जिंदगी संघर्षों से भरी हुई है। ऐसा कोई भी इंसान नहीं है जिसने संघर्ष न किया है या जो अपने वर्तमान समय में न कर रहा हो। हर कोई अपने-अपने स्तर पर जीवन की किसी न किसी कठिनाई से गुजरता रहता है। छात्र अच्छे अंक पाने और सरकारी नौकरी के लिए संघर्ष करते हैं, तो दफ्तर में काम करने वाले अच्छे प्रमोशन और तनख्वाह के लिए मेहनत करते हैं। कोई दो जून की रोटी के रिक्शा चला रहा है, तो कोई अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए रात-दिन मेहनत कर रहा है। ऐसे लोगों को देखने के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है, आपके आसपास ही बहुत से लोग मिल जाएं। लेकिन सफल वही हो पाता है जो संयम रखता है और बाहरी दुनिया की बातों पर ध्यान नहीं देता।
कई बार असफलता मिलने पर या फिर आपके व्यवहार को देखते हुए लोग बातें बनानी शुरू कर देते हैं, जिसे नजरअंदाज करने के बजाय हम उसके बारे में सोचने लगते हैं। हाल यह होता है कि हम अपने आसपास हो रही खुद की बुराई को सुनकर अंदर से दुखी हो जाते हैं। यह दुख इंसान को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर लक्ष्य से भटका देता है। ऐसे में आध्यात्मिक गुरु और मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास की कुछ बातें आपको लोगों की बुराई से बचाने में मदद कर सकती है, जिससे आप अपने लक्ष्य पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
गौर गोपाल दास आपके खिलाफ हो रही आलोचनाओं और नकारात्मक बातों से बचने के लिए सबसे सरल तरीके से उदाहरण देते हुए समझाते हैं। लगभग हर किसी ने हाथी और कुत्ते वाली कहावत सुनी होगी ‘हाथी चले बजार, कुत्ता भौंके हजार’। गौर गोपाल दास कहते हैं कि गांव में जब कोई हाथी आता है तो काफी लोग हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं कि गणपति बप्पा पधार रहे हैं। लेकिन पीछे से एक आवाज आती है, जो कुत्तों की होती है, वे लगातार भौंकते रहते हैं।
बुराई होने पर कैसे नजरआंदाज करें
गौर गोपाल दास कहते हैं कि हाथी और कुत्तों में कहीं से बराबरी नहीं है, लेकिन फिर वह भौंकते रहते हैं। वह कहते हैं कि अगर कुत्तों की भाषा हम समझ पाते तो उनसे पूछते कि हाथी पर क्यों भौंक रहे हो, तब वे कहते कि हमें हाथी से दिक्कत नहीं है, बल्कि जो हाथ जोड़कर खड़े हैं उनसे हैं। हमें जलन होती है, इसलिए भौंकते हैं। यहां पर उनके कहने का अर्थ है आप जब भी कुछ करने जाएंगे तो लोग कुछ न कुछ जरूर कहेंगे, कई लोगों को आपसे जलन होगी। आपका काम उनकी बातों को सुनने के बजाए उन्हें नजरअंदाज करना है।
दिमाग को संतुलित रखें
वह आगे कहते हैं कि कुत्ते जब हाथी पर भौंकते हैं तो वह पीछे मुड़ कर नहीं देखते या उनसे यह भी नहीं पूछते कि क्यों भौंक रहे हो और न ही लोगों से कहते हैं कि उसे प्रणाम करें। हाथी न पीछे देखता है और न ही इधर-उधर, वह सिर्फ आगे चलता रहता है। उनके कहने का अर्थ है कि आपका भी काम लोगों को बताना या फिर चुप कराना नहीं है। अगर आपकी बुराई हो रही है तो होने दे, कोई जल रहा है तो जलने दें, कोई पीठ पीछे कुछ भी कह रहा है तो उसे कहने दें। आपका काम अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ होना है, जो भी आपने ठाना है उसे पूरा करें। अपने दिमाग में यह बिल्कुल न आने दें कि लोग क्या कह रहे हैं और क्या कहेंगे।
दोनों स्थितियों में संतुलित रहना सीखें
इसके आगे वह गीता के एक श्लोक का एक अंश साझा करते हुए कहता हैं कि ‘तथा मानापमानयोः अर्थात तारीफ या अपमान दोनों में व्यक्ति को समान भाव से रहना चाहिए। गौर गोपाल दास कहते हैं कि, कोई बुराई कर रहा है करने दो, कोई आपकी तारीफ कर रहा है करने दें। जब आप लोगों की तारीफ और आलोचना, दोनों से ऊपर उठ जाते हैं तभी आप सच में बड़ी सफलता हासिल कर पाते हैं और दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं।
ऐसे लोग दुनिया में बदलाव लाते हैं
लोग आपको सराहेंगे भी और आपकी आलोचना भी करेंगे। कुछ आपकी खूब प्रशंसा करेंगे, तो कुछ बुरा-भला भी कहेंगे। लेकिन जो व्यक्ति इन दोनों बातों से प्रभावित हुए बिना अपने रास्ते पर आगे बढ़ता रहता है, वही वास्तव में दुनिया में बदलाव लाने वाला इंसान बनता है।
अंत में बस इतना ही कि किसी के बुराई करने या भला कह देने से आपका कोई नुकसान नहीं होगा। इन बातों पर अगर आप गौर करेंगे तो हानि आपकी ही होनी है। समाज में हर तरह लोग रहते हैं, हर किसी को आप चुप नहीं करा सकते हैं। बेहतर तरीका यही है कि आप अपने लक्ष्य के प्रति इतना दृढ़ रहे हैं की उसे समाज की कोई आवाज या बुराई छू भी न सके। हर स्थित में शांत रहना चाहिए और अपने ध्यान को केंद्रित रखना चाहिए।
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