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Bhabiji Ghar Par Hain के ‘सक्सेना’ ने चपरासी से लेकर प्रूफ रीडर तक का किया काम, अब एक एपिसोड की लेते हैं इतनी फीस

सानंद वर्मा ने चपरासी से लेकर प्रूफ रीडर तक का काम किया है और तमाम मुश्किलों के बाद पहचान मिली। 'भाबीजी घर पर हैं' उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी कुछ जरूरी बातें-

तमाम मुश्किलों के बाद सानंद वर्मा को मिली पहचान, जानिए और बातें

टीवी सीरियल के लोकप्रिय शो ‘भाबी जी घर पर हैं’ के किरदार सक्सेना जी (सानंद वर्मा) ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। दरअसर सक्सेना जी का असल नाम सानंद वर्मा है। सक्सेना जी का थप्पड़ खाकर ‘आई लाइक इट’ बोलने का अंदाज़ खासतौर पर दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय हो चुका है। बहुत ही कम समय में उन्होंने टीवी से फिल्मों की दुनिया में बड़ी छलांग लगाई है। सीरियल में कॉमेडी का रोल करने वाले सक्सेना जी फिल्मों में विलेन का किरदार भी निभा चुके हैं। लेकिन इनकी लाइफ काफी स्ट्रगल वाली रही है। अमर उजाला के मुताबिक, सानंद वर्मा ने चपरासी से लेकर प्रूफ रीडर तक का काम किया है और तमाम मुश्किलों के बाद पहचान मिली। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी कुछ जरूरी बातें-

सीरियल में आने से पहले सानंद वर्मा की लाइफ कैसी थी? बहुत कम लोगों को पता है कि सानंद वर्मा बिहार के रहने वाले हैं। अमर उजाला के मुताबिक, सानंद सिर्फ 8 साल की उम्र में ही काम करना शुरू कर दिए थे और इस वजह से वह स्कूल नहीं जा पाते थे। लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छूटने दी थी। सानंद वर्मा आज जिस मुकाम पर हैं, उन्हें वहां तक पहुंचने में काफी संघर्ष करना पड़ा। घर चलाने के लिए वह पिता की मदद करते थे और किताबें बेचते थे। यहां तक की चपरासी से लेकर प्रूफ रीडर तक का काम भी किया है।

मुंबई में किया स्ट्रगल: प्रभात खबर के मुताबिक, सानंद 1993 में मुंबई आए थे। वहां उन्हें बहुत स्ट्रगल करना पड़ा। सानंद मुंबई में सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक चैनल से जुड़े और फिर ब्रॉडकॉस्ट की दुनिया में चले गए थे। वहां जो पैसा कमाया उन्होंने उससे घर लिया। बता दें, सानंद वर्मा ने साल 2010 में अपने करियर की शुरुआत की थी। सानंद ‘मर्दानी’, ‘रेड’ और ‘पटाखा’ जैसी कई फिल्मों में काम कर चुके है, लेकिन टीवी शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ ने जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई है। ‘भाबीजी घर पर हैं’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है।

एक शो का कितना लेते हैं: अमर उजाला के मुताबिक, सानंद आनंद के जीवन में एक समय था जब उन्होंने 12 साल की उम्र में ट्यूशन भी पढ़ाया था जिससे उन्हें सिर्फ 15 रुपए मिलते थे। लेकिन उनके कड़े संघर्षों ने ही उन्हें आज इस कामयाबी तक पहुंचाया है। बता दें कि आज के समय में वह ‘भाबीजी घर पर हैं’ शो के प्रति एपिसोड के लिए 30 हजार रूपए की फीस लेते हैं। महीने में सिर्फ इसी शो से सानंद वर्मा करीब 90 लाख रूपए कमाते हैं।

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