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चोट के कारण डेढ़ साल बिस्तर पर रहीं, अगले ऑलंपिक के लिए किया क्वालिफाई – जानिये ‘गोल्डन गर्ल’ विनेश फोगाट का सफर

Vinesh Phogat Journey: विनेश के अनुसार "वे उस समय कमरे में रोती थीं, सोती थीं और उठने के बाद फिर से अकेले रोतीं थीं।"

Vinesh Phogat, tokyo olympics 2020, Khel Ratna 2020, Vinesh Phogat injury, Vinesh Phogat awardsलेकिन इस चोट से जल्द ही उबरकर उन्होंने दोबारा वापसी की और 2018 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं

भारतीय महिला कुश्ती की आइकन कही जाने वाली चारों फोगाट बहनों को कौन नहीं जानता है। लेकिन महावीर फोगाट की चार बेटियों के अलावा उनकी भतीजी विनेश फोगाट भी देशवासियों को गर्व करने के कई मौके देती रही हैं। हर खिलाड़ी का सपना देश के लिए ओलंपिक लाने का होता है लेकिन विनेश 2016 के रियो ओलंपिक में एक मैच में चोटिल हो जाने के बाद बाहर हो गईं। बता दें कि ये उनका क्वार्टर फाइनल मैच था। लेकिन जिंदगी के प्रति उनका नजरिया और कुश्ती के लिए उनके प्यार ने उन्हें हार नहीं मानने दिया। अपने जुनून के कारण ही साल 2020 में होने वाले टोक्यो ऑलंपिक्स में उन्होंने क्वालिफाई कर लिया है।

रूढ़ीवादी सोच के बीच पली-बढ़ीं: विनेश का जन्म 25 अगस्त 1994 को हरियाणा के बलाली गाँव में हुआ था। विनेश बताती हैं कि बचपन में ताऊ जी बाकी बहनों के साथ ही उन्हें भी तगड़ी ट्रैनिंग करवाते थे। उनके पिता राजपाल की हत्या के बाद उनकी माँ ने पालन पोषण किया है। वे बताती हैं कि “तब पुरुषवादी और रूढ़ीवादी सोच वाले लोग कहने लगे थे कि पिता के चले जाने के बाद लड़की की शादी कर दो अच्छा होगा। गीता बबीता के लिए तो महावीर है लेकिन विनेश आगे क्या कर लेगी।” लेकिन उनकी माँ ने किसी की बात न मानते हुए वीनेश को कुश्ती में लगाये रखा।

ऐसी होती थी ट्रेनिंग: विनेश बताती हैं, “जब बच्चे थे तो शुरू-शुरू में तो एक-दो महीने बहुत अच्छा लगा जब ताऊजी कुश्ती के लिए ले जाते। खेलना किस बच्चे को अच्छा नहीं लगता? पर धीरे-धीरे हमारी कड़ी ट्रेनिंग शुरू हो गई। हमें सुबह साढ़े तीन बजे उठना होता था। ट्रेनिंग कितने घंटे चलेगी ये तय नहीं होता था। अगर आज के बच्चों को ऐसी कड़ी ट्रेनिंग करनी पड़े तो वो पहले ही दिन भाग जाएँ।”

कैसे हुई करियर की शुरुआत: 2013 में अपने पहले अंतर्राष्ट्रीय मैच की शुरुआत करने के बाद 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद विनेश सुर्खियों में आ गईं। इसके बाद उन्होंने लगातार एशिया रेसलिंग चैंपियनशिप, वर्ल्ड रेस्लिंग चैंपियनशिप और एशियन गैम्स में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते।

मुश्किल था रियो ऑलंपिक्स के बाद का दौर: विनेश के अनुसार “वे उस समय कमरे में रोती थीं, सोती थीं और उठने के बाद फिर से अकेले रोतीं थीं।” लोग कहने लगे थे कि इस गंभीर चोट के बाद तो इसका करियर खत्म समझो। लेकिन इस चोट से जल्द ही उबरकर उन्होंने दोबारा वापसी की और 2018 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं।

बंध चुकी हैं परिणय सूत्र में: विनेश ने वर्ष 2018 में पहलवान सोमवीर राठी से शादी की है। दोनों का प्यार कुश्ती के मैचों के दौरान ही परवान चढ़ा और 8 साल के बाद दोनो एक दूसरे के हो गये। विनेश को कुश्ती के अलावा म्यूज़िक सुनना, फिल्म देखना पसंद है।

खेल रत्न के लिए नामित: हाल में ही भारत सरकार के द्वारा उन्हें 2020 में “राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार” देने की घोषणा की गई है। ये पुरस्कार भारत में खिलाड़ियों को मिलने वाला सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। इसके अलावा, उन्हें 2016 में अर्जुन अवार्ड से नवाज़ा गया था और 2018 में वे पद्म श्री के लिए भी नोमिनेट की गईं थी।

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