मुलायम सिंह यादव के भाई ने बताए थे तीन नेताओं के नाम, जिनकी वजह से प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे ‘नेताजी’

उस वक्त यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के नाम की खूब चर्चा हुई थी, लेकिन वह प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे। अभय राम यादव ने तीन नेताओं को इसका जिम्मेदार ठहराया था।

Mulayam Singh Yadav, Akhilesh Yadav
यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव (Photo- Indian Express)

साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब समाजवादी पार्टी को बहुमत मिला तो अखिलेश यादव सीएम की कुर्सी पर बैठे थे। पिता मुलायम सिंह यादव ने बेटे अखिलेश की ताजपोशी कर एक तरीके से उनके सियासी सफर का रास्ता साफ कर दिया था। कभी कुश्ती के अखाड़े में अपना लोहा मनवाने वाले मुलायम के इस फैसले को सियासी गलियारों में एक ‘दांव’ की तरह देखा गया था। मुलायम सिंह यादव देश के सबसे बड़े सूबे यूपी के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री की कुर्सी तक तो पहुंचे ही, राजनीति के अखाड़े में बड़े-बड़े धुरंधरों को चित भी किया। हालांकि एक मौका ऐसा भी आया जब मुलायम प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे।

राजनीति से दूर अपने पैतृक गांव में खेती कर रहे मुलायम के छोटे भाई अभय राम यादव ने ‘द लल्लनटॉप’ को दिये एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र किया था। अभय राम से पूछा गया था, ‘मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे। आपको याद है कि उस समय ऐसा क्या हुआ था?’ इसके जवाब में अभय राम यादव कहते हैं, ‘हुआ क्या था, लालू ने सब कुछ किया था, इनके साथ शरद यादव भी मिल गए थे और कोई एक नेता भी था। प्रधानमंत्री तो बन ही गए थे मुलायम। सुबह शपथ लेनी थी और रात में ये हो गया।’

इस बीच उनसे दोबारा सवाल पूछा जाता है, ‘अन्य सभी पार्टियां तैयार हो गई थीं? जिसमें हरिकिशन सुरजीत भी थे?’ अभय राम यादव कहते हैं, ‘सब तैयार हो गए थे। बिल्कुल ऐन मौके पर लालू प्रसाद यादव, राम विलास पासवान और शरद यादव ने नहीं बनने दिया, नहीं ये तो प्रधानमंत्री बन ही गए थे। सबसे पहले लालू प्रसाद यादव ने ही गड़बड़ की थी और फिर उनके पीछे लगकर बाकी दूसरे नेताओं ने भी गड़बड़ करना शुरू कर दिया था।’

सुबह लेने वाले थे शपथ: मुलायम सिंह यादव ने भी एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था, ‘हमें सुबह आठ बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेनी थी। हजारों समर्थक और प्रेस के लोग मेरे घर पर पहुंच गए थे। मुझे इसका कभी कोई दुख नहीं हुआ कि मैं प्रधानमंत्री नहीं बन पाया। सब चीजें तय होने बाद भी पूरा मामला बिगड़ गया था।’

बता दें, साल 1996 में यूनाइटेड फ्रंट की सरकार में एच.डी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने थे। सियासी गलियारों में ऐसी चर्चा होती है कि देवगौड़ा के पीएम बनने से पहले मुलायम के नाम सहमति बन गई थी। कई नेताओं ने सहमति बनने के बावजूद मुलायम के नाम का विरोध कर दिया था, जिसके बाद वह पीएम नहीं बन पाए थे। हालांकि देवगौड़ा की सरकार में मुलायम को रक्षा मंत्री बनाया गया था।

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