बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने हाल ही में अपने डाइट रूटीन के बारे में बात की। उन्होंने मैशेबल इंडिया (Mashable India) को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि वह वर्कआउट के साथ-साथ रोजाना 18 से 20 घंटे इंटरमिटेंट फास्टिंग भी करती हैं। वह दिनभर में सिर्फ डेढ़ मील (1.5 Meal) ही लेती हैं। बता दें कि सोनाली बेंद्रे को स्टेज 4 मेटास्टेटिक कैंसर था।
कैंसर सर्वाइवर होने के नाते अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए डाइट पर नियंत्रण रखना स्वाभाविक है। इसलिए इंडियन एक्सप्रेस ने एक्सपर्ट से पूछा कि क्या लंबे समय तक इंटरमिटेंट फास्टिंग करना फायदेमंद है।
टीजीएच ओंको लाइफ कैंसर सेंटर, तलेगांव की कंसल्टेंट रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. ज्योति मेहता ने बताया कि “कुछ हेल्दी लोगों के लिए यह वजन, शुगर कंट्रोल करने और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन कैंसर से लड़कर ठीक हुए लोगों के मामले में हमें थोड़ी सावधानी बर्तनी चाहिए।”
क्या सभी के लिए सही है फास्टिंग?
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट अस्पताल के कंस्लटेंट ओंको सर्जन डॉ. मेघल संघवी ने कहा कि कैंसर से ठीक हुए लोगों के लिए कोई एक तरह की डाइट नहीं होती। डॉ. संघवी के अनुसार कैंसर के प्रकार, इलाज, ठीक होने के स्टेज, शरीर का वजन, मसल्स, सामान्य सेहत, उम्र और पहले से मौजूद लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के आधार पर पोषण की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग को अच्छे तरीके से ले सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक फास्टिंग हर किसी के लिए सही नहीं हो सकती। इसकी वजह से थकान, मांसपेशियों का कम होना और रिकवरी की गति धीमी पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉ. संघवी के अनुसार कुछ लोग जैसे डायबिटीज के मरीज, बुजुर्गों या लिवर की बीमारी वाले लोगों को आमतौर पर लंबे समय तक फास्टिंग करने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से उनकी सेहत से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती है।
कैंसर के इलाज के बाद शरीर को ठीक होने, मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने और इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए पोषण की जरूरत होती है। डॉ. ज्योति मेहता के अनुसार अगर फास्टिंग सही से न कि जाए तो इससे वजन कम होना, थकान, प्रोटीन और विटामिन की कमी हो सकती है। जिसकी वजह से रिकवरी में मुश्किलें आ सकती हैं।
डॉ. मेहता के मुताबिक फास्टिंग बुरा नहीं है। इसे लेकर रिसर्च हो रही है कि फास्टिंग से कैंसर सेल्स पर क्या असर हो सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि यह कैंसर को दोबारा होने से रोक सकता है। डॉ. मेहता ने बताया कि लंबे समय तक फास्टिंग मेडिकल फॉलो अप, दवाओं या बैलेंस्ड डाइट की जगह नहीं ले सकता है।
फास्टिंग हर किसी के लिए नहीं है सही
उन्होंने कैंसर सर्वाइवर को सलाह देते हुए कहा कि अगर आपको फास्टिंग करनी है तो सिर्फ अपने ऑन्कोलॉजिस्ट और डायटिशियन की देखरेख में करें। एक्सपर्ट के अनुसार खाने के समय प्रोटीन, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हाइड्रेशन की मात्रा को बनाए रखें क्योंकि हर किसी के लिए एक तरीका सही नहीं होता है। कैंसर के बाद स्ट्रेंथ आपका गोल होना चाहिए न कि भूखा रहना।
केआईएमएस अस्पताल, थाने की चीफ डायटिशियन डॉ. आमरीन शेख के अनुसार पोषण न्यूट्रिशन के नजरिए से हर कैंसर सर्वाइवर के लिए फास्टिंग का कोई एक सही शेड्यूल नहीं होता है। उन्होंने कहा कि हमारा फोकस इस बात पर होना चाहिए कि शरीर की रिकवरी, लंबे समय तक सेहतमंद रहने के लिए जरूरी कैलोरी, प्रोटीन और मिनरल्स मिल रहा है या नहीं। लंबे समय तक फास्टिंग करने से कुछ लोगों के लिए न्यूट्रिशन की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। खासतौर पर तब जब इलाज के दौरान उनका वजन कम हो गया हो, भूख कम हो गई हो या मसल्स कम हो गए हों।
दूसरे व्यक्ति की डाइट को बिना सोचे समझे अपनाने की बजाय अपनी जरूरतों के अनुसार प्लान किया गया पर्सनलाइज्ड मील बेहतर विकल्प हो सकता है।
डिस्क्लेमर: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।
