एक्टर शहाना गोस्वामी ने हाल ही में अपनी जिंदगी के एक पुराने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की। एक्टर मिलिंद सोमन के साथ था वो रिश्ते में थी। वह शहाना से से करीब 21 साल बड़े हैं। दोनों करीब डेढ़ से दो साल तक रिलेशनशिप में रहे और साल 2013 में उनका ब्रेकअप हो गया था। लेकिन शहाना के मुताबिक, इस रिश्ते के खत्म होने की वजह सिर्फ उम्र का फासला नहीं थी। उस वक्त उन्हें अपने बारे में एक ऐसी बात समझ आई, जिसने उन्हें यह रिश्ता खत्म करने का फैसला लेने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा ‘मुझे प्यार मिल रहा था, फिर भी खुश नहीं थी’। आइए जानें इसकी वजह और एक्सपर्ट से इसके बारे में राय।
मिलिंद सोमन से क्यों हुआ शहाना का ब्रेकअप?
शहाना गोस्वामी ने Priyanka Bhatt के पॉडकास्ट ‘Breakthrough Moments with Priyanka Bhatt’ में अपने पुराने रिश्ते और ब्रेकअप के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनकी जिंदगी में कई रिश्ते रहे और उनके बाद काफी दर्द भी रहा।
शहाना ने कहा कि उस समय उन्हें यह समझ आया कि जब तक वह खुद से प्यार करना नहीं सीखेंगी, तब तक किसी रिश्ते में उन्हें प्यार महसूस नहीं हो पाएगा।
उनके मुताबिक, सामने वाला इंसान अपनी तरफ से चाहे कितना भी प्यार करे या कुछ भी करे, अगर वह खुद अपने बारे में अच्छा महसूस नहीं कर रही हैं तो वह उस प्यार को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाएंगी। ऐसे में उन्हें खुद के बारे में हीन भावना, असुरक्षा और यह महसूस होने लगता है कि उन्हें जज किया जा रहा है।
यही एहसास शहाना के लिए एक बड़ा मोड़ बना। उन्होंने अपने उस समय के बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप कर लिया और कहा कि उन्हें लग रहा है कि समस्या ‘मेरे अंदर’ है। जब तक वह खुद को समझेंगी नहीं और खुद से प्यार करना नहीं सीखेंगी, तब तक कोई भी रिश्ता ठीक तरह से काम नहीं करेगा। इसलिए उन्होंने कुछ समय खुद के साथ बिताने और खुद से प्यार करना सीखने का फैसला किया।
क्या 21 साल की उम्र का अंतर ब्रेकअप की वजह था?
शहाना और मिलिंद के बीच करीब 21 साल का उम्र का अंतर था। दोनों करीब डेढ़ से दो साल तक साथ रहे और 2013 में अलग हो गए। हालांकि, शहाना ने अपने बयान में ब्रेकअप की वजह के तौर पर उम्र के इस अंतर को नहीं बताया। उनकी बातों से यह समझ आता है कि उस समय उनका सबसे बड़ा फोकस खुद को समझने और अपनी सेल्फ वर्थ पर काम करने पर था।
खुद से प्यार करना रिश्ते के लिए क्यों जरूरी है?
इस बारे में जब इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने साइकोथेरेपिस्ट और लाइफ कोच डेल्ना राजेश से बात की तो उन्होंने बताया कि हम किसी दूसरे इंसान को कितना प्यार दे पाते हैं और उससे मिलने वाले प्यार को कितना स्वीकार कर पाते हैं, इसका गहरा संबंध हमारे खुद के साथ रिश्ते से होता है।
अगर किसी व्यक्ति को अंदर से यह लगता है कि वह प्यार के लायक नहीं है, तो दूसरे व्यक्ति की तरफ से मिलने वाला प्यार और भरोसा भी उसे काफी नहीं लगता। सामने वाला ‘मैं तुमसे प्यार करता हूं’ कहे, फिर भी मन में यह सवाल बना रह सकता है कि क्या वह सच में ऐसा कह रहा है? कोई तारीफ करे तो भी हम उसे नजरअंदाज कर सकते हैं। यहां तक कि जब कोई हमें बहुत प्यार कर रहा हो, तब भी मन में उसे खो देने का डर बना रह सकता है। यानी कई बार रिश्ते में प्यार की कमी नहीं होती, बल्कि खुद की नजर में अपनी कीमत यानी सेल्फ वर्थ की कमी होती है।
सेल्फ लव का मतलब सिर्फ खुद को ट्रीट देना नहीं
आजकल सेल्फ लव को अक्सर खुद को खुश रखने, शॉपिंग करने, छुट्टी पर जाने, खुद को कोई गिफ्ट देने या अफर्मेशंस (Affirmations) बोलने से जोड़कर देखा जाता है। ये चीजें अच्छी लग सकती हैं, लेकिन असली सेल्फ की नींव सिर्फ इतनी नहीं है।डेल्ना के मुताबिक, सच्चा सेल्फ लव खुद के लिए सम्मान यानी सेल्फ से शुरू होता है।
इसका मतलब है कि किसी की स्वीकृति पाने के लिए आप अपने मूल्यों से समझौता न करें। किसी को नाराज करने के डर से खुद को पीछे न छोड़ें। खुद से किए वादों को निभाएं और अपनी शांति यानी peace की भी उतनी ही कद्र करें, जितनी उन लोगों की करते हैं जिन्हें आप प्यार करते हैं।
खुद से बात करने का तरीका भी मायने रखता है
हममें से कई लोग अपने अंदर चलने वाली उस आवाज के इतने आदी हो जाते हैं, जो हर समय हमारी कमियां निकालती रहती है, कि हमें पता ही नहीं चलता कि हम खुद से कितनी कठोरता से बात कर रहे हैं।
हम खुद को नाकामयाब कहते हैं, अपनी काबिलियत पर शक करते हैं, अपनी उपलब्धियों को छोटा समझते हैं और कई बार सिर्फ किसी और की मंजूरी पाने के लिए बार-बार खुद को एडजस्ट और कॉम्प्रोमाइज करते रहते हैं। जबकि हम किसी दूसरे इंसान से ऐसी बातें सुनना बिल्कुल पसंद नहीं करेंगे।
सेल्फ लव का मतलब खुद को परफेक्ट मानना नहीं है
सेल्फ लव का एक और मतलब यह नहीं है कि आपको अपनी हर कमी सही लगने लगे या आप खुद को परफेक्ट समझने लगें।
असल सेल्फ लव यह है कि अपनी कमियों को देखते हुए भी आप खुद के प्रति संवेदनशील रहें। अपनी गलती की जिम्मेदारी लें, लेकिन खुद को अपमानित न करें। खुद को सुधारें, लेकिन अपनी गलतियों के लिए खुद से नफरत न करने लगें।
यानी गलतियों की जिम्मेदारी लेना जरूरी है, लेकिन इसके लिए खुद को सजा देना या खुद से नफरत करना जरूरी नहीं है।
शहाना गोस्वामी की कहानी भी इसी बात की ओर इशारा करती है कि कई बार किसी रिश्ते में समस्या सिर्फ सामने वाले इंसान या रिश्ते में नहीं होती। कभी-कभी हमें खुद के साथ अपने रिश्ते को भी समझने की जरूरत होती है। शहाना ने भी उस समय यही महसूस किया और रिश्ते से अलग होकर खुद को समझने और खुद से प्यार करना सीखने को प्राथमिकता दी।
