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कभी न खत्म होने वाली बीमारी है इस चीज की लत, जानें कैसे शुरू होती है और क्या है उपाय

आप इस बीमारी का शिकार न बने और अगर बन गए हैं तो इससे कैसे बचें, इसके बारे में कुछ अहम बातें जानना जरूरी है।

Author November 25, 2017 8:27 PM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (Illustration: Subrata Dhar)

सेक्स इंसान के शरीर की अहम जरूरत है लेकिन इसकी हद से ज्यादा तलब एक खतरनाक बीमारी है। सेक्स एडिक्शन एक गंभीर बीमारी है और इससे बचना बेहद जरूरी है। ऐसे में आप इस बीमारी का शिकार न बने और अगर बन गए हैं तो इससे कैसे बचें, इसके बारे में कुछ अहम बातें जानना जरूरी है। अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट पेट्रिक कार्न्स, जिन्होंने सेक्स एडिक्शन नाम का टर्म ईजाद किया, बताते हैं कि अगर कोई शख्स हफ्ते में 14 घंटे या उससे ज्यादा का समय सेक्शुअल या हाफ-सेक्शुअल गतिविधियों में बिता रहा है, तो उसे इसकी लत लग चुकी है और वह सेक्स एडिक्शन का शिकार हो चुका है। पॉर्न साइट्स पर ज्यादा समय बिताना या फिर सड़कों पर प्रॉस्टिट्यूट्स की तलाश में भटकना, इस तरह की सेक्शुअल गतिविधियां दोहराना सेक्स एडिक्ट होने के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि पॉर्न साइट्स पर ज्यादा समय बिताना किसी की निजी समस्या भी हो सकती है लेकिन इसे सेक्स एडिक्शन के एक गंभीर लक्षण में शुमार किया जाता है। सेक्सोलॉजिस्ट रंजन भोंसले के मुताबिक सेक्स एडिक्शन पर काबू पाना काफी मुश्किल होता है कोई शख्स, एडिक्ट होने के बाद इसके नकारात्मक नतीजों से परिचित होते हुए भी इससे बच नहीं पाता।

पॉर्नोग्राफी है शुरुआत
पॉर्नोग्राफी को सेक्स एडिक्शन की अहम वजहों में से एक बताया गया है। भारत में सेक्स एडिक्ट्स एनॉनिमस एक 12 स्टेप प्रोग्राम है जो एडिक्शन से निजात दिलाने में मदद करता है। इसे आजमाने के लिए दिल्ली के वसंत विहार इलाके में इस बीमारी से जूझ रहे कई लोग बैठक करते हैं। उन्हीं में से एक समीर धर(बदला हुआ नाम) इस लत को छुड़ाने के बारे में एक अहम जानकारी देते हैं। उनके मुताबिक सेक्स एडिक्शन का इलाज नहीं किया जा सकता बल्कि इसे मैनेज किया जाता है। यह एक लंबी और काफी मुश्किल प्रक्रिया है। धर आगे बताते हैं कि सेक्स एडिक्शन की शुरुआत अमूमन सॉफ्ट पॉर्न देखने से होती है और फिर यह एक विक्राल रूप ले लेती है जिसमें एडिक्ट हिंसक पॉर्न(उदाहरण के लिए रेप वीडियो) देखने का भी आदि बन जाता है। लत लगने के बाद एडिक्ट उस पॉर्न का अनुकरण करने की भी कोशिश करता है। धर का मानना है कि पॉर्नोग्राफी महिलाओं के शोषण को ग्लोरिफाई करती है।

उपाय
समीर धर के मुताबिक सेक्स एडिक्शन का इलाज नहीं किया जा सकता बल्कि इसे मैनेज किया जाता है। भारत में ज्यादातर सेक्स/पॉर्न एडिक्शन के केस सेक्सोलॉजिस्ट्स द्वारा डील किए जाते हैं। इस बीमारी से जूझने पर किसी सेक्सोलॉजिस्ट्स से कन्सल्ट करना बेहतर उपाय है। वहीं इस बीमारी से निजात पाने के लिए डी-एडिक्शन सेंटर्स की मदद ली जा सकती है। बेंगलुरु के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस (NIMHANS) का डी-एडिक्शन सेंटर्स इस बीमारी से लड़ने में आपकी मदद कर सकता है। वहीं 2014 में दिल्ली में शुरू किए गए “सेक्स एडिक्ट्स एनॉनिमस” की मदद भी ले सकते। इससेsaawaredelhi@gmail.com के जरिए संपर्क किया जा सकता है।

(इंडियन एक्सप्रेस में छपी Dipti Nagpaul D’souza की स्टोरी के अंश)

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