापू को क्यों कहा था राष्ट्रपिता? पढ़िए उनकी जयंती पर खास रिपोर्ट
    3 Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Speech, Essay, Quotes: भेष बदलकर अंग्रेजों की गिरफ्त से भागे थे नेताजी, तैयार की थी ‘आजाद हिंद फौज’ नाम की अलग सेना
    आज का राशिफल
    X