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दुर्गापूजा: इस पंडाल में होगी नेत्रहीनों के लिए खास प्रतिमा और नेत्रदान के लिए भी होंगे इंतजाम

पंडाल को खास नेत्रहीन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है लेकिन देख सकने वाले लोगों के लिए भी वहां जाने की मनाही नहीं होगी।

पंडाल के मुख्य द्वार पर तीन आंखों वाली मां दुर्गा के चेहरे की विशालकाय मूर्ति लगी है। इसे 12000 लोहे के स्क्रू की मदद से बनाया गया है। (फोटो सोर्सः समाज सेबी संघ फेसबुक पेज)

आमतौर पर पूजा पांडालों में आने वाले लोगों को मूर्तियां छूने की इजाजत नहीं होती लेकिन कोलकाता में इस साल दुर्गा पूजा का एक ऐसा पांडाल बनाया गया है जहां लोगों को मूर्तियां छूकर उसके आर्टवर्क को देखने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। कोलकाता के बालीगंज में ‘समाज सेबी संघ पूजा’ नेत्रहीन लोगों के लिए एक ऐसे ही दुर्गा-पूजा पंडाल का निर्माण कर रहा है। यहां दृष्टिबाधित लोग मूर्तियों को छूकर मां दुर्गा की परंपरागत मूर्तियों के बारे में अंदाजा लगा सकेंगे। पंडाल को खास नेत्रहीन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है लेकिन देख सकने वाले लोगों के लिए भी वहां जाने की मनाही नहीं होगी।

पंडाल के मुख्य द्वार पर तीन आंखों वाली मां दुर्गा के चेहरे की विशालकाय मूर्ति लगी है। इसे 12000 लोहे के स्क्रू की मदद से बनाया गया है। पंडाल के अंदर की दीवारों पर नेल्स और स्ट्रिंग्स की मदद से ऐसा आर्टवर्क तैयार किया गया है जो ब्लाइंड स्कूल्स में नेत्रहीनों को सिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ब्रेल लिपि में पंडाल के अंदर की दीवारों पर ‘मां’ और ‘जय मां दुर्गा’ लिखा हुआ है। पूजा में मदद के लिए पंडाल में आने वाले नेत्रहीनों को एक शीट दी जाएगी जिसमें पूजा सामग्री, पूजा से संबंधित विधान और दुर्गा स्तुति मंत्र ब्रेल लिपि में लिखे होंगे।

पंडाल के सबसे ऊपर आंखों को हाथ से ढंकी हुई एक मूर्ति स्थापित की गई है। यह प्रतीकात्मक रूप से इस बात का संकेत है कि नेत्रहीनों के लिए उनके हाथ ही उनकी आंखें होती हैं। संबंधित दुर्गा पूजा समिति से जुड़े 73 साल के दिलीप बनर्जी बताते हैं कि इस सब्जेक्ट पर काम करने से पहले उनके कलाकारों ने नेत्रहीन छात्रों के स्कूल में काफी लंबा वक्त बिताया था। पंडाल के आयोजकों का कहना है कि उनके कलाकारों का मकसद नेत्रहीनों को घर जैसा महसूस कराना है लेकिन इसके साथ ही वह लोगों को नेत्रहीनों के लिए सोचने तथा उनके लिए नेत्रदान करने को भी प्रेरित करना चाहते हैं। इसके लिए पंडाल के द्वार पर एक ऐसे डेस्क की भी व्यवस्था होगी जहां लोगों को नेत्रदान के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं में मदद के लिए वॉलंटियर्स मौजूद होंगे। ये वॉलंटियर्स एक नेत्र चिकित्सालय की ओर से होंगे जिनसे संपर्क करके पंडाल में आने वाले लोग नेत्रदान कर सकते हैं।

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